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पेयजल टैंक की मरम्मत को आए ठेकेदार को भगाया
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मुनस्यारी पेयजल योजना के तीसरे टैंक में 28 दिन के लिए जांच के लिए भरा गया पानी खाली करने के बाद ठेकेदार ने टैंक की मरम्मत शुरू करा दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने काम रुकवा दिया।
मुनस्यारी के लिए 1.94 करोड़ रुपये की लागत से बन रही पेयजल योजना का निर्माण मानकों पर खरा नहीं उतरा है। शिकायत के बाद गठित जांच समिति ने दो टैंकों को ध्वस्त करने और एक टैंक को 28 दिन तक पानी भरने के बाद तकनीकी जांच के बाद उपयोग में लाने की बात कही थी, लेकिन तीसरे टैंक से रिसाव शुरू होने पर जांच के लिए भरे गए पानी को ठेकेदार ने चौथे दिन ही खाली करा दिया था।
मंगलवार सुबह मजदूर लेकर ठेकेदार टैंक की मरम्मत करने पहुंचा और मजदूर काम करने लगे लेकिन इसकी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार भुवन वर्मा ने सुधारीकरण का काम रुकवा दिया।
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इसके बावजूद नायब तहसीलदार के जाते ही ठेकेदार ने फिर से काम शुरू कर दिया। इसके बाद नायब तहसीलदार ने फोन से कार्य स्थल पर पुलिस बुलाने की बात कही, तभी ठेकेदार वहां से गया।
मानकों के विपरीत बन रही पेयजल योजना का मुद्दा जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया लगातार उठा रहे हैं। मर्तोलिया ने ठेकेदार के कार्य की जांच कर उसे काली सूची में डालने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले में दोषी मिलने पर अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
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मुनस्यारी के लिए 1.94 करोड़ रुपये की लागत से बन रही पेयजल योजना का निर्माण मानकों पर खरा नहीं उतरा है। शिकायत के बाद गठित जांच समिति ने दो टैंकों को ध्वस्त करने और एक टैंक को 28 दिन तक पानी भरने के बाद तकनीकी जांच के बाद उपयोग में लाने की बात कही थी, लेकिन तीसरे टैंक से रिसाव शुरू होने पर जांच के लिए भरे गए पानी को ठेकेदार ने चौथे दिन ही खाली करा दिया था।
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मंगलवार सुबह मजदूर लेकर ठेकेदार टैंक की मरम्मत करने पहुंचा और मजदूर काम करने लगे लेकिन इसकी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार भुवन वर्मा ने सुधारीकरण का काम रुकवा दिया।
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इसके बावजूद नायब तहसीलदार के जाते ही ठेकेदार ने फिर से काम शुरू कर दिया। इसके बाद नायब तहसीलदार ने फोन से कार्य स्थल पर पुलिस बुलाने की बात कही, तभी ठेकेदार वहां से गया।
मानकों के विपरीत बन रही पेयजल योजना का मुद्दा जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया लगातार उठा रहे हैं। मर्तोलिया ने ठेकेदार के कार्य की जांच कर उसे काली सूची में डालने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले में दोषी मिलने पर अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।