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मुख्यमंत्री ने किया अस्कोट का इतिहास पुस्तक का विमोचन
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अस्कोट का इतिहास पुस्तक का विमोचन करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। करीब 700 वर्षों तक कत्यूर वंशीय पाल राजाओं की राजधानी रहे ऐतिहासिक क्षेत्र अस्कोट के इतिहास पर पहली बार प्रकाशित अस्कोट का इतिहास पुस्तक का प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अस्कोट के वैभवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने में सफल होगी।
अस्कोट का इतिहास पुस्तक के लेखक राजकीय शिक्षक संघ पिथौरागढ़ के जिलाध्यक्ष गोविंद भंडारी ने बताया कि पुस्तक में उत्तराखंड, कुमाऊं और पिथौरागढ़ जिले के संक्षिप्त इतिहास की जानकारी दी गई है। इसके बाद अस्कोट के राजशाही काल को आधार मानकर अस्कोट के इतिहास को तीन खंडों में विभाजित किया गया है। प्रथम खंड में राजशाही काल (13 वीं शताब्दी) से पूर्व के, दूसरे खंड में राजशाही काल (13 वीं शताब्दी से 1967 ई) और तीसरे खंड में राजशाही काल के पश्चात के इतिहास की जानकारी दी गई है। वहां कबीना मंत्री बिशन सिंह चुफाल, सांसद अजय टम्टा, केएमवीएन अध्यक्ष केदार जोशी, पालिकाध्यक्ष कमला चुफाल, ब्लॉक प्रमुख बबीता चुफाल आदि थे।
पुस्तक में इनकी भी जानकारी
अस्कोट का इतिहास पुस्तक में राजशाही काल में शुरू हुए प्रसिद्ध जौलजीबी मेले, अस्कोट की रामलीला, हंसेश्वर मठ, मल्लिकार्जुन महादेव मंदिर, अस्कोट के किसान आंदोलन के साथ ही अस्कोट की तांबे की खानों, यहां की बोली-भाषा, कला-संस्कृति, तीज-त्योहारों, होली, सातूं-आंठू, घुघुतिया, भैटोली, खतड़वा सहित अस्कोट महोत्सव आदि की भी जानकारी दी गई है।
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अस्कोट का इतिहास पुस्तक के लेखक राजकीय शिक्षक संघ पिथौरागढ़ के जिलाध्यक्ष गोविंद भंडारी ने बताया कि पुस्तक में उत्तराखंड, कुमाऊं और पिथौरागढ़ जिले के संक्षिप्त इतिहास की जानकारी दी गई है। इसके बाद अस्कोट के राजशाही काल को आधार मानकर अस्कोट के इतिहास को तीन खंडों में विभाजित किया गया है। प्रथम खंड में राजशाही काल (13 वीं शताब्दी) से पूर्व के, दूसरे खंड में राजशाही काल (13 वीं शताब्दी से 1967 ई) और तीसरे खंड में राजशाही काल के पश्चात के इतिहास की जानकारी दी गई है। वहां कबीना मंत्री बिशन सिंह चुफाल, सांसद अजय टम्टा, केएमवीएन अध्यक्ष केदार जोशी, पालिकाध्यक्ष कमला चुफाल, ब्लॉक प्रमुख बबीता चुफाल आदि थे।
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पुस्तक में इनकी भी जानकारी
अस्कोट का इतिहास पुस्तक में राजशाही काल में शुरू हुए प्रसिद्ध जौलजीबी मेले, अस्कोट की रामलीला, हंसेश्वर मठ, मल्लिकार्जुन महादेव मंदिर, अस्कोट के किसान आंदोलन के साथ ही अस्कोट की तांबे की खानों, यहां की बोली-भाषा, कला-संस्कृति, तीज-त्योहारों, होली, सातूं-आंठू, घुघुतिया, भैटोली, खतड़वा सहित अस्कोट महोत्सव आदि की भी जानकारी दी गई है।
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