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Pithoragarh News: मोस्टा देवता के डोला दर्शन से निहाल हुए श्रद्धालु
Tue, 15 Sep 2026 11:29 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:29 PM IST
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फोटो-15 पीटीएच 13 पी-मोस्टमानू के मुख्य मेले में विधि-विधान से उठा मोस्टा देवता का डोला और आशी
पिथौरागढ़। सोर घाटी और गोरंग देश की आस्था का केंद्र प्रसिद्ध मोस्टमानू के मुख्य मेले का आयोजन हुआ। मुख्य मेले में विधि-विधान से मोस्टा देवता का डोला उठा। हजारों लोग मोस्टा देवता का आशीर्वाद लेने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य से सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
मुख्य मेले के लिए सोर घाटी और गोरंग देश के लोगों में सुबह से ही उत्साह रहा। सुबह 10 बजे से ही मोस्टमानू मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। मोस्टा देवता के मंदिर में प्रात: पुजारियों ने पूजा अर्चना की। दोपहर बाद मेला स्थल पैक हो गया और लोगों को खड़े होने के लिए भी जगह मिलनी मुश्किल हो गई। इसके बाद भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। दोपहर में खुकदे के जागरखले से डोला यात्रा शुरू हुई। ढोल-नगाड़ों और शंख ध्वनि के साथ मोस्टा बाबा, मां महाकाली, बाला, असुर, लाटा, भैरव और पंचकोटी देवताओं जयकारे के साथ डोले मंदिर में पहुंचे। डोलों की मंदिर में परिक्रमा कराई गई।
डोलों के विसर्जन पर पंचकोटी देवडांगरों ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद दिया। लोगों ने फूल और अक्षत से डोलों की पूजा की। मेले के मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी रहे। यहां मेला संयोजक विरेंद्र सिंह बोहरा, महापौर कल्पना देवलाल, पुजारी नारायण कांडपाल आदि मौजूद रहे। मेले में भीड़ को देखते हुए एसपी अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए खुद मोर्चा संभाला।
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पत्थर उठाने के लिए नजर आया उत्साह
मंदिर परिसर में रखे गए भारी भरकम पत्थर को उठाने के लिए युवाओं में खासा उत्साह दिखा। मान्यता है कि मंदिर परिसर में रखे इस पत्थर को उठाने वाले को मोस्टा देवता का आशीर्वाद मिलता है और उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इस पत्थर को उठा पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई श्रद्धालु पत्थर उठाने में कामयाब हुए तो कई निराश होकर लौटे।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
मोस्टमानू मेले में आस्था के साथ ही लोक संस्कृति के रंग बिखरे। मेले में सांस्कृतिक दलों और कलाकारों ने कार्यक्रम पेश कर चार चांद लगाए। प्रसिद्ध लोक गायिका माया उपाध्याय, लोक गायक कैलाश कुमार ने माया को टोटल, आखों में सुरमा, घास काटली सहित कई लोकगीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को इनकी धुन पर झूमने पर मजबूर कर दिया। दर्शक भी इन गीतों पर जमकर थिरके। वहीं विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोक संस्कृति के रंग बिखेरे। देर शाम तक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा इनका आनंद लेने के लिए दर्शकों की खासी भीड़ रही। संवाद
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चंडाक बाजार से आगे वाहनों की आवाजाही करनी पड़ी प्रतिबंधित
पिथौरागढ़। मोस्टमानू मेले में भीड़ इतनी थी कि पुलिस को व्यवस्थाओं के लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ी। बड़ी संख्या में लोग वाहनों से चंडाक पहुंचे। इस दौरान चंडाक बाजार से मंदिर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई इससे लोगों को पैदल चलने के लिए भी जगह नहीं मिली। ऐसे में पुलिस को चंडाक बाजार से आगे वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित करनी पड़ी। संवाद
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नेपाल से जुड़ी है मोस्टा देवता की आस्था
पिथौरागढ़। पुजारी नारायण कांडपाल ने बताया कि मोस्टा देवता की आस्था नेपाल से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1865 में धारीगांव, छानापांडे और हलपाटी के तीन साथी नेपाल गए थे जहां उन्होंने मोस्टा देवता की महिमा जानी। तब उन्होंने वहां के देवडांगर से मोस्टा देवता को गोरंगदेश ले जाने की बात कही। देवडांगर ने उनसे कहा कि नीचे बह रही नदी से एक शिला उठाकर ले जाओ लेकिन शर्त यह रहेगी कि हाथों से नीचे जहां पर यह शिला रखी जाएगी वहीं मोस्टा देवता की स्थापना करनी होगी। तीनों साथी शिला को लेकर चंडाक पहुंचे और थकान के चलते उन्होंने वहीं शिला रख दी। जब थकान दूर होने पर शिला उठाने लगे तो वह नहीं उठी और लुढ़ककर महाकाली मंदिर के पास चली गई। जब उन्हें नेपाल के देवडांगर की शर्त याद आई तो उन्होंने उसी स्थान पर मोस्टा देवता की स्थापना का निर्णय लिया लेकिन महाकाली माता के देवडांगर ने इससे मना कर दिया और शर्त रखी की जब मोस्टा देवता क्षेत्र में राक्षस के उत्पात को बंद कर देंगे तभी महाकाली मंदिर के पास उनकी स्थापना होगी। ऐसा ही हुआ और तब से मोस्टमानू में महाकाली मंदिर के पास मोस्टा देवता विराजमान हैं।
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मुख्य मेले के लिए सोर घाटी और गोरंग देश के लोगों में सुबह से ही उत्साह रहा। सुबह 10 बजे से ही मोस्टमानू मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। मोस्टा देवता के मंदिर में प्रात: पुजारियों ने पूजा अर्चना की। दोपहर बाद मेला स्थल पैक हो गया और लोगों को खड़े होने के लिए भी जगह मिलनी मुश्किल हो गई। इसके बाद भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। दोपहर में खुकदे के जागरखले से डोला यात्रा शुरू हुई। ढोल-नगाड़ों और शंख ध्वनि के साथ मोस्टा बाबा, मां महाकाली, बाला, असुर, लाटा, भैरव और पंचकोटी देवताओं जयकारे के साथ डोले मंदिर में पहुंचे। डोलों की मंदिर में परिक्रमा कराई गई।
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डोलों के विसर्जन पर पंचकोटी देवडांगरों ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद दिया। लोगों ने फूल और अक्षत से डोलों की पूजा की। मेले के मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी रहे। यहां मेला संयोजक विरेंद्र सिंह बोहरा, महापौर कल्पना देवलाल, पुजारी नारायण कांडपाल आदि मौजूद रहे। मेले में भीड़ को देखते हुए एसपी अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए खुद मोर्चा संभाला।
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पत्थर उठाने के लिए नजर आया उत्साह
मंदिर परिसर में रखे गए भारी भरकम पत्थर को उठाने के लिए युवाओं में खासा उत्साह दिखा। मान्यता है कि मंदिर परिसर में रखे इस पत्थर को उठाने वाले को मोस्टा देवता का आशीर्वाद मिलता है और उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इस पत्थर को उठा पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई श्रद्धालु पत्थर उठाने में कामयाब हुए तो कई निराश होकर लौटे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
मोस्टमानू मेले में आस्था के साथ ही लोक संस्कृति के रंग बिखरे। मेले में सांस्कृतिक दलों और कलाकारों ने कार्यक्रम पेश कर चार चांद लगाए। प्रसिद्ध लोक गायिका माया उपाध्याय, लोक गायक कैलाश कुमार ने माया को टोटल, आखों में सुरमा, घास काटली सहित कई लोकगीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को इनकी धुन पर झूमने पर मजबूर कर दिया। दर्शक भी इन गीतों पर जमकर थिरके। वहीं विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोक संस्कृति के रंग बिखेरे। देर शाम तक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा इनका आनंद लेने के लिए दर्शकों की खासी भीड़ रही। संवाद
चंडाक बाजार से आगे वाहनों की आवाजाही करनी पड़ी प्रतिबंधित
पिथौरागढ़। मोस्टमानू मेले में भीड़ इतनी थी कि पुलिस को व्यवस्थाओं के लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ी। बड़ी संख्या में लोग वाहनों से चंडाक पहुंचे। इस दौरान चंडाक बाजार से मंदिर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई इससे लोगों को पैदल चलने के लिए भी जगह नहीं मिली। ऐसे में पुलिस को चंडाक बाजार से आगे वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित करनी पड़ी। संवाद
नेपाल से जुड़ी है मोस्टा देवता की आस्था
पिथौरागढ़। पुजारी नारायण कांडपाल ने बताया कि मोस्टा देवता की आस्था नेपाल से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1865 में धारीगांव, छानापांडे और हलपाटी के तीन साथी नेपाल गए थे जहां उन्होंने मोस्टा देवता की महिमा जानी। तब उन्होंने वहां के देवडांगर से मोस्टा देवता को गोरंगदेश ले जाने की बात कही। देवडांगर ने उनसे कहा कि नीचे बह रही नदी से एक शिला उठाकर ले जाओ लेकिन शर्त यह रहेगी कि हाथों से नीचे जहां पर यह शिला रखी जाएगी वहीं मोस्टा देवता की स्थापना करनी होगी। तीनों साथी शिला को लेकर चंडाक पहुंचे और थकान के चलते उन्होंने वहीं शिला रख दी। जब थकान दूर होने पर शिला उठाने लगे तो वह नहीं उठी और लुढ़ककर महाकाली मंदिर के पास चली गई। जब उन्हें नेपाल के देवडांगर की शर्त याद आई तो उन्होंने उसी स्थान पर मोस्टा देवता की स्थापना का निर्णय लिया लेकिन महाकाली माता के देवडांगर ने इससे मना कर दिया और शर्त रखी की जब मोस्टा देवता क्षेत्र में राक्षस के उत्पात को बंद कर देंगे तभी महाकाली मंदिर के पास उनकी स्थापना होगी। ऐसा ही हुआ और तब से मोस्टमानू में महाकाली मंदिर के पास मोस्टा देवता विराजमान हैं।

फोटो-15 पीटीएच 13 पी-मोस्टमानू के मुख्य मेले में विधि-विधान से उठा मोस्टा देवता का डोला और आशी

फोटो-15 पीटीएच 13 पी-मोस्टमानू के मुख्य मेले में विधि-विधान से उठा मोस्टा देवता का डोला और आशी