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भवन निर्माण की चीनी तकनीक को सराहा

Thu, 03 Nov 2016 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Thu, 03 Nov 2016 10:17 PM IST
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Chinese construction technique highlights
तिब्बत की मंडी तकलाकोट में चल रहा एक भवन का निर्माण कार्य - फोटो : अमर उजाला

तिब्बत की मंडी तकलाकोट से लौटे सीमांत के व्यापारी चीन की निर्माण तकनीक से हैरान हैं। वहां पर यदि किसी भवन में लिंटर डाला जाए तो वह चार दिन में खोल दिया जाता है, जबकि भारतीय क्षेत्र में बनने वाले भवनों के लिंटर सेट होने में कम से कम तीन सप्ताह का समय लग जाता है।

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तिब्बत में अब जितने भी भवन बन रहे हैं, उनकी सामग्री को इतना बेहतर स्तर का रखा गया है कि वह सेट होने में ज्यादा समय नहीं लगाता। सीमेंट की गुणवत्ता बेहतरीन रहती है। चीन में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। हर भवन को भूकंपरोधी बनाया जाता है, ताकि तिब्बत के पठार में अक्सर आने वाले भूकंप के झटकों को यह भवन झेल लें।
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तिब्बत की मंडी से लौटे चकर सिंह गर्ब्याल, नरेंद्र बिष्ट, जीवन रौंकली का कहना है कि हर साल तिब्बत में विकास के नए आयाम नजर आते हैं। इससे साबित होता है कि वहां पर निर्माण कार्यों में ज्यादा विलंब नहीं होता। वहां पर वन कानून के पेच ज्यादा नहीं हैं। यदि ऐसा होता तो लिपुलेख दर्रे तक सड़क पहुंचाने में वर्षों बीत जाते। वह कहते हैं कि तिब्बत में सरकारी स्तर का भ्रष्टाचार नजर नहीं आता। हर अधिकारी और कर्मचारी को निष्ठा से काम करते देखा जाता है। चीन ने विकास की दिशा में दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया है। वह कहते हैं कि अगले साल जब वह तकलाकोट जाएंगे तब तक वहां पर कई प्रकार से बदलाव दिख जाएंगे। पिछले दस साल में तिब्बत पर चीन ने ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है।

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