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सीमा पर मजबूत स्वास्थ्य सेवा रोटी-बेटी का संबंधों ढोर में पिरो सकती है प्रेम का धागा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 11:51 PM IST
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Less Medical Facility in Jhulaghat
पीएचसी झूलाघाट। - फोटो : PITHORAGARH
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। झूलाघाट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भारत के साथ ही नेपाल के नागरिक भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने आते हैं लेकिन डॉक्टर और अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में अब लोगों को मजबूरन पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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मूनाकोट ब्लॉक से 16 किमी की दूरी पर झूलाघाट कस्बा बसा है। काली नदी नेपाल और भारत की सीमाओं अलग-अलग करती हैं। सीमा पर बसे नेपाल और भारत गांव के लोग एक-दूसरे पर निर्भर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य जरूरी चीजों के लिए दोनों देशों के लोग वार-पार आवाजाही करते हैं। नेपाल क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत आते हैं लेकिन पीएचसी में व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होने के कारण कई नेपाली नागरिकों को पिथौरागढ़ आकर निजी अस्पतालों में अधिक धन खर्च करना पड़ता है।
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अस्पताल में 10 साल पहले लगी एक्स-रे मशीन जंग खा चुकी है। पैथोलॉजी लैब नहीं है। वर्ष 2015 से डॉक्टर भी नहीं है। इस कारण नेपाल के नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है और या तो वह मजबूरन पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय जाते हैं या फिर वह नेपाल के अस्पताल में ही उपचार करना बेहतर समझते हैं।
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पीएचसी में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बदहाल हैं। जबकि पीएचसी पर क्षेत्र की पांच हजार की आबादी के साथ ही नेपाल के एक दर्जन से अधिक गांव निर्भर हैं। इसके बाद भी यहां पर व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हैं। कहने को ये सीमा क्षेत्र है। व्यवस्थाएं दुरुस्त होती तो रोटी-बेटी के संबंध भी मजबूत होते और सीमा पर व्यापार भी मजबूत होता। -टीकाराम भट्ट, भारतीय, नागरिक

नेपाल के एक दर्जन से अधिक गांव के लोग पीएचसी झूलाघाट की स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। मगर प्राथमिक उपचार के बाद पिथौरागढ़ रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होती है तो आर्थिक रूप से कमजोर नेपाली नागरिकों को ज्याद परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भारत-नेपाल के संबंधों में मिठास खोलने की काम करती है। -करन साउद, नेपाली नागरिक
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