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Pithoragarh News: टनल निर्माण में अत्यधिक ब्लास्टिंग से भी होता है भूस्खलन

Mon, 20 Nov 2023 10:34 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Mon, 20 Nov 2023 10:34 PM IST
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Excessive blasting in tunnel construction also causes landslides.
त्रिभुवन सिंह पांगती, सेवानिवृत्त एडीजी।
पिथौरागढ़। उत्तरकाशी के सिलक्यारा में सुरंग निर्माण के दौरान हुए भूस्खलन को लेकर हिमालयी क्षेत्रों में इंजीनियरिंग भूविज्ञानी के रूप में 37 वर्षों तक कार्य करने वाले सेवानिवृत्त एडीजी ने भूस्खलन को लेकर कई खुलासे किए हैं। उनका कहना है कि टनल निर्माण में अत्यधिक ब्लास्टिंग का प्रयोग करना भी भूस्खलन का एक कारण है। सुरंग निर्माण में विशेषज्ञों की राय को भी नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि हिमालयी भू-भाग में किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले भूस्खलन की समस्या को गंभीरता से देखना जरूरी है। टनल के अंदर हुए भूस्खलन के लिए उनकी नजर में कई कारण हैं।
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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से बतौर एडीजी सेवानिवृत्त हुए त्रिभुवन सिंह पांगती ने बताया कि भूगर्भीयता के अत्यधिक विवर्तनिक क्षेत्र में किसी भी सतत विकास में भू-विज्ञान एक प्रमुख और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हिमालयी भू-भाग में किसी भी परियोजना को शुरू कराने से पहले हिमालय में लगातार भूस्खलन और विस्तृत भू-भाग की जानकारी को गंभीरता से देखा जाना जरूरी है।
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दुर्भाग्यपूर्ण है कि निजी कंपनी कई अन्य क्षेत्रों में सूक्ष्म बिजली परियोजनाओं और संचार परियोजनाओं के निर्माण में शामिल हो रहीं हैं जिन्हें भूविज्ञान और इलाके के भू-भाग की स्थिति से संबंधित जानकारी नहीं होती है। इस कारण इस तरह के हादसे हो रहे हैं और परियोजनाएं उत्तराखंड में फेल हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि हिमालयी भू-भाग में यातायात सुरंगों का प्रावधान सबसे अच्छा विकल्प है। इन क्षेत्रों की भू-संरचना अलग-अलब स्थानों पर भिन्न-भिन्न है।
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सुरंग बनाने के लिए विस्तृत भूगर्भीय और भू-तकनीकी अध्ययन के अनुसार सुरक्षित डिजाइन रोकमास के आधार पर तैयार किए जाने चाहिए। रोकमास मेन सुरंग कार्य शुरू करने से पहले, एक पायलट सुरंग बनाई जानी चाहिए और उस टनल की रोकमास स्थिति को देखकर सपोर्ट सिस्टम तैयार किए जाने चाहिए। साथ ही कंट्रोल ब्लास्टिंग किए जाने चाहिए लेकिन उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल में इन सभी बातों को नजरअंदाज किया गया है। संवाद

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गंभीर भूस्खलन की समस्या से जूझ रहे राज्य के राजमार्ग
पिथौरागढ़। सेवानिवृत्त एडीजी त्रिभुवन सिंह पांगती कहते हैं कि उत्तराखंड में सभी राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति खराब है। जो राजमार्ग निर्माणाधीन या पूर्ण होने के चरण में हैं उनमें सभी मौसमों में लगातार गंभीर भूस्खलन की समस्या है। इसका मुख्य कारण यह है कि कटी हुई ढलानों को स्थल की भूगर्भीय परिस्थितियों के अनुसार संरक्षित नहीं किया जा रहा है। साथ ही उचित निवारक उपायों का पालन नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि कई पुल भी भूगर्भीय स्थितियों के बारे में कम जानकारी के कारण ध्वस्त हो रहें हैं। सरकार को जिन विशेषज्ञ को भू-तकनीकी और जियोलॉजी का अनुभव है उनकी राय लेनी चाहिए ताकि ऐसे हादसे ना हों। संवाद




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सरकार को दी राय

पिथौरागढ़। ऐसे निर्माण कार्यों से पहले भूगर्भीय जियो हैजर्ड और ग्लेशियो लॉजिक भू-भाग का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए। यह अध्ययन किसी भी तकनीकी विशेषज्ञता रखने वाली सरकारी विशेषज्ञ या अन्य तकनीकी एजेंसी जिन्हें हिमालयन क्षेत्रों में कार्य करने का विशेषज्ञता प्राप्त हो उनसे कराना चाहिए। किसी भी हिमालयन क्षेत्र की सतत विकास के लिए किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना। होरिजेंटल खुदाई अगर बाएं या दाहिने वाॅल की ओर से की जाती तो शायद सुरंग में फंसे लोगों को निकालने में सफलता हासिल हो सकती थी। वर्टिकल खुदाई कम से कम गहराई वाले क्षेत्रों में की जानी चाहिए ताकि समय बच सके और लोगों को बचाया जा सके। संवाद

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