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थल घाटी में समय से पहले ही आया अमरूद में फल

Wed, 16 Mar 2016 10:49 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूराे/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Wed, 16 Mar 2016 10:49 PM IST
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Land in the valley came prematurely in guava fruit
थल घाटी में समय से पहले ही आया अमरूद में फल - फोटो : अमर उजाला
 घाटी वाले इलाकों में इस बार आम और लीची में तो समय से पहले बौर आ गए लेकिन थल में अमरूद के कुछ पेड़ों में फल आने से फल उत्पादक हैरान हैं। आमतौर पर पर्वतीय इलाकों में अमरूद में जून, जुलाई में फल लगते हैं और यह अगस्त, सितंबर में पककर तैयार होते हैं लेकिन इस बार मार्च में ही फल लग गए हैं। कई फलों का आकार तो ठीकठाक हो गया है।
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गोल निवासी हरीश चंद के खेत में अमरूद के दो पेड़ों में फल लगे हैं। हरीश चंद ने बताया कि फल काफी संख्या में लगे थे लेकिन बंदरों ने उनको तोड़कर खा दिया है। उन्होंने कहा कि अभी से फल जिस आकार के हो गए हैं उससे लगता है कि यह अप्रैल में पक जाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की विचित्रता पहली बार देखने को मिली है। इस बार जाड़ों के सीजन में बारिश न होने के कारण कई प्रकार के बदलाव सामने आ रहे हैं। फलों पर इसका व्यापक असर पड़ा है। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो पहाड़ में फल उत्पादन चौपट हो जाएगा। थल और मुवानी घाटी में सैकड़ों लोग अमरूद के फलों को बेचकर आजीविका चलाते हैं। उनको समय से पहले फल आने से चिंता सताने लगी है। 
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तापमान बढ़ने से आई ऐसी स्थिति
पिथौरागढ़। जिला उद्यान अधिकारी डा. मीनाक्षी जोशी का कहना है कि तापमान बढ़ने से इस प्रकार की स्थिति सामने आई है। उन्होंने कहा कि आम और लीची में समय से पहले बौर आने और अमरूद में फल आने के पीछे तापमान बढ़ना ही मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि यदि जाड़ों में बारिश हो जाती तो तापमान नहीं बढ़ता। डा. मीनाक्षी ने कहा कि समय से पहले लगने वाला फल विकसित नहीं हो पाएगा और उसका स्वाद भी अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मौसम के कारण पैदा हो रही स्थितियां गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति का अध्ययन करने के लिए टीम भेजी जा रही है। यह पता लगाया जाएगा कि कितने स्थानों पर ऐसी विचित्रता सामने आ रही हैं। 
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