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पर्यावरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 21 Feb 2017 09:59 PM IST
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कैलाश भूक्षेत्र परियोजना के तहत ग्रामीणों को पौधे प्रदान करते विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
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पवित्र कैलाश भू-क्षेत्र संरक्षण विकास पहल योजना के तहत भारत, चीन, नेपाल के प्रतिनिधियों ने चयनित परियोजना क्षेत्र में परियोजना के कार्यों का निरीक्षण किया। प्रथम चरण में हाटकालिका और द्वितीय चरण में बांस मैतोली जलागम क्षेत्र में बैठक कर ग्रामीणों के साथ डेयरी, बेमौसमी सब्जी, चाराघास, वनीकरण, जल संरक्षण समेत कई कार्यों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधिमंडल ने वन विभाग के सहयोग से ग्रामीणों को नाशपाती के पौधे भेंट किए।
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वैज्ञानिक डा. रणवीर सिंह रावल ने पवित्र कैलाश परियोजना के अंतर्गत किए गए कार्यों की जानकारी दी। चीन की डा. शी पेली ने चीन में भूकटाव, जलागम और पर्यावरण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को ग्रामवासियों के साथ साझा किया। नेपाल के विशेषज्ञ सागर रिमल ने कहा कि नेपाल और भारत की जैव विविधता एक समान है। इसे संरक्षित किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए मिलकर कार्य करने पर जोर दिया।
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भूटान से आए दोरजी शेरपा ने ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुधार के साथ ही पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकने के तरीके बताए। डा. राजेश जोशी, चिया संस्था के पंकज तिवारी, अंजलि बडोला, हिमालयन ग्राम विकास समिति के राजेंद्र बिष्ट, थियेटर फॉर एजुकेशन इन मास सोसायटी के योगेश पाठक ने विचार रखे।
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