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Pithoragarh News: जहां कभी बोरा समाज के लोगों ने जलाए थे जनेऊ वहीं बना है गणाई का राम मंदिर
Thu, 11 Jan 2024 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 11 Jan 2024 10:54 PM IST
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गणाईगंगोली के राम मंदिर में स्थापित भगवान राम-सीता, लक्ष्मण की मूर्ति। स्रोत: पुजारी
पिथौरागढ़। बेड़ीनाग के राईआगर से करीब आठ किमी की दूर गणाई गंगोली क्षेत्र के एकमात्र राम मंदिर में लोगों की अगाध श्रद्धा है। यह मंदिर आजादी के आंदोलन के दौर में स्थापित हुआ था। यह मंदिर वहां बना है जहां कभी सामाजिक भेदभाव से आहत बोरा समाज के लोगों ने अपने जनेऊ जला दिए थे।
इस क्षेत्र में बोरा जाति के लोगों की संख्या अधिक है। चाख समेत कई बड़े गांव बोरा लोगों के हैं। चाख निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग बहादुर सिंह बोरा ने बताया कि सामाजिक भेदभाव से आहत होकर बोरा जाति (कुथलिया बोरा) के लोगों ने वर्ष 1939-40 में सामूहिक रूप से अपने जनेऊ अग्नि को समर्पित कर दिए थे। इसकी खबर मिलने पर तत्कालीन नेता पंडित गोविंद बल्लभ पंत, राम मनोहर लोहिया समेत कई बड़े नेता इस क्षेत्र में पहुंचे। उन्होंने सभी लोगों को एकत्र कर झलतोला स्टेट में सभा बुलाई और उसमें जातिगत भेदभाव मिटाने का प्रस्ताव पास किया। बाद में सेराघाट स्थित सरयू नदी में बड़ा यज्ञ कराया। पंडित पंत ने सभी लोगों को जनेऊ धारण करने को दिया। तब से बोरा जाति के लोग फिर से जनेऊ धारण कर समाज की मुख्य धारा में आ गए। जहां पर बोरा जाति के लोगों ने अपने जनेऊ जलाए थे वहीं पर राम मंदिर बना है। यहां राम-सीता, लक्ष्मण, हनुमान की मूर्तियां स्थापित की गईं। बाद के वर्षों में कैंची धाम से नीब करौरी महाराज के शिष्य ऋषिकेश गिरि ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा भी मंदिर में लगाईं। वर्तमान में मंदिर भव्य बन गया है। मंदिर के पुजारी बोरा जाति के लोग ही हैं। संवाद
मंदिर में होते हैं सामूहिक जनेऊ संस्कार
पिथौरागढ़। राम मंदिर के पुजारी कुंदन सिंह बोरा ने बताया कि क्षेत्र के लोग मंदिर में पूजा-अर्चना को आते हैं। वर्ष 1940 के बाद से ही मंदिर में सामूहिक जनेऊ संस्कार होते हैं। इसमें समाज के सभी लोग बढ़ चढ़कर भागीदारी करते हैं।
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22 जनवरी को मंदिर में सुंदर कांड का पाठ और हवन होगा
पिथौरागढ़। 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इस दिन गणाई के राम मंदिर में सुंदर कांड और हवन किया जाएगा। पुजारी कुंदन सिंह ने बताया कि मंदिर में हवन यज्ञ की तैयारी की जा रही है। हवन के बाद विशाल भंडारा लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर में पूजा नियमित रूप से सुबह-शाम की जाती है। संवाद
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इस क्षेत्र में बोरा जाति के लोगों की संख्या अधिक है। चाख समेत कई बड़े गांव बोरा लोगों के हैं। चाख निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग बहादुर सिंह बोरा ने बताया कि सामाजिक भेदभाव से आहत होकर बोरा जाति (कुथलिया बोरा) के लोगों ने वर्ष 1939-40 में सामूहिक रूप से अपने जनेऊ अग्नि को समर्पित कर दिए थे। इसकी खबर मिलने पर तत्कालीन नेता पंडित गोविंद बल्लभ पंत, राम मनोहर लोहिया समेत कई बड़े नेता इस क्षेत्र में पहुंचे। उन्होंने सभी लोगों को एकत्र कर झलतोला स्टेट में सभा बुलाई और उसमें जातिगत भेदभाव मिटाने का प्रस्ताव पास किया। बाद में सेराघाट स्थित सरयू नदी में बड़ा यज्ञ कराया। पंडित पंत ने सभी लोगों को जनेऊ धारण करने को दिया। तब से बोरा जाति के लोग फिर से जनेऊ धारण कर समाज की मुख्य धारा में आ गए। जहां पर बोरा जाति के लोगों ने अपने जनेऊ जलाए थे वहीं पर राम मंदिर बना है। यहां राम-सीता, लक्ष्मण, हनुमान की मूर्तियां स्थापित की गईं। बाद के वर्षों में कैंची धाम से नीब करौरी महाराज के शिष्य ऋषिकेश गिरि ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा भी मंदिर में लगाईं। वर्तमान में मंदिर भव्य बन गया है। मंदिर के पुजारी बोरा जाति के लोग ही हैं। संवाद
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मंदिर में होते हैं सामूहिक जनेऊ संस्कार
पिथौरागढ़। राम मंदिर के पुजारी कुंदन सिंह बोरा ने बताया कि क्षेत्र के लोग मंदिर में पूजा-अर्चना को आते हैं। वर्ष 1940 के बाद से ही मंदिर में सामूहिक जनेऊ संस्कार होते हैं। इसमें समाज के सभी लोग बढ़ चढ़कर भागीदारी करते हैं।
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22 जनवरी को मंदिर में सुंदर कांड का पाठ और हवन होगा
पिथौरागढ़। 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इस दिन गणाई के राम मंदिर में सुंदर कांड और हवन किया जाएगा। पुजारी कुंदन सिंह ने बताया कि मंदिर में हवन यज्ञ की तैयारी की जा रही है। हवन के बाद विशाल भंडारा लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर में पूजा नियमित रूप से सुबह-शाम की जाती है। संवाद