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Pithoragarh News: पिता को आजीवन कारावास, बेटी का कोई सहारा नहीं तो पढ़ना भी हुआ मुश्किल

Fri, 28 Nov 2025 11:00 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 28 Nov 2025 11:00 PM IST
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Father sentenced to life imprisonment, daughter has no support, so studying also becomes difficult
पिथौरागढ़। एक बेटी ने जेल में कैद मां के हत्या के दोषी पिता को पेरोल पर रिहा करने की गुहार लगाई है। बेटी ने कहा कि मां बचपन में छोड़कर चले गई। पिता जेल में कैद है। बुआ के बाद दादी की मौत के बाद भी अब वह बिल्कुल अकेली है। स्नातक की पढ़ाई की खर्चा उठाने में वह असमर्थ है। पिता के खाते से पैसा है लेकिन उसके काम नहीं आ रहा है। धन तभी निकल सकता है जब वह पेरोल पर बाहर आकर उसके खाते में ट्रांसफर करेंगे। बेटी ने डीएम को ज्ञापन देकर पिता के पेरोल पर रिहाई के लिए गुहार लगाई है।
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जाजरदेवल की 18 वर्षीय दीपिका शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंची और डीएम को अपनी कहानी बताई। कहा कि मां की हत्या करने पर पिता पिछले 14 साल से जेल में कैद हैं। चार साल की उम्र में मां छोड़कर चले गई। पिता जेल में बंद होने से बुआ ने उनकी देखभाल की। बुआ की मौत के बाद दादी उसका सहारा बनी। 2017 को दादी की मौत के बाद उनकी बड़ी बहन के पुत्र ने उसकी देखरेख का जिम्मा संभाला। अब वह भी 77 साल के बुजुर्ग हो गए हैं और कमाकर उन्हें खिलान, उसकी पड़ाई का खर्च उठाना उनके लिए नामुृमकिन हो रहा है। बताया कि पिता के खाते में पैसा है जिसे वह नहीं निकाल सकती। ऐसे में उसके लिए पढ़ाई करना, खाने का खर्च वहन करना मुश्किल हो गया है। बताया कि यदि पिता को एक महीने की पेरोल मिलती तो वह अपने खाते से धन निकालते। उसके खाते में भी पैसा ट्रांसफर होता। उन्होंने डीएम से उसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए पिता को पेरोल पर एक महीने के लिए रिहा करने की मांग की है।
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पिता ने भुगत दी है 14 साल दो महीने की सजा
पिथौरागढ़। दीपिका ने बताया कि उसके पिता को पूर्व में एक बार पेरोल मिली थी। पेरोल पूरी होने के बाद तय समय पर उन्होंने देहरादून कारागार में उपस्थिति दर्ज कराई। बताया कि पिता ने अब तक 14 महीने दो महीने का कारावार भुगत लिया है। उनके आचरण को देखते हुए उन्हें पेरोल पर रिहा किया जा सकता है। कहा कि यदि ऐसा हुआ तो उसकी परेशानी हल हो सकती है। कहा कि पिता की रिहाई ही उसकी अंतिम उम्मीद है।
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