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Pithoragarh: मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से भारत-चीन व्यापार शुरू होने की उम्मीद, इस वजह से 2020 से बंद है यात्रा

Fri, 25 Oct 2024 02:23 PM IST
हीरा मेहरा भक्त दर्शन पांडेय, संवाद
भक्त दर्शन पांडेय, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 25 Oct 2024 02:23 PM IST
सार

रूस के कजान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से कैलाश मानसरोवर यात्रा और लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार फिर शुरू होने की उम्मीद जगी है।

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Hope raised for Kailash Mansarovar Yatra and start of India-China trade
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

विस्तार

 

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रूस के कजान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से कैलाश मानसरोवर यात्रा और लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार फिर शुरू होने की उम्मीद जगी है। चीन के साथ सीमा विवाद व कोरोना के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापार वर्ष 2020 से बंद है। हिंदुओं की आस्था का केंद्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तिब्बत में है। कैलाश पर्वत के दर्शन और पवित्र झील में स्नान करना अधिकतर लोगों का सपना रहता है। वर्ष 1962 से पहले भारत से श्रद्धालु बिना रोकटोक कैलाश यात्रा पर जाते थे।


भारत-चीन युद्ध के बाद यह यात्रा 19 साल तक बंद रही। दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के बाद वर्ष 1981 में यात्रा का संचालन शुरू हुआ। विदेश मंत्रालय की अनुमति के बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से इस यात्रा का संचालन किया जाता रहा है। मई से सितंबर तक होने वाली इस धार्मिक यात्रा में हर साल लगभग 18 दलों में 1000 श्रद्धालु शामिल जाते थे।

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यात्रा के साथ ही लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार भी शुरू हो जाता था। भारतीय व्यापारी यहां से घोड़े-खच्चरों पर सामान लेकर तकलाकोट मंडी जाते थे और वहां से ऊनी कपड़े सहित अन्य सामान भारत लाते थे। हर साल लगभग तीन से पांच करोड़ का कारोबार होता था।

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1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद व्यापार भी बंद हो गया था और 30 साल बाद 1992 में शुरू हुआ। अब वर्ष 2020 में चीन के साथ शुरू हुए सीमा विवाद और काेरोना महामारी के बाद से यात्रा और व्यापार बंद है। भारत के साथ ही चीन का नेपाल से भी व्यापार बंद था। इस वर्ष चीन ने नेपाली व्यापारियों को तकलाकोट मंडी में व्यापार की अनुमति दे दी है। करीब 20-25 व्यापारी चीन की तकलाकोट मंडी गए हैं। संवाद

वर्ष 2019 में 949 यात्रियों ने किए थे दर्शन

कैलाश मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन व्यापार पर समय-समय पर रुकावटें आती रही हैं। वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के 19 साल बाद वर्ष 1981 में यात्रा और 30 साल बाद 1992 में भारत-चीन व्यापार शुरू हुआ था। इसके बाद वर्ष 1998 में मालपा में भूस्खलन के कारण हुई कैलाश यात्रियों सहित 205 लोगों की मौत के बाद शेष दलों की यात्रा स्थगित की गई थी। वर्ष 2013 में उत्तराखंड में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण यात्रा और व्यापार नहीं हो पाया था। वर्ष 2019 में 949 यात्रियों ने कैलाश पर्वत के दर्शन किए थे। इसके अलावा 3.16 करोड़ का व्यापार हुआ था। इसमें 1.91 करोड़ के सामान का आयात और 1.25 करोड़ की वस्तुओं का निर्यात हुआ था। संवाद

 

तकलाकोट में फंसा है भारतीय व्यापारियों का एक करोड़ से अधिक का सामान
चीन की तकलाकोट मंडी में भारत के 40 से अधिक व्यापारियों का एक करोड़ से अधिक रुपये का सामान फंसा है। वर्ष 2019 में भारतीय व्यापारी अपना सामान तकलाकोट में छोड़ आए थे। 2020 में यात्रा बंद होने के कारण दोबारा तकलाकोट नहीं जा पाए। तिब्बत में गुड़, मिश्री, रेडीमेड कपड़े, तंबाकू, सौंदर्य प्रसाधन आदि की तिब्बत में अधिक मांग रहती है। व्यापारी तकलाकोट में फंसे सामान को लाने के लिए लगातार मांग उठा रहे हैं। संवाद

 

साल 2019 में 40 से अधिक व्यापारियों का करोड़ों का सामान तकलाकोट मंडी में छूट गया था। वहां के व्यापारियों के साथ लेनदेन भी करना शेष है। सामान वापस लाने और लेनदेन करने के लिए तकलाकोट जाने की अनुमति देने की मांग सरकार से लगातार की जा रही है। कोई सुनवाई नहीं हुई है। भारतीय प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात से सभी को शीघ्र कैलाश यात्रा और व्यापार शुरू होने की उम्मीद जगी है।


-जीवन सिंह रौंकली, अध्यक्ष, भारत-चीन व्यापार समिति, धारचूला।

कैलाश मानसरोवर यात्रा प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल है। कुमाऊं मंडल विकास निगम वर्ष 1981 से आज तक इस यात्रा का सफल संचालन किया है। यदि भविष्य में यात्रा शुरू होती है तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यात्रा पौराणिक मार्ग से ही संचालित की जानी चाहिए। 
- दिनेश गुरुरानी, साहसिक पर्यटन प्रबंधक केएमवीएन।

 

 

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