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थल-मुनस्यारी सड़क नया बस्ती के पास 100 मीटर दरकी
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नाचनी (पिथौरागढ़)। नया बस्ती में भूस्खलन से करीब सौ मीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे थल-मुनस्यारी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई, जिससे यात्रियों और क्षेत्रवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोनिवि के अधिकारी सोमवार को सड़क खुलने की बात कह रहे हैं।
नाचनी से डेढ़ किमी आगे नया बस्ती में शनिवार रात को पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर आ गिरा, जिससे करीब 100 मीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। इससे वाहनों की आवाजाही ठप हो। लोग वाहन बदलकर गंतव्य को गए। पहाड़ी से लगातार मलबा गिर रहा है, जिससे लोगों को पहाड़ चढ़कर क्षतिग्रस्त हिस्से को पार करना पड़ रहा है।
लोनिवि के अवर अभियंता विनीत सैनी ने बताया कि नया बस्ती में पहाड़ी को काटकर सड़क का निर्माण करना है। जेसीबी से पहाड़ कटिंग का कार्य संभव नहीं है। पोकलैन मशीन मंगाई है। सोमवार दोपहर बाद ही सड़क में यातायात बहाल हो पाएगा। वहीं भूस्खलन क्षेत्र रातीगाड़ में हल्के वाहनों के लिए सड़क खुल गई है। रातीगाड़ में बड़े वाहनों की आवाजाही न होने से 12 सितंबर से नाचनी में खड़ा रसोई गैस का वाहन और पेट्रोलियम पदार्थ का टैंकर रविवार को वापस लौट गया है। इन वाहनों को मुनस्यारी जाना था। सड़क बंद होने से मुनस्यारी में रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थ की किल्लत होने की संभावना पैदा हो गई है।
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सेला गांव के लिए क्षतिग्रस्त पुल से हो रही आवाजाही
धारचूला। दारमा घाटी के धौलीगंगा में बना सेलागांव को जोड़ने वाला पुल 18 अगस्त को मूसलाधार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ने पर क्षतिग्रस्त हो गया। इस पुल की मरम्मत नहीं हुई है और लोगों को जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त पुल से ही आवाजाही करनी पड़ रही है।
समाजसेवी नरेंद्र सेलाल के नेतृत्व में लोगों ने तहसीलदार भुवन लाल वर्मा के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजकर पुल की मरम्मत करने की मांग की। नरेंद्र सेलाल ने कहा कि गांव में 56 परिवार माइग्रेशन में गए हैं। पुल से लोगों की लगातार आवाजाही बनी है। हर वक्त हादसे की आशंका बनी हुई है। माइग्रेशन का मात्र डेढ़ महीना बचा है। नवंबर में गांव के लोग शीतकालीन प्रवास पर निचले इलाकों को लौटने लगेंगे। कहा है कि पुल की मरम्मत के लिए 10 दिन के भीतर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो गांव के लोग आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएंगे। ज्ञापन देने वालों में देव सिंह, लक्ष्मण सिंह, अंशुल सेलाल, विक्रम, मनीषा, दशरथी, दिव्या, मीरा, पुष्कर आदि शामिल थे।
गोठी में पहाड़ कटान का काम जारी
धारचूला। धारचूला के गोठी में शुक्रवार रात को भूस्खलन से सड़क दरक गई। इसके बाद शनिवार देर शाम तक आवाजाही शुरू हो गई थी। रविवार को भी सीमा सड़क संगठन ने पहाड़ी कटान का काम जारी रखा। पहाड़ी को काटकर उस स्थान पर सड़क को चौड़ा किया जा रहा है, ताकि वाहनों की आवाजाही में कोई दिक्कत न हो।
कहां कितनी हुई बारिश
मुनस्यारी 33 एमएम
धारचूला 22.20 एमएम
गंगोलीहाट 16 एमएम
पिथौरागढ़ 3 एमएम
डीडीहाट 2 एमएम
बेड़ीनाग शून्य
आज भारी बारिश की चेतावनी
पिथौरागढ़। भारत मौसम विज्ञान विभाग देहरादून से जारी अलर्ट के अनुसार 16 सितंबर को कहीं-कहीं खासकर कुमाऊं क्षेत्र में भारी बारिश की संभावना है। जिला प्रशासन ने चेतावनी को देखते हुए सभी विभागों को अलर्ट कर दिया है।
सात किमी शव यात्रा लेकर पहुंचे आईटीबीपी के जवान
नाचनी। शुक्रवार की रात को राया गांव में कौशल्या देवी (80) पत्नी प्रेम सिंह की मृत्यु हो गई थी। राया से बांसबगड़ आने के लिए सात किमी पैदल चलना पड़ता है। रास्ते ध्वस्त होने से गांव के लोग अंतिम संस्कार के लिए शव को बांसबगड़ नहीं ला पाए। प्रशासन की पहल पर आईटीबीपी के 12 जवानों का दल शनिवार को गांव भेजा गया। रविवार को आईटीबीपी के जवान और पुलिस कर्मी शव लेकर बांसबगड़ पहुंचे। बरा और भुजगढ़ नदी के संगम में बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया गया।
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नाचनी से डेढ़ किमी आगे नया बस्ती में शनिवार रात को पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर आ गिरा, जिससे करीब 100 मीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। इससे वाहनों की आवाजाही ठप हो। लोग वाहन बदलकर गंतव्य को गए। पहाड़ी से लगातार मलबा गिर रहा है, जिससे लोगों को पहाड़ चढ़कर क्षतिग्रस्त हिस्से को पार करना पड़ रहा है।
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लोनिवि के अवर अभियंता विनीत सैनी ने बताया कि नया बस्ती में पहाड़ी को काटकर सड़क का निर्माण करना है। जेसीबी से पहाड़ कटिंग का कार्य संभव नहीं है। पोकलैन मशीन मंगाई है। सोमवार दोपहर बाद ही सड़क में यातायात बहाल हो पाएगा। वहीं भूस्खलन क्षेत्र रातीगाड़ में हल्के वाहनों के लिए सड़क खुल गई है। रातीगाड़ में बड़े वाहनों की आवाजाही न होने से 12 सितंबर से नाचनी में खड़ा रसोई गैस का वाहन और पेट्रोलियम पदार्थ का टैंकर रविवार को वापस लौट गया है। इन वाहनों को मुनस्यारी जाना था। सड़क बंद होने से मुनस्यारी में रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थ की किल्लत होने की संभावना पैदा हो गई है।
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सेला गांव के लिए क्षतिग्रस्त पुल से हो रही आवाजाही
धारचूला। दारमा घाटी के धौलीगंगा में बना सेलागांव को जोड़ने वाला पुल 18 अगस्त को मूसलाधार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ने पर क्षतिग्रस्त हो गया। इस पुल की मरम्मत नहीं हुई है और लोगों को जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त पुल से ही आवाजाही करनी पड़ रही है।
समाजसेवी नरेंद्र सेलाल के नेतृत्व में लोगों ने तहसीलदार भुवन लाल वर्मा के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजकर पुल की मरम्मत करने की मांग की। नरेंद्र सेलाल ने कहा कि गांव में 56 परिवार माइग्रेशन में गए हैं। पुल से लोगों की लगातार आवाजाही बनी है। हर वक्त हादसे की आशंका बनी हुई है। माइग्रेशन का मात्र डेढ़ महीना बचा है। नवंबर में गांव के लोग शीतकालीन प्रवास पर निचले इलाकों को लौटने लगेंगे। कहा है कि पुल की मरम्मत के लिए 10 दिन के भीतर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो गांव के लोग आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएंगे। ज्ञापन देने वालों में देव सिंह, लक्ष्मण सिंह, अंशुल सेलाल, विक्रम, मनीषा, दशरथी, दिव्या, मीरा, पुष्कर आदि शामिल थे।
गोठी में पहाड़ कटान का काम जारी
धारचूला। धारचूला के गोठी में शुक्रवार रात को भूस्खलन से सड़क दरक गई। इसके बाद शनिवार देर शाम तक आवाजाही शुरू हो गई थी। रविवार को भी सीमा सड़क संगठन ने पहाड़ी कटान का काम जारी रखा। पहाड़ी को काटकर उस स्थान पर सड़क को चौड़ा किया जा रहा है, ताकि वाहनों की आवाजाही में कोई दिक्कत न हो।
कहां कितनी हुई बारिश
मुनस्यारी 33 एमएम
धारचूला 22.20 एमएम
गंगोलीहाट 16 एमएम
पिथौरागढ़ 3 एमएम
डीडीहाट 2 एमएम
बेड़ीनाग शून्य
आज भारी बारिश की चेतावनी
पिथौरागढ़। भारत मौसम विज्ञान विभाग देहरादून से जारी अलर्ट के अनुसार 16 सितंबर को कहीं-कहीं खासकर कुमाऊं क्षेत्र में भारी बारिश की संभावना है। जिला प्रशासन ने चेतावनी को देखते हुए सभी विभागों को अलर्ट कर दिया है।
सात किमी शव यात्रा लेकर पहुंचे आईटीबीपी के जवान
नाचनी। शुक्रवार की रात को राया गांव में कौशल्या देवी (80) पत्नी प्रेम सिंह की मृत्यु हो गई थी। राया से बांसबगड़ आने के लिए सात किमी पैदल चलना पड़ता है। रास्ते ध्वस्त होने से गांव के लोग अंतिम संस्कार के लिए शव को बांसबगड़ नहीं ला पाए। प्रशासन की पहल पर आईटीबीपी के 12 जवानों का दल शनिवार को गांव भेजा गया। रविवार को आईटीबीपी के जवान और पुलिस कर्मी शव लेकर बांसबगड़ पहुंचे। बरा और भुजगढ़ नदी के संगम में बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया गया।