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कैलास यात्रा के पहले दल में शामिल थे हरीश रावत

Wed, 11 May 2016 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Wed, 11 May 2016 10:38 PM IST
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Harish Rawat was involved in the first team to visit Kailash
कैलास यात्रा - फोटो : अमर उजाला

कैलास मानसरोवर की यात्रा जब 1981 में दोबारा शुरू हुई थी, उसके पहले बैच में मुख्यमंत्री हरीश रावत और सुब्रमण्यम स्वामी भी शामिल थे। 1981 में मात्र तीन बैच कैलास यात्रा पर गए और सिर्फ 59 यात्रियों को कैलास मानसरोवर के दर्शनों का लाभ मिला। कैलास मानसरोवर यात्रा के रिकार्ड को देखने से पता चलता है कि 1981 से 1991 तक यात्रा पर सात बैच से ज्यादा नहीं गए। 1992 में यात्री दलों की संख्या बढ़ने लगी। यह संख्या 10 से बढ़ती गई और पिछले तीन सालों से अब यात्रा में 18 दल जाने लगे हैं।

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भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने के कारण 1960 में कैलास मानसरोवर यात्रा बंद कर दी गई थी। उससे पहले यात्रियों के आवागमन में किसी प्रकार की अड़चन नहीं थी। उसके बाद यात्रियों के लिए कुछ मानक तय कर दिए गए। यात्रियों के पंजीकरण का काम विदेश मंत्रालय करने लगा और यात्रा मार्ग पर सुविधाओं का विस्तार कुमाऊं मंडल विकास निगम के हाथ में आ गया। पहले यात्री पड़ाव नहीं थे। यात्री जगह-जगह बने अस्थायी भवनों में रुका करते थे। पहले यात्रा का मार्ग तवाघाट से ठाणीधार के लिए था। इस कठिन चढ़ाई को पार करने के बाद यात्री लखनपुर में 4444 सीढ़ियों को भी लांघते थे।
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गाला से आगे जंगल चट्टी की चढ़ाई भी यात्रियों को खूब परेशान करती थी। अब यात्री तवाघाट से नारायणआश्रम तक वाहनों से जाते हैं। इस कारण उनको ठाणीधार की चढ़ाई पार करने की जरूरत नहीं पड़ती। लखनपुर से आगे की सीढ़ियों को पार करने के बजाए यात्री मांगती से होकर जाते हैं। केएमवीएन के साहसिक पर्यटन प्रबंधक दिनेश गुरुरानी का कहना है कि अब यात्रा मार्ग पर सुविधाओं का विस्तार हो गया है। यात्रियों को अब सुविधा संपन्न पड़ावों में ठहराया जाता है। उनके लिए भोजन की बेहतर व्यवस्था रहती है।
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कर्मचारियों ने गाला में बनाया शिव मंदिर
कैलास मानसरोवर पैदल यात्रा मार्ग पर धारचूला से लेकर लिपुलेख तक पहले कोई मंदिर नहीं था। यात्रा मार्ग पर ड्यूटी देने वाले कुमाऊं मंडल विकास निगम के कर्मचारियों ने गाला में 1998 में शिवजी का मंदिर तैयार किया, जबकि कालापानी में स्थित काली के मंदिर को आईटीबीपी ने सुंदर तरीके से सजा दिया। अब यात्रियों को गाला और कालापानी में मंदिर मिल जाते हैं।

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