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विकास से उत्तराखंड की पहचान का नुकसान न हो

Sun, 22 Oct 2017 10:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 22 Oct 2017 10:10 PM IST
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Development does not damage the identity of Uttarakhand
पिथौरागढ़ में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते पद्मश्री शेखर पाठक - फोटो : अमर उजाला

‘उत्तराखंड के विकास की दिशा’ पर रविवार से जिला पंचायत सभागार में दो दिनी संगोष्ठी शुरू हो गई है। यह संगोष्ठी आर्किटेक्ट लॉरी बेकर, पूर्व राज्यपाल भैरव दत्त पांडे और आईसीएस भैरव दत्त सनवाल की जन्मशती के मौके पर आयोजित की जा रही है। पहाड़ पत्रिका की ओर से आयोजित संगोष्ठी में पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक ने कहा कि संतुलित विकास के लिए समग्र सोच की जरूरत है। जल जंगल, जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पलायन, सुशासन, कानून व्यवस्था, नशाखोरी, महिलाओं और बच्चों के मुद्दों पर ठोस नीति बनानी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास की नीति इस तरह तैयार की जाए कि उत्तराखंड की पहचान को नुकसान न हो।

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संगोष्ठी में वरिष्ठ भूगर्भवेत्ता नवीन जुयाल ने कहा कि उत्तराखंड के विकास की दशा तय करते समय यहां की भूगर्भीय बनावट और संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए। हिमालय को एक बच्चे की तरह बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके साथ जबर्दस्ती की गई तो यह आक्रामक हो जाएगा। जीबी पंत पर्यावरण संस्थान कटारमल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रणवीर रावल ने कहा कि कृषि और वन उपजों को संरक्षित करने की दिशा में काम किया जाए। उन्होंने कहा कि अकेले पिथौरागढ़ जिले में 250 से ज्यादा कृषि उपज पैदा होती हैं। इनका उत्पादन बढ़ाया जाए तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सकती है। नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन साह ने कहा कि आज सहभागिता मूलक राजनीति को स्थापित करने की जरूरत है। तभी राज्य का सही ढंग से विकास हो पाएगा।
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राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने कहा कि उत्तराखंड में विकास की नीति के केंद्र में कृषि को रखा जाए। इसमें नई तकनीक को भी शामिल किया जाए। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए गांधीवादी चिंतक राधा बहन ने विकास के लिए अन्य देशों में चल रही नीतियों को अपनाने के बजाय अपने परिवेश के अनुरूप नीति तैयार करने पर जोर दिया। संगोष्ठी का संचालन पहाड़ संपादक मंडल के सदस्य डा. ललित पंत ने किया। इस मौके पर फोटोग्राफर अनूप साह, थ्रीश कपूर, चंदन डांगी, रजनीश, ललित पांडे, नवीन पांगती, सुभाष तराण, अनिल कार्की, बीडी कसनियाल समेत कई लोग थे। संगोष्ठी सोमवार को भी जारी रहेगी।

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