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Pithoragarh News: शिकार की तलाश में आबादी तक पहुंच रहे तेंदुए
Wed, 31 May 2023 11:07 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 31 May 2023 11:07 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में तेंदुओं की तादाद काफी अधिक है। जंगलों में भोजन नहीं मिलने से तेंदुए अब आबादी का रुख कर रहे हैं। इसके चलते इंसान इनका आसानी से शिकार बन रहे हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि पहले तेंदुआ या अन्य जीव सीधे आबादी का रुख नहीं करते थे। उन्हें जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिल जाता था। यदाकदा ही ऐसे मामले सुनाई देते थे जब तेंदुए ने गांव में पहुंच जानवरों पर हमला किया हो। वर्तमान में अधिकांश गांवों में सड़क पहुंच गई है। इन सड़कों पर दिन-रात वाहनों का आवागमन रहता है। गांवों में अब आबादी कम हो गई है। मकान भी दूर-दूर हैं। बसासत में छितराव से वन्यजीवों का जीवन भी प्रभावित हुआ है।
गंगोलीहाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी मनोज सनवाल का कहना है कि एक नर तेंदुए का क्षेत्र 16 से 18 वर्ग किमी के बीच होता है। इतने क्षेत्र में नर तो एक ही रहता है लेकिन मादाएं अधिक भी हो सकती है। साथ ही नर तेंदुओं के बीच आपसी संघर्ष में कमजोर तेंदुआ तीन-चार किमी के दायरे में ही अपना आवास ढूंढता है। जंगलों में भोजन नहीं मिलने से तेंदुए सीधे आबादी में पहुंच रहे हैं जहां उनका संघर्ष मानव से हो रहा है। जंगलों में लोमड़ी की संख्या बेहद कम रह जाने से भी तेंदुआ और सुअरों की तादाद में इजाफा हो रहा है। वन्यजीवों की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि आने वाले 10 वर्षों में तेंदुओं की संख्या में काफी इजाफा हो जाएगा।
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शहर और गांवों में कुत्तों की संख्या काफी बढ़ गई हैं। इनके शिकार की तलाश में तेंदुए आबादी की ओर आ रहे हैं। दुर्भाग्य से इंसान इसकी चपेट में आ रहे हैं। - जीवन मोहन दोगड़े, डीएफओ, पिथौरागढ़।
पिंजरों के आसपास भी नहीं फटक रहा तेंदुआ
पिथौरागढ़। गंगोलीहाट के जाखनी उप्रेती के गितोड़ तोक में तेंदुए के हमले में हुई बच्चे की मौत के बाद वन विभाग ने दो पिंजरे लगाए हैं। साथ ही छह कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं लेकिन अभी तक तेंदुआ न तो पिंजरों में कैद हुआ और न ही कैमरे में ट्रैप हुआ है। वन विभाग की दो टीमों के 20 कार्मिक रेंजर मनोज सनवाल के नेतृत्व में लगातार जंगल में गश्त कर रहे हैं। रेंजर सनवाल का कहना है कि युवा तेंदुआ हमले के बाद डर जाता है और वह अगले कुछ दिन तक घटनास्थल के आसपास नहीं आता है।
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बुजुर्ग बताते हैं कि पहले तेंदुआ या अन्य जीव सीधे आबादी का रुख नहीं करते थे। उन्हें जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिल जाता था। यदाकदा ही ऐसे मामले सुनाई देते थे जब तेंदुए ने गांव में पहुंच जानवरों पर हमला किया हो। वर्तमान में अधिकांश गांवों में सड़क पहुंच गई है। इन सड़कों पर दिन-रात वाहनों का आवागमन रहता है। गांवों में अब आबादी कम हो गई है। मकान भी दूर-दूर हैं। बसासत में छितराव से वन्यजीवों का जीवन भी प्रभावित हुआ है।
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गंगोलीहाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी मनोज सनवाल का कहना है कि एक नर तेंदुए का क्षेत्र 16 से 18 वर्ग किमी के बीच होता है। इतने क्षेत्र में नर तो एक ही रहता है लेकिन मादाएं अधिक भी हो सकती है। साथ ही नर तेंदुओं के बीच आपसी संघर्ष में कमजोर तेंदुआ तीन-चार किमी के दायरे में ही अपना आवास ढूंढता है। जंगलों में भोजन नहीं मिलने से तेंदुए सीधे आबादी में पहुंच रहे हैं जहां उनका संघर्ष मानव से हो रहा है। जंगलों में लोमड़ी की संख्या बेहद कम रह जाने से भी तेंदुआ और सुअरों की तादाद में इजाफा हो रहा है। वन्यजीवों की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि आने वाले 10 वर्षों में तेंदुओं की संख्या में काफी इजाफा हो जाएगा।
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शहर और गांवों में कुत्तों की संख्या काफी बढ़ गई हैं। इनके शिकार की तलाश में तेंदुए आबादी की ओर आ रहे हैं। दुर्भाग्य से इंसान इसकी चपेट में आ रहे हैं। - जीवन मोहन दोगड़े, डीएफओ, पिथौरागढ़।
पिंजरों के आसपास भी नहीं फटक रहा तेंदुआ
पिथौरागढ़। गंगोलीहाट के जाखनी उप्रेती के गितोड़ तोक में तेंदुए के हमले में हुई बच्चे की मौत के बाद वन विभाग ने दो पिंजरे लगाए हैं। साथ ही छह कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं लेकिन अभी तक तेंदुआ न तो पिंजरों में कैद हुआ और न ही कैमरे में ट्रैप हुआ है। वन विभाग की दो टीमों के 20 कार्मिक रेंजर मनोज सनवाल के नेतृत्व में लगातार जंगल में गश्त कर रहे हैं। रेंजर सनवाल का कहना है कि युवा तेंदुआ हमले के बाद डर जाता है और वह अगले कुछ दिन तक घटनास्थल के आसपास नहीं आता है।