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थल अस्पताल में एक महीने से डॉक्टर नहीं

Thu, 28 Dec 2017 11:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
ब्यूरो/अमर उजाला, थल Updated Thu, 28 Dec 2017 11:02 PM IST
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Doctor not in the hospital for a month at the local hospital
बिना डाक्टर का थल का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - फोटो : अमर उजाला

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र थल में एक महीने से कोई डॉक्टर नहीं है। संविदा पर तैनात एकमात्र डॉक्टर 27 नवंबर को अवकाश पर चले गए थे, वह अब तक नहीं लौटे हैं। 600 गांवों के मध्य में स्थित इस अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है। अस्पताल का सारा काम एकमात्र फार्मेसिस्ट के ऊपर आ गया है। ज्यादा कार्यबोझ होने से फार्मेसिस्ट तनाव में है।

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बताया गया कि चार माह पहले यहां तैनात डॉक्टर पीके लस्पाल का स्थानांतरण हो गया था, उनकी जगह संविदा डॉक्टर योगेश कुमार की तैनाती की गई। वह भी एक माह पहले अवकाश लेकर चले गए हैं। अस्पताल में रोजाना 50 से 70 तक मरीज पहुंचते हैं। उनको देखने का काम फार्मेसिस्ट को करना पड़ रहा है। फार्मेसिस्ट पीएन जोशी ने बताया कि कभी-कभी रात में दो बजे भी अस्पताल खोलना पड़ता है। फार्मेसिस्ट को दवाएं लिखने और इंजेक्शन लगाने का अधिकार नहीं होता। इसके लिए डॉक्टर का होना बेहद जरूरी है।
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अस्पताल में पैथालॉजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड जैसी कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में आने वाले गंभीर रोगियों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। बताया गया कि राज्य गठन से पहले इस अस्पताल में तीन डॉक्टर तैनात थे, लेकिन राज्य बनते ही इसकी दशा खराब हो गई। थल में अस्पताल के नाम पर शानदार भवन जरूर बना है, लेकिन सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है। 
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अस्पताल को सीएचसी का दर्जा दो
थल निवासी राम सिंह जंगपांगी का कहना है कि थल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया जाए और सीएचसी के मानकों के अनुसार स्टाफ की तैनाती की जाए। वह कहते हैं कि सीएचसी बनने तक अस्पताल की समस्या हल नहीं हो सकती। थल के लोग इस मामले में अब सरकार पर दबाव बनाएंगे और स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए संघर्ष करेंगे। 


बिना सुविधा के अस्पताल क्यों खोला
स्थानीय निवासी कमल कन्याल का कहना है कि बिना सुविधा वाले यह अस्पताल सिर्फ लोगों को धोखा देने के लिए खुले हैं। जब सरकार इनमें स्टाफ, दवाएं, उपकरण नहीं दे पाती तो इनको खोलने का कोई औचित्य नहीं है। वह कहते हैं कि अस्पताल सिर्फ सरकारी कागजों में चल रहा है। लोग लगातार परेशानी का सामना कर रहे हैं। अब अस्पताल की अव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन होगा।

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