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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   India-China trade, which resumed after seven years, ended ahead of schedule; business remained lackluster

पिथौरागढ़: सात साल बाद शुरू हुआ भारत-चीन व्यापार समय से पहले बंद, कारोबार रहा फीका

Thu, 29 Oct 2026 12:30 PM IST
गायत्री जोशी शालू दताल
शालू दताल Published by: गायत्री जोशी Updated Thu, 29 Oct 2026 12:30 PM IST
सार

सात साल बाद शुरू हुआ लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार तय समय से छह दिन पहले बंद हो गया। चीन प्रशासन के निर्देश पर भारतीय व्यापारियों को 26 अक्तूबर से लौटना पड़ा। 

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India-China trade, which resumed after seven years, ended ahead of schedule; business remained lackluster
चीन और भारत - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सात साल बाद लिपुलेख दर्रे से शुरू हुआ भारत-चीन व्यापार तय समय से छह दिन पहले ही बंद हो गया है। चीन प्रशासन ने अधिक बर्फबारी की आशंका के चलते भारतीय व्यापारियों को जल्द लौटने के निर्देश दिए थे। इस बार अंतरराष्ट्रीय कारोबार फीका रहने से व्यापारियों को अधिक लाभ नहीं मिल पाया।

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यह व्यापार 31 अक्तूबर तक चलना था लेकिन चीन के निर्देशों के बाद भारतीय व्यापारियों ने 26 अक्तूबर से स्वदेश लौटना शुरू कर दिया। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने बताया कि चीन प्रशासन के निर्देश पर तय समय से पूर्व व्यापार समेटना पड़ा। ट्रेड कार्यालय के अनुसार, इस बार व्यापार में 74.95 लाख रुपये के सामान का निर्यात किया गया। वहीं, 74.51 लाख रुपये के सामान का आयात हुआ। भारतीय व्यापारियों ने मुख्य रूप से गुड़, चीनी और मिश्री का निर्यात किया। आयातित सामान में ऊनी कपड़े और सांबर के जूते शामिल थे।

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व्यापारी महेश ह्यांकी ने कहा कि देर से शुरू होने और समय से पूर्व खत्म होने के कारण व्यापार फीका रहा। इससे भारतीय व्यापारियों को बड़ा लाभ नहीं मिलेगा। वर्ष 2019 में कोरोनाकाल के बाद लिपुलेख दर्रे से व्यापार पर रोक लग गई थी। चीन प्रशासन ने अधिक बर्फबारी से सड़क बंद होने की संभावना को समय से पहले व्यापार बंद करने का कारण बताया।

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गुंजी में होगी आयातित सामान की जांच

चीन की तकलाकोट मंडी से लौटे भारतीय व्यापारियों के सामान की गुंजी में जांच की जाएगी। कस्टम विभाग ने आयात किए गए सामान को अपने अधीन ले लिया है। जांच पूरी होने के बाद विभाग यह सामान व्यापारियों को सौंपेगा। इसके बाद व्यापारी अपना सामान लेकर धारचूला की ओर रवाना होंगे।

जौलजीबी मेले में दिखेगा तिब्बती सामान

14 नवंबर से ऐतिहासिक जौलजीबी मेले का आयोजन किया जाएगा। इस मेले में छह साल बाद तिब्बती सामान देखने को मिलेगा। भारतीय व्यापारी इस बार तिब्बती सांबर के जूते, गर्म जैकेट और चरु (कंबल) जैसे उत्पाद लेकर लौटे हैं। जौलजीबी मेले में इस सामान की बिक्री की जाएगी जिससे लोगों को लंबे समय बाद तिब्बती उत्पाद खरीदने का अवसर मिलेगा।

सभी भारतीय व्यापारी सकुशल स्वदेश लौट चुके हैं। गुंजी में कस्टम विभाग आयात होने वाले सामान की जांच कर रहा है। - आशीष जोशी, ट्रेड अधिकारी, एसडीएम, धारचूला

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