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आजाद हिंद फौज के सेनानी जवाहर सिंह नहीं रहे

Tue, 27 Dec 2016 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 27 Dec 2016 10:17 PM IST
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Jawahar Singh's Indian National Army fighters are not
सेनानी जवाहर सिंह मारकुन - फोटो : अमर उजाला

आजाद हिंद फौज के सेनानी जवाहर सिंह मारकुन का मंगलवार शाम चार बजे अपने गांव मुवानी में 99 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ थे। 21 जुलाई 1917 को दिगरा मुवानी में प्रताप सिंह मारकुन के घर जन्मे जवाहर सिंह जूनियर तक शिक्षा लेने के बाद आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। फौज में रहते हुए उन्होंने कई लड़ाईयां लड़ीं। उनको सात माह तक कोलकाता जेल में भी रखा गया था। आजादी से कुछ पहले 1947 में उनको फौज छोड़कर घर जाने की सलाह दी गई। वह किसी तरह अपने गांव दिगरा मुवानी पहुंच गए। 1972 में सरकार ने उनको स्वाधीनता सेनानी घोषित किया और सरकारी पेंशन लागू कर दी।

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जवाहर सिंह सुभाष बोस के अनन्य भक्त थे। उन्होंने अपने घर पर भी सुभाष बोस के कई चित्र लगाए हैं। मुवानी क्षेत्र के लोग उनकी वीरता और जोश से इतने उत्साहित थे कि उनका नाम ही आजाद रख दिया गया। बेहद सादगी पसंद जवाहर सिंह को राजनैतिक और सामाजिक घटनाक्रमों की खूब जानकारी रहती थी। वह स्वस्थ रहने तक चौपाल लगाकर देश की आजादी के आंदोलन की जानकारी लोगों को देते थे। सेनानी के बेटे लक्ष्मण सिंह ने बताया कि अंतिम संस्कार बुधवार को भंडारीगांव के पास रामगंगा के तट पर किया जाएगा।
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प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई है। जवाहर सिंह के पांच बेटे थे, लेकिन अब दो ही जीवित हैं। बुधवार को उनके बेटे कल्याण सिंह और लक्ष्मण सिंह मुखाग्नि देंगे। स्वाधीनता सेनानी के निधन की सूचना मिलते ही पूरे मुवानी क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके सम्मान में मुवानी के व्यापारियों ने बुधवार को व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला लिया है।
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समाज, राजनीति में बदलाव से दुखी रहते थे
सेनानी जवाहर सिंह मारकुन समाज और देश की राजनीति में आ रहे बदलाव से काफी दुखी रहते थे। कई बार जिला मुख्यालय में आयोजित सम्मान समारोहों में उन्होंने अपनी इस पीड़ा को व्यक्त भी किया था। वह कहते थे कि आज की राजनीति में समर्पण की कमी है। हर व्यक्ति स्वार्थ के लिए ही राजनीति में कदम रखता है। वह समाज में आ रहे बदलाव, गांवों से हो रहे पलायन, विकास के नाम पर की जाने वाली लूट से खासे चिंतित रहते थे।

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