पहले दल ने झील से 200 किलो कचरा निकाला
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कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर लौटे पहले दल के यात्रियों ने मानसरोवर झील में सफाई अभियान चलाया। यात्रियों ने तिब्बत की भूमि पर स्वच्छ भारत अभियान की छाप छोड़ दी। यहां पहुंचे यात्रियों ने बताया कि तिब्बत में प्रवेश करते ही वहां के अधिकारियों का रूखा व्यवहार सामने आ जाता है। इस बार यात्रा पूरी कर लौट रहे यात्रियों को तिब्बती अधिकारियों ने विदाई भी नहीं दी। यात्रियों ने बताया कि तिब्बती क्षेत्र में पहुंचते ही सड़क और संचार की बेहतरीन सुविधाएं मिल जाती हैं। ऐसा लगता है कि चीन ने अपने अधिकृत तिब्बत के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया है।
शुक्रवार दोपहर बाद आधार शिविर पहुंचे पहले दल के जनसंपर्क अधिकारी चंद्रमौली टी शर्मा ने कहा कि 18 दिन की अब तक की यात्रा में सभी 54 यात्री एक परिवार की तरह रहे। उन्होंने जानकारी दी कि यात्रियों ने मानसरोवर झील में सफाई अभियान चलाया और झील से 200 किलो पॉलिथीन का कचरा बाहर निकाला।
वर्ष 2010 में छोटा कैलाश और 2011 में कैलास मानसरोवर की यात्रा कर चुकी हरियाणा की मंजुला ने बताया कि भारत की अपेक्षा चीन ने बहुत तेजी से विकास किया है। तकलाकोट के हर कोने में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई है। दल में शामिल यात्री वीरेंद्र मिश्रा ने कहा कि तिब्बत में यात्रा ड्यूटी में लगे कर्मचारियों का व्यवहार काफी रूखा था तथा महज औपचारिकता के तौर पर सभी लोग कार्य कर रहे थे। यात्री डा. राजेश गुप्ता ने बताया कि इस बार तिब्बती प्रशासन ने यात्रियों की विदाई वाला कार्यक्रम नहीं किया। इसे लेकर वह खासे आशंकित हैं। इंदौर के रूपेश पटेल और पंचकूला के सुभाष दीवान कुमाऊं मंडल विकास निगम की व्यवस्थाओं से काफी प्रभावित रहे।
उन्होंने कहा कि नाभीढांग, कालापानी जैसे दुर्गम इलाकों में रात दिन सेवा कर रहे कर्मचारियों के चेहरे में कभी थकान या शिकन तक देखने को नहीं मिली। एक साथ यात्रा कर रहे दंपति दीपक पटेल एवं सरोज पटेल अपने को सौभाग्यशाली मानते हैं कि सफलतापूर्वक यात्रा करने का मौका मिला। अमेरिका में बस चुके मूल रूप से आंध्रप्रदेश के निवासी सरोज ने कहा कि तिब्बत की अपेक्षा भारत के कर्मचारियों, मजदूरों, घोड़ेवालों, स्थानीय लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है। यात्री दल के सदस्य आशा राज कुरूंद, इंदौर के हंसराज पटेल आदि सभी यात्रा संपन्न होने से खुश हैं।