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Pithoragarh News: अयोध्या में महेश राम के हुड़के की थाप पर गूंजेगा जय श्री राम
Fri, 12 Jan 2024 11:04 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 12 Jan 2024 11:04 PM IST
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उत्तराखंड के प्रमुख वाद्ययंत्र हुड़के के साथ पिथौरागढ़ के स्यूनी गांव निवासी महेश राम। स्रोत: प
पिथौरागढ़। 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर उत्तराखंड के प्रमुख वाद्य यंत्र हुड़के की थाप पर जय श्री राम के भजन गूंजेंगे। पिथौरागढ़ के स्यूनी निवासी 45 वर्षीय महेश राम को इसके लिए विशेष आमंत्रण मिला है। विशेष आमंत्रण मिलने के बाद वह काफी उत्साहित हैं और अयोध्या जाने के लिए बेताब हैं।
अयोध्या में 500 साल बाद बने भव्य राम मंदिर के लोकार्पण का इंतजार हर व्यक्ति को है। बचपन से ही हुड़का वाद्ययंत्र बनाने और बजाने वाले स्यूनी निवासी महेश राम को हुड़के की धुन पर राम भजन प्रस्तुत करने के लिए विशेष आमंत्रण मिला है। महेश राम लंबे समय से उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रही भाव राग ताल नाट्य अकादमी पिथौरागढ़ से जुड़े हैं। उनके बनाए गए हुड़के की काफी डिमांड है। महेश राम 18 जनवरी को लखनऊ पहुचेंगे। इसके बाद वह केंद्रीय नाट्य अकादमी नई दिल्ली की टीम के साथ अभ्यास करेंगे।
इस दौरान महेश राम यहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख वाद्य यंत्रों के साथ राम भजन की रिकार्डिंग करेंगे। वह 22 जनवरी को अयोध्या में हुड़के की धुन पर राम भजन प्रस्तुत करेंगे। भाव राग ताल नाट्य अकादमी के निदेशक और राष्ट्रीय उस्ताद बिस्मिल्ला खां पुरस्कार विजेता कैलाश कुमार और लोक और जनजाति विभाग केंद्रीय संगीत नाट्य अकादमी के सलाहकार मनीष ममगई का कहना है कि अयोध्या में होने वाले श्री राम मंदिर के भव्य लोकार्पण के अवसर देश भर के अलग-अलग हिस्सों से 25 प्रमुख वाद्य यंत्र वादकों को बुलाया गया है। यहां पर सब मिलकर वह प्रस्तुति देंगे।
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हुड़के के साथ दमाऊं भी बनाते हैं महेश राम
पिथौरागढ़। स्यूनी निवासी महेश राम पिथौरागढ़ में उत्तराखंड से विलुप्त हो रहे प्रमुख वाद्य यंत्रों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। महेश राम का कहना है कि नई पीढ़ी पुराने वाद्य यंत्रों को विलुप्त होने से बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। नई पीढ़ी अपना पुश्तैनी काम नहीं करना चाहती हैं क्योंकि उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है। अगर नई पीढ़ी को प्रोत्साहित किया जाए तो सदियों से चली आ रही संस्कृति और परंपरा को बचाया जा सकता है। लोक कलाकार और लोक वाद्य यंत्रों को बचाया जा सकता है। संवाद
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अयोध्या में 500 साल बाद बने भव्य राम मंदिर के लोकार्पण का इंतजार हर व्यक्ति को है। बचपन से ही हुड़का वाद्ययंत्र बनाने और बजाने वाले स्यूनी निवासी महेश राम को हुड़के की धुन पर राम भजन प्रस्तुत करने के लिए विशेष आमंत्रण मिला है। महेश राम लंबे समय से उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रही भाव राग ताल नाट्य अकादमी पिथौरागढ़ से जुड़े हैं। उनके बनाए गए हुड़के की काफी डिमांड है। महेश राम 18 जनवरी को लखनऊ पहुचेंगे। इसके बाद वह केंद्रीय नाट्य अकादमी नई दिल्ली की टीम के साथ अभ्यास करेंगे।
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इस दौरान महेश राम यहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख वाद्य यंत्रों के साथ राम भजन की रिकार्डिंग करेंगे। वह 22 जनवरी को अयोध्या में हुड़के की धुन पर राम भजन प्रस्तुत करेंगे। भाव राग ताल नाट्य अकादमी के निदेशक और राष्ट्रीय उस्ताद बिस्मिल्ला खां पुरस्कार विजेता कैलाश कुमार और लोक और जनजाति विभाग केंद्रीय संगीत नाट्य अकादमी के सलाहकार मनीष ममगई का कहना है कि अयोध्या में होने वाले श्री राम मंदिर के भव्य लोकार्पण के अवसर देश भर के अलग-अलग हिस्सों से 25 प्रमुख वाद्य यंत्र वादकों को बुलाया गया है। यहां पर सब मिलकर वह प्रस्तुति देंगे।
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हुड़के के साथ दमाऊं भी बनाते हैं महेश राम
पिथौरागढ़। स्यूनी निवासी महेश राम पिथौरागढ़ में उत्तराखंड से विलुप्त हो रहे प्रमुख वाद्य यंत्रों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। महेश राम का कहना है कि नई पीढ़ी पुराने वाद्य यंत्रों को विलुप्त होने से बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। नई पीढ़ी अपना पुश्तैनी काम नहीं करना चाहती हैं क्योंकि उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है। अगर नई पीढ़ी को प्रोत्साहित किया जाए तो सदियों से चली आ रही संस्कृति और परंपरा को बचाया जा सकता है। लोक कलाकार और लोक वाद्य यंत्रों को बचाया जा सकता है। संवाद