{"_id":"5ded2c1e8ebc3e1bf81847d2","slug":"fire-set-in-the-blunders-for-hunting","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिकार के लिए जंगलों में लगाई आग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिकार के लिए जंगलों में लगाई आग
Sun, 08 Dec 2019 10:30 PM IST
kamlesh kamlesh
अमर उजाला, ब्यूराे /मुनस्यारी (पिथौरागढ़)।
अमर उजाला, ब्यूराे /मुनस्यारी (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Sun, 08 Dec 2019 10:30 PM IST
विज्ञापन
पंचाचूली की तलहटी में लगाई गई आग से उठता धुआं।
- फोटो : अमर उजाला
पंचाचूली पर्वत माला की तलहटी पर लगी आग से राज्य पक्षी मोनाल, राज्य पशु कस्तूरा के साथ तमाम दुर्लभ वन्यजीव खतरें में आ गए हैं। यह आग भी हर साल की तरह अराजक तत्वों ने लगाई हैं, जिनका मकसद गोल घेरे में आग लगाकर वन्यजीवों को मारना है। आम लोगों तक को जंगल में आग लगने की वजह पता है, लेकिन वन विभाग का अंजान बना रहना, हर किसी को अचरज में डालता है।
पंचाचूली की तलहटी में शनिवार रात से आग लगी है। आग से पूरे इलाके में धुआं फैल गया है। पंचाचूली पर्वत शृंखला से धुएं का गुबार उठ रहा है। उच्च हिमालयी इलाकों में बर्फबारी के चलते ठंड बढ़ने पर जंगली जानवर निचले इलाकों में आ जाते हैं। जंगली जानवर चट्टानों में छुपे रहते हैं। पहले से घात लगाए बैठे अराजक तत्व आग लगाकर उन्हें चट्टानों से भगाते हैं और मार डालते हैं।
पंचचूली की तलहटी में सबसे ज्यादा कस्तूरा मृग पाया जाता है। सरकार ने कस्तूरा मृग को राज्य पशु का दर्जा दे दिया है, लेकिन संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए। हिमालयी क्षेत्र में राज्य पक्षी मौनाल, गुरड़, काकड़, सफेद भालू आदि जानवर पाए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकारी सक्रिय हैं। आग लगाकर वन्यजीवों को मारने का इंतजाम किया जा रहा है लेकिन वन विभाग का कहीं अता-पता नहीं है।
विज्ञापन
अभी तक शिकार किए जाने का मामला प्रकाश में नहीं आया है, फिर भी पंचाचूली पर्वत माला की तलहटी पर आग लगने के कारणों की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। शिकार का मामला सामने आता है तो कार्रवाई की जाएगी।
- पूरन सिंह देउपा, वन क्षेत्राधिकारी मुनस्यारी
विज्ञापन
पंचाचूली की तलहटी में शनिवार रात से आग लगी है। आग से पूरे इलाके में धुआं फैल गया है। पंचाचूली पर्वत शृंखला से धुएं का गुबार उठ रहा है। उच्च हिमालयी इलाकों में बर्फबारी के चलते ठंड बढ़ने पर जंगली जानवर निचले इलाकों में आ जाते हैं। जंगली जानवर चट्टानों में छुपे रहते हैं। पहले से घात लगाए बैठे अराजक तत्व आग लगाकर उन्हें चट्टानों से भगाते हैं और मार डालते हैं।
विज्ञापन
पंचचूली की तलहटी में सबसे ज्यादा कस्तूरा मृग पाया जाता है। सरकार ने कस्तूरा मृग को राज्य पशु का दर्जा दे दिया है, लेकिन संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए। हिमालयी क्षेत्र में राज्य पक्षी मौनाल, गुरड़, काकड़, सफेद भालू आदि जानवर पाए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकारी सक्रिय हैं। आग लगाकर वन्यजीवों को मारने का इंतजाम किया जा रहा है लेकिन वन विभाग का कहीं अता-पता नहीं है।
विज्ञापन
अभी तक शिकार किए जाने का मामला प्रकाश में नहीं आया है, फिर भी पंचाचूली पर्वत माला की तलहटी पर आग लगने के कारणों की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। शिकार का मामला सामने आता है तो कार्रवाई की जाएगी।
- पूरन सिंह देउपा, वन क्षेत्राधिकारी मुनस्यारी