{"_id":"604518a18ebc3e5921586c5c","slug":"jai-baba-malaynath-of-didihat-pithoragarh-news-hld417392312","type":"story","status":"publish","title_hn":"मलयनाथ बाबा को रक्षक के रूप में पूजा जाता है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मलयनाथ बाबा को रक्षक के रूप में पूजा जाता है
विज्ञापन
सिराकोट मंदिर।
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। नगर की पहाड़ियों में समुद्र तल से 7500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सिराकोट मंदिर के मलयनाथ बाबा को रक्षक के रूप में पूजा जाता है। पहले भारतीय सेना भी इस मंदिर में पूजा, अर्चना करती थी लेकिन अब सेना में भर्ती होने से पहले और बाद में सैनिक परिवार इस मंदिर में जरूर आते हैं।
सिराकोट मंदिर मूल रूप से स्वयं प्रकट शिवलिंग स्वरूप में विराजमान है। डीडीहाट के पास के सामने ही ऊंची चोटी पर सिराकोट स्थित है। सिराकोट के नाम से पूर्व में इस तहसील को सिरा पट्टी के नाम से भी जाना जाता था। शिव के मंदिर के रूप में सिराकोट में पूरे वर्षभर श्रद्धालु पूजा के लिए आते हैं।
महाशिवरात्रि पर्व पर हजारों संख्या आते हैं। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष रवि डसीला ने बताया कि इस मंदिर को अपार शक्ति का केंद्र भी माना जाता है। लोग बाहर से भी हर वर्ष पूजा, अर्चना करने सपरिवार यहां आते हैं। वह बताते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के मैदान जब यहां के सैनिक जलपोत से कहीं जा रहे थे, तो अचानक उनका जहाज डूबने लगा।
विज्ञापन
तब जहाज के कैप्टन ने जवानों से कहा कि इस मुसीबत से भगवान ही बचा सकते हैं। आप सब लोग अपने ईष्ट देव को याद कर लो। कहते हैं कि तब डीडीहाट क्षेत्र के कई सैनिकों ने मलयनाथ बाबा का नाम और सिराकोट मंदिर का जयघोष किया। तभी उनका जहाज डूबने से बच गया।
विज्ञापन
सिराकोट मंदिर मूल रूप से स्वयं प्रकट शिवलिंग स्वरूप में विराजमान है। डीडीहाट के पास के सामने ही ऊंची चोटी पर सिराकोट स्थित है। सिराकोट के नाम से पूर्व में इस तहसील को सिरा पट्टी के नाम से भी जाना जाता था। शिव के मंदिर के रूप में सिराकोट में पूरे वर्षभर श्रद्धालु पूजा के लिए आते हैं।
विज्ञापन
महाशिवरात्रि पर्व पर हजारों संख्या आते हैं। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष रवि डसीला ने बताया कि इस मंदिर को अपार शक्ति का केंद्र भी माना जाता है। लोग बाहर से भी हर वर्ष पूजा, अर्चना करने सपरिवार यहां आते हैं। वह बताते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के मैदान जब यहां के सैनिक जलपोत से कहीं जा रहे थे, तो अचानक उनका जहाज डूबने लगा।
विज्ञापन
तब जहाज के कैप्टन ने जवानों से कहा कि इस मुसीबत से भगवान ही बचा सकते हैं। आप सब लोग अपने ईष्ट देव को याद कर लो। कहते हैं कि तब डीडीहाट क्षेत्र के कई सैनिकों ने मलयनाथ बाबा का नाम और सिराकोट मंदिर का जयघोष किया। तभी उनका जहाज डूबने से बच गया।