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रामगंगा के उफान से हो रहा भूकटाव, खतरे में आए कई परिवार
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रामगंगा नदी के ऊफान में आने से मल्लीधारा और तल्ला गरजिला में लगातार कटाव हो रहा है। संवाद न्यूज ए?
- फोटो : PITHORAGARH
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थल (पिथौरागढ़)। रामगंगा के उफान में आने से जोग्यूड़ा थल के तल्ली धारा से बगीचे तक की लगभग 200 मीटर जमीन में जमकर भू-कटाव हो रहा है। यह क्रम पिछले पिछले 15 दिनों से जारी है। हालांकि सरकार ने 375 मीटर भूस्खलन संभावित क्षेत्र में तटबंध बनाने के लिए सिंचाई विभाग को राशि दे दी है। इसके बावजूद बरसात से पहले तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। वहीं, लगातार हो रहे भू-कटाव से मल्लीधारा और तल्ला गरजिला में कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। ग्रामीणों की उपजाऊ जमीन नदी में समा रही है।
2007 में रामगंगा के उफान में आने से 700 मीटर ऊपर बसे गरजिला गांव में 12 परिवार आपदा से प्रभावित हुए थे। इसी को देखते हुए सरकार ने इस 375 मीटर भूस्खलन क्षेत्र में तटबंध निर्माण के लिए इस साल लगभग चार करोड़ पिच्चानबे लाख अवमुक्त किए। इसी मार्च में कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग खंड बेड़ीनाग की निगरानी में प्रदत्त ठेकेदार ने कार्य शुरू किया। ठेकेदार ने तटबंध का कार्य बड़ी पुलिया से शुरू किया और तटबंध निर्माण में जेसीबी से पुल से लेकर तल्ली धारा और बगीचे तक गहरी नींव खोदकर निर्माण कार्य शुरू किया। 220 मीटर तक तटबंध निर्माण के बाद जून में आपदा काल आने से निर्माण कार्य में ब्रेक लग गया और जो वास्तविक 155 मीटर वाला भूस्खलन जोन था उसका कार्य अवशेष रह गया।
अब हालात ये है कि जेसीबी से नींव की गहरी खुदाई की वजह से एक सप्ताह पहले पहली बारिश में रामगंगा के उफान पर आने से काफी मात्रा में भू कटाव हो गया। नतीजतन बगीचे और तल्ली धारा क्षेत्र की काफी जमीन नदी में समा गई। काफी ऊपर तक जमीन में दरार पड़ चुकी हैं। लगातार हो रहे भू-कटाव से मल्ली धारा और तल्ला गरजिला में रह रहे कई परिवारों के मकानों को खतरा हो गया है। तल्ला गरजिला निवासी जगदीश चंद्र पाठक ने कहा कि विभाग के ठेकेदार ने अपनी सहूलियत देखकर काम किया और जब कार्य उतना नहीं कर सकते थे तो वहां तक नींव नहीं खोदनी चाहिए थी। ठेकेदार के धीमी गति से काम करने की वजह से ही कार्य अधूरा रह गया और खुदान के बाद छोड़ देने से भूस्खलन हो रहा है। तल्ला गरजिला निवासी डॉ. दिनेश चंद्र पाठक ने बताया कि चार साल पहले उन्होंने इस भूस्खलन क्षेत्र में तटबंध बनाने का मामला उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग देहरादून में उठाया था और निर्माण कार्य से पूर्व नीचे से ऊपर की ओर तटबंध निर्माण के लिए डीएम को पत्र भेजा था।
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तटबंध निर्माण के लिए प्रशासन से जनवरी से अनुमति मांगी गई थी। जो उन्हें दो माह बाद मार्च में मिली। अगर तय समय पर अनुमति मिल जाती तो निर्माण कार्य पूरा हो जाता। ऊपर से किए गए निर्माण कार्य को बस्ती इलाका होने की वजह से प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू किया गया था। 220 मीटर कार्य तेजी से किया गया था। छूटे 155 मीटर तटबंध को बरसात के बाद पूरा किया जाएगा। -धीरज जोशी, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, बेड़ीनाग।
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2007 में रामगंगा के उफान में आने से 700 मीटर ऊपर बसे गरजिला गांव में 12 परिवार आपदा से प्रभावित हुए थे। इसी को देखते हुए सरकार ने इस 375 मीटर भूस्खलन क्षेत्र में तटबंध निर्माण के लिए इस साल लगभग चार करोड़ पिच्चानबे लाख अवमुक्त किए। इसी मार्च में कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग खंड बेड़ीनाग की निगरानी में प्रदत्त ठेकेदार ने कार्य शुरू किया। ठेकेदार ने तटबंध का कार्य बड़ी पुलिया से शुरू किया और तटबंध निर्माण में जेसीबी से पुल से लेकर तल्ली धारा और बगीचे तक गहरी नींव खोदकर निर्माण कार्य शुरू किया। 220 मीटर तक तटबंध निर्माण के बाद जून में आपदा काल आने से निर्माण कार्य में ब्रेक लग गया और जो वास्तविक 155 मीटर वाला भूस्खलन जोन था उसका कार्य अवशेष रह गया।
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अब हालात ये है कि जेसीबी से नींव की गहरी खुदाई की वजह से एक सप्ताह पहले पहली बारिश में रामगंगा के उफान पर आने से काफी मात्रा में भू कटाव हो गया। नतीजतन बगीचे और तल्ली धारा क्षेत्र की काफी जमीन नदी में समा गई। काफी ऊपर तक जमीन में दरार पड़ चुकी हैं। लगातार हो रहे भू-कटाव से मल्ली धारा और तल्ला गरजिला में रह रहे कई परिवारों के मकानों को खतरा हो गया है। तल्ला गरजिला निवासी जगदीश चंद्र पाठक ने कहा कि विभाग के ठेकेदार ने अपनी सहूलियत देखकर काम किया और जब कार्य उतना नहीं कर सकते थे तो वहां तक नींव नहीं खोदनी चाहिए थी। ठेकेदार के धीमी गति से काम करने की वजह से ही कार्य अधूरा रह गया और खुदान के बाद छोड़ देने से भूस्खलन हो रहा है। तल्ला गरजिला निवासी डॉ. दिनेश चंद्र पाठक ने बताया कि चार साल पहले उन्होंने इस भूस्खलन क्षेत्र में तटबंध बनाने का मामला उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग देहरादून में उठाया था और निर्माण कार्य से पूर्व नीचे से ऊपर की ओर तटबंध निर्माण के लिए डीएम को पत्र भेजा था।
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तटबंध निर्माण के लिए प्रशासन से जनवरी से अनुमति मांगी गई थी। जो उन्हें दो माह बाद मार्च में मिली। अगर तय समय पर अनुमति मिल जाती तो निर्माण कार्य पूरा हो जाता। ऊपर से किए गए निर्माण कार्य को बस्ती इलाका होने की वजह से प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू किया गया था। 220 मीटर कार्य तेजी से किया गया था। छूटे 155 मीटर तटबंध को बरसात के बाद पूरा किया जाएगा। -धीरज जोशी, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, बेड़ीनाग।