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 खेतों तक खुद ही पानी पहुंचाने के प्रयास में लगे किसान

Thu, 26 Oct 2017 10:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पिथौरागढ़।
ब्यूरो, अमर उजाला पिथौरागढ़। Updated Thu, 26 Oct 2017 10:45 PM IST
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Farmers engaged in efforts to bring water to the fields themselves
खुमती गांव के लिए नहर की मरम्मत करते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
 धारचूला तहसील के दूरस्थ खुमती गांव के लोगों ने विभाग के सामने गुहार लगाने के बजाय खुद ही सिंचाई नहर की मरम्मत का बीड़ा उठा लिया है। यह नहर तीन साल से क्षतिग्रस्त है, जिससे खुमती गांव के 2000 नाली खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। यह बात अलग है कि गांव के लोगों को इस काम में कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। नालों के ऊपर टूटी नहर से पानी चलाने के लिए पाइप डाले गए हैं और मलबे से पटी नहर की सफाई शुरू कर दी गई है। करीब एक किलोमीटर लंबी नहर के बंद होने से तीन वर्ष के भीतर फसल का उत्पादन पचास फीसदी तक गिर गया है। इस बार 24 सितंबर से बारिश बंद हो जाने से सूखे का असर हो गया है। जमीन में नमी के अभाव में लोग अब तक गेहूं और मसूर की बुआई नहीं कर पाए हैं। 
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खुमती के लोगों ने बताया कि तीन साल पहले आपदा के समय नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। गांव के लोगों को उम्मीद थी कि शायद सिंचाई विभाग जल्दी नहर की मरम्मत कर खेतों तक पानी पहुंचा देगा, लेकिन विभाग ने अब तक गांव के लोगों को टाल रखा है। ग्राम प्रधान विमला देवी ने बताया कि वह क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत की मांग कई बार सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, उपजिलाधिकारी और क्षेत्र पंचायत में उठा चुकी हैं।  विभाग की अनदेखी के कारण किसान मायूस हैं। उन्होंने कहा कि गांव के लोग अब सिंचित खेतों के टैक्स का भुगतान नहीं करेंगे। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता पीके दीक्षित के अनुसार खुमती गांव की सिंचाई नहर की मरम्मत का प्रस्ताव प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल किया गया था लेकिन इस मद में धनराशि नहीं मिल पाई है। धनराशि मिलते ही नहर की मरम्मत शुरू कर दी जाएगी।
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सब्जी का उत्पादन भी कम हुआ 
पिथौरागढ़। खुमती गांव में पानी की कमी से सब्जी का उत्पादन भी गिरने लगा है। गांव के कुछ परिवार सब्जी उत्पादन कर आजीविका चलाया करते थे। इस सीजन में पैदा होने वाला पालक, राई, धनिया, मेथी के पौध पानी के अभाव में नहीं उग पाए हैं। ग्राम प्रधान विमला देवी ने बताया कि नहर बंद होने से लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। गरीब परिवार गंभीर संकट में आ गए हैं।  
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