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अमर उजाला शिक्षा अभियान : डिजिटल दौर के बाद तकनीकी स्तर पर बच्चों पर दिया अधिक ध्यान
Fri, 25 Mar 2022 11:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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Published by: हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Mar 2022 11:51 PM IST
सार
प्रधानाचार्य पांडेय बताते हैं कि कक्षाओं के संचालित होने के बाद भी व्हाट्सएप के जरिये बच्चों को काम देकर प्रोजेक्ट जमा कराए जा रहे हैं। ऑनलाइन कक्षाओं का वजूद बढ़ गया है। शिक्षा विभाग ने भी दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा सुधारने का आग्रह किया।
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मानवी कोहली, जीआईसी, पिथौरागढ़।
- फोटो : PITHORAGARH
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विस्तार
कोरोना काल से जीवनशैली में बदलाव हुआ है। बच्चों के पढ़ने-लिखने की आदत में भी इसका असर हुआ है। स्कूल खुलने के बाद भी पढ़ाई में तकनीक का हस्तक्षेप बढ़ा है। तकनीक का दखल बढ़ने से पढ़ाई में मल्टीमीडिया का उपयोग बढ़ा है। शिक्षाविदों का कहना है कि कोरोना काल की नसीहत और अनुभव से सीख लेते हुए निजी स्कूलों में तकनीकी शिक्षण बढ़ा है।
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मल्लिकार्जुन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षक संजय मुरारी बताते हैं कि ऑनलाइन और एप के जरिये पढ़ाई पर ज्यादा जोर दिया गया। यूसीएसएस स्कूल के निदेशक एडवोकेट डॉ. श्याम सिंह कार्की, उदयन इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य विपिन चंद्र पांडेय, एबीसी अल्मामतार पब्लिक स्कूल के प्रबंधक एडवोकेट मदन सिंह महर का कहना है कि मल्टी मीडिया का उपयोग स्कूलों की जरूरत बन गया है।
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प्रधानाचार्य पांडेय बताते हैं कि कक्षाओं के संचालित होने के बाद भी व्हाट्सएप के जरिये बच्चों को काम देकर प्रोजेक्ट जमा कराए जा रहे हैं। ऑनलाइन कक्षाओं का वजूद बढ़ गया है। शिक्षा विभाग ने भी दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा सुधारने का आग्रह किया। प्रभारी सीईओ भानुप्रताप सिंह का कहना है कि फिलहाल नेपाल सीमा के अलावा दूरदराज के 75 से अधिक सरकारी स्कूल वाले क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्किंग ठीक नहीं है। इनमें सुधार का आग्रह किया गया है। नजदीक के कुछ स्कूलों में वाट्सएप के माध्यम से काम देने और उत्तरों की जांच पर काम हुआ है।
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शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए बच्चों पर दिया अधिक ध्यान
जिले में डिजिटल दौर के बाद तकनीकी स्तर पर स्कूलों ने तमाम प्रयोग किए। बच्चों पर उनकी गतिविधियों के हिसाब से सबसे अधिक ध्यान देने के साथ ही मनोदशा के हिसाब से उन पर स्कूल प्रबंधन ने फोकस किया। सबसे अधिक ध्यान उन बच्चों पर दिया गया, जिन्हें बोर्ड की परीक्षा में बैठना है। कुछ स्कूल इन प्रयासों में सफल भी रहे हैं। बच्चों के शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए विद्यालय प्रबंधन ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ विचार विमर्श जारी रखा। अभिभावकों से उनके बच्चों की पढ़ाई पर लगातार ध्यान देने के लिए कहा गया। बच्चों में नवीन तरीकों से अध्ययन कराए जाने के लिए सुझावों का आदान-प्रदान किया गया। इन समूचे प्रयासों का लाभ सरकारी और प्राइवेट दोनों ही स्कूलों को मिला।
नई तकनीक में बच्चों को पढ़ाई का बोझ अधिक न लगे इसके लिए खेल और मनोरंजन गतिविधियों भी कराईं गईं। सरकारी स्कूलों के शिक्षक बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई का आकलन करने के लिए शिक्षक बच्चों के घर भी गए। अभिभावकों से बात भी की। जिन स्थानों में संचार सुविधा नहीं थी वहां पर शिक्षकों ने कुछ छात्रों का एक समूह बनाकर एक स्थान पर साप्ताहिक पढ़ाई का काम भी किया। ऑफलाइन पढ़ाई के दौरान कई बच्चे ऐसे थे जो स्कूल नहीं आ पाए। इस कारण शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाई पर भी अधिक ध्यान देना पड़ा। उन्हें बच्चों को विषय ज्ञान कराने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ी। यह ऐसा समय था जब शिक्षकों ने स्वयं को भी मानसिक रूप से मजबूत किया। इससे उन्हें बिना किसी तनाव के बच्चों के शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में कामयाबी मिली।
जब बच्चे स्कूल आए तो उनका स्तर काफी नीचे था। कुछ बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई पूरे मनोयोग से की। दो साल की जो कमी बच्चों में आई थी, उसे दूर करने के लिए उन पर पूरा ध्यान शिक्षकों ने लगाया। जो बहुत कमजोर बच्चे थे उनकी बेसिक पढ़ाई फिर से शुरू की। इस कारण अब बच्चे पढ़ाई के लिए बेहद उत्साहित हैं। वे अब बुरे दौर को भूलकर फिर से अच्छा प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। - यशोदा पाठक, प्रधानाचार्य, एशियन एकेडमी पिथौरागढ़।
बच्चों की मनोदशा को समझकर उनकी पढ़ाई सुधारने के लिए काफी मेहनत की गई। आमने-सामने बैठ कर बच्चों से बात की गई। उनकी काउंसिलिंग की गई। घर और स्कूल में होने वाली पढ़ाई को लेकर बात की गई। शिक्षकों का पढ़ाया उन्हें समझ आया या नहीं, इसे लेकर भी वार्ता की। इसके बेहतर परिणाम दिखने लगे हैं। छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। बोर्ड परीक्षा में भी वे बेहतर करेंगे। - सुनीता रावत, प्रधानाचार्य, मानस एकेडमी, दौला पिथौरागढ़।
कोरोना काल में घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाया गया। कई स्थानों पर संचार सुविधा नहीं थी। घर जाकर अभिभावकों के साथ ही बच्चों से आमने-सामने बात कर उनकी मनोदशा का भी पता चला। इससे स्कूल आए बच्चों की स्थिति ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे बच्चों से बेहतर दिखी। बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के लिए उन्हें अध्ययन सामग्री देकर भी प्रेरित किया गया। - विनय कुमार पांडे, शिक्षक, राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय कुटी, धारचूला।

दीक्षा, मानस एकेडमी, पिथौरागढ़।- फोटो : PITHORAGARH