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जलागम विकास इकाई के कार्यों की जांच के निर्देश
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 06 Sep 2017 10:50 PM IST
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पिथौरागढ़ में जलागम के कामों की समीक्षा करते डीएम
- फोटो : अमर उजाला
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जिलाधिकारी सी रविशंकर ने जिला जलागम विकास इकाई द्वारा किए गए कार्यों की जांच और स्थलीय निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। जिला जलागम विकास इकाई के कार्यों की समीक्षा के दौरान डीएम ने यह निर्देश कार्यदायी संस्था कृषि और वन विभाग के अधिकारियों को दिए।
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डीएम ने कहा कि स्थल पर जाकर एक माह के भीतर कार्य के फोटोग्राफ उपलब्ध कराने होंगे। कार्यस्थल में लगे सूचना पट पर लागत समेत सभी जानकारी अंकित करनी होगी। कार्य में किसी प्रकार की धोखाधड़ी तो नहीं यानि की एक ही काम को कई विभागों और योजनाओं से नहीं किया गया है, इसके संबंध में कार्यदायी संस्थाओं से एक सप्ताह के भीतर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कहा कि योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ स्थानीय लोगों को मिले, ऐसा प्रयास करना होगा। डीएम ने कहा कि सिंचाई गूलों, टैंकों, वर्षा जल संग्रहण टैंक में पानी की उपलब्धता होनी चाहिए।
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मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि जिला जलागम विकास इकाई की चार परियोजनाएं संचालित हैं। पहले चरण में विकासखंड डीडीहाट, कनालीछीना, दूसरे चरण में बेड़ीनाग, तीसरे चरण में मूनाकोट, विण में जलागम के काम चल रहे हैं। चारों परियोजनाओं में 53 करोड़ के सापेक्ष वन विभाग को 3.6 करोड़, कृषि विभाग को 5.42 करोड़ रुपये मिले हैं। चैकडैम, नदी सुरक्षा, सिंचाई गूल, सिंचाई टैंक आदि निर्माण कराए गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धारचूला के 32 गांवों में जलागम विकास के कार्य चल रहे हैं। इसके लिए 104 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। कनालीछीना के क्षेत्र प्रमुख प्रशांत भंडारी ने योजना में अनियमितता का मामला उठाया था। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी आशीष चौहान, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. पंकज जोशी आदि मौजूद थे।
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