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पुल टूटने के मामले में कंपनी के इंचार्ज, मैनेजर, एजीएम, जीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज
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तवाघाट में बैली ब्रिज ध्वस्त होने के लिए जिम्मेदार सड़क निर्माण का काम कर रही गर्ग एंड गंर्ग के इंचार्ज, मैनेजर, एजीएम और जीएम के खिलाफ धारचूला थाने में धारा 279, 431, 427, 253, 2/3 के रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। चारों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, राजकीय कार्य में बाधा डालने, लापरवाही बरतने समेत तमाम आरोप एफआईआर में लगाए गए हैं।
शुक्रवार को उप जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार शुक्ला ने एफआईआर दर्ज न होने पर तहसीलदार नंदन राम को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। तहसीलदार के निर्देश पर शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे राजस्व उप निरीक्षक उदय सिंह भंडारी ने धारचूला थाने में गर्ग एंड गंर्ग कंपनी के इंचार्ज, मैनेजर, एजीएम और जीएम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
थानाध्यक्ष विजेंद्र शाह ने बताया कि एफआईआर में कहा गया है कि ग्रिफ की ओर से बैली ब्रिज से पोकलैंड लदे ट्रॉला को पार न ले जाने की हिदायत दी गई थी, जिसकी अनदेखी की गई। कहा गया कि ब्रिज टूटने से सेना के जवानों की सामग्री सीमा पर नहीं पहुंच पा रही है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ ही राजकीय कार्य में बाधा डालने का काम किया गया है।
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बैली ब्रिज टूटने का मामला : कंपनी ने हिदायतों पर नहीं किया था अमल
19 जनवरी को पोकलैंड लदे ट्रॉला के गुजरने के दौरान तवाघाट का बैली ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया था। ग्रिफ के अधिकारियों ने कहा था कि बैली ब्रिज की क्षमता 18 टन भार सहन करने की थी। लोडेड ट्रॉला का भार 30 टन से अधिक था। इसी वजह से बैली ब्रिज ध्वस्त हो गया। उप जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार शुक्ला ने 21 जनवरी को तहसीलदार नंदन राम को सड़क निर्माण कंपनी गर्ग एंड गर्ग के इंचार्ज, मैनेजर, एजीएम और जीएम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे लेकिन तहसीलदार ने रिपोर्ट दर्ज कराने में तत्परता नहीं दिखाई।
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शुक्रवार को उप जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार शुक्ला ने एफआईआर दर्ज न होने पर तहसीलदार नंदन राम को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। तहसीलदार के निर्देश पर शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे राजस्व उप निरीक्षक उदय सिंह भंडारी ने धारचूला थाने में गर्ग एंड गंर्ग कंपनी के इंचार्ज, मैनेजर, एजीएम और जीएम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
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थानाध्यक्ष विजेंद्र शाह ने बताया कि एफआईआर में कहा गया है कि ग्रिफ की ओर से बैली ब्रिज से पोकलैंड लदे ट्रॉला को पार न ले जाने की हिदायत दी गई थी, जिसकी अनदेखी की गई। कहा गया कि ब्रिज टूटने से सेना के जवानों की सामग्री सीमा पर नहीं पहुंच पा रही है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ ही राजकीय कार्य में बाधा डालने का काम किया गया है।
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बैली ब्रिज टूटने का मामला : कंपनी ने हिदायतों पर नहीं किया था अमल
19 जनवरी को पोकलैंड लदे ट्रॉला के गुजरने के दौरान तवाघाट का बैली ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया था। ग्रिफ के अधिकारियों ने कहा था कि बैली ब्रिज की क्षमता 18 टन भार सहन करने की थी। लोडेड ट्रॉला का भार 30 टन से अधिक था। इसी वजह से बैली ब्रिज ध्वस्त हो गया। उप जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार शुक्ला ने 21 जनवरी को तहसीलदार नंदन राम को सड़क निर्माण कंपनी गर्ग एंड गर्ग के इंचार्ज, मैनेजर, एजीएम और जीएम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे लेकिन तहसीलदार ने रिपोर्ट दर्ज कराने में तत्परता नहीं दिखाई।