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सुविधा चाहिए तो 16 किमी दूर जिला अस्पताल जाओ
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
Updated Fri, 06 Jul 2018 10:30 PM IST
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बड़ालू का अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। सीमांत में स्थित अस्पतालों में बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत मशीनें तो लगा दी, लेकिन तकनीशियन नहीं भेजे। ऐसे में लाखों रुपये की मशीनें जंग खा रही हैं। अस्पताल में सुविधा नहीं होने से लोगों को 16 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है।
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शुक्रवार सुबह 9.45 बजे अमर उजाला की टीम मूनाकोट विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ालू पहुंची। अस्पताल में स्टाफ कम होने से रात्रि में ड्यूटी करने वाले डॉ.अर्पित पुनेठा दुर्घटना में घायल बर्गतोली निवासी तारा चंद की मरहम पट्टी कर रहे थे। अस्पताल में पांच मरीज आ चुके थे। चिकित्साधिकारी डॉ. स्मृति बृजवाल मरीजों को देख रही थीं।
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फार्मेसिस्ट आरडी कत्यूरा और आयुष विंग में कुछ दिन पहले आईं फार्मेसिस्ट नेहा जोशी महिला मरीज को दवा बांट रहीं थीं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सभी दवाएं मौजूद हैं। अस्पताल में लगभग दो दर्जन मरीज आते हैं। बरसात में यह संख्या बढ़ जाती है। अस्पताल में गर्भवती महिला की जांच और प्रसव किया जाता है।
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एक्सरे कक्ष के ताले में लगा जंग
अस्पताल में एक्सरे मशीन का टेक्नीशियन नहीं होने से बंद कमरे के ताले में जंग लग चुका है। अस्पताल में पैथोलॉजी का सामान तो है, लेकिन स्टाफ न होने से वह भी खराब हो चुका है। अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है। मरीजों के पास जांच के लिए दो विकल्प रहते हैं। या तो मरीज हर माह की पांच तारीख को लगने वाले कैंप का इंतजार करें या 16 किमी दूर जिला मुख्यालय जाकर इलाज कराएं।
बीएडीपी के तहत मिली एंबुलेंस
बड़ालू के अस्पताल में बीएडीपी के तहत एक एंबुलेंस मिली है। एंबुलेंस को पहुंचे तीन दिन हो गए हैं। अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस में न ही ड्राइवर है न कोई टेक्नीशियन है। प्रभारी चिकित्साधिकारी के अनुसार इस एंबुलेंस में ईसीजी और पैथोलोजी की सुविधा मिलेगी। यह वाहन पूरे विकासखंड में घूमेगा।