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शिकारियों और आग से निपटने को चार टीमों का गठन
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी
Updated Sat, 20 Jan 2018 10:10 PM IST
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मुनस्यारी से उच्च हिमालयी क्षेत्र को रवाना होते वनकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
जंगलों में लगी आग और उसमें शिकारियों का हाथ होने की आशंका के बाद अब वन विभाग ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आग पर नियंत्रण और शिकारियों को पकड़ने के लिए चार टीमों का गठन किया है। अब तक टीम ने करीब दो दर्जन स्थानों पर शिकारियों के संभावित ठिकाने पर छापामारी की। टीम में अन्य क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। वन विभाग ने शिकारियों की इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाई है।
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उपप्रभागीय वनाधिकारी मुरली मनोहर भट्ट खुद मुनस्यारी में रुके हैं। उन्होंने बताया कि चार टीमों को बनाकर उनको दो तरह का टास्क सौंपा गया है। एक टीम शिकारियों के खिलाफ अभियान चलाएगी, जबकि दूसरी टीम जंगलों में लगी आग पर काबू पाएगी। शुक्रवार को भट्ट के नेतृत्व में टीम ने तोमिक से लेकर नामिक तक के जंगलों में छापामार अभियान चलाया, लेकिन टीम को शिकारियों की कोई गतिविधि पता नहीं चली।
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भट्ट ने बताया कि पूरे क्षेत्र को चार जोन में बांटा गया है और मुनस्यारी में आधार शिविर बनाया गया है। मुनस्यारी से ही सारे अभियान का संचालन किया जा रहा है। आधार शिविर में उपप्रभागीय वनाधिकारी नियंत्रण कक्ष से निर्देश जारी कर रहे हैं। चार टीमों में से पहली टीम निरतोली, झापुली, तोमिक, वल्थी में तैनात है। इस टीम का नेतृत्व वनकर्मी देवेंद्र राय कर रहे हैं। दूसरी टीम महेश सिंह मर्तोलिया के नेतृत्व में समकोट, कोटा, ढुनामानी, आलम, बंगापानी क्षेत्र में तैनात है। तीसरी टीम त्रिलोक सिंह राणा के नेतृत्व में उच्च हिमालयी क्षेत्र के लीलम, बुई, पातो, ढीलम, रिंगु, चुलकोट में तैनात है। चौथी टीम लक्ष्मण राम के नेतृत्व में मदकोट, वल्थी, गैला, तोमिक, बोना, गोल्फा, टांगा, सेराघाट में तैनात है।
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उपप्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इस बार कड़ाके की ठंड में हिमालयी क्षेत्र के जंगलों में आग लगने की घटना सामने आने और आग लगाने में शिकारियों का हाथ होने की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने यह रणनीति बनाई है। डीएफओ विनय भार्गव के निर्देश पर सभी टीमें अपने-अपने क्षेत्र में काम कर रही हैं और रोज की रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी जा रही है। टीम में वनकर्मियों के साथ राजस्व पुलिस के कर्मचारी भी शामिल हैं।