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Pithoragarh News: शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई के लिए पलायन कर रहे बच्चे
Sat, 05 Oct 2024 11:34 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 05 Oct 2024 11:34 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जनपद के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो रही है। इसकी मार विद्यार्थी और अभिभावक झेल रहे हैं। प्रवक्ता के तीन तो एलटी संवर्ग में शिक्षकों के चार पद रिक्त हैं। गणित, विज्ञान और हिंदी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक न होने से विद्यार्थियों ने विद्यालय से किनारा कर लिया है। नतीजतन एक दशक में यहां 78 प्रतिशत छात्रसंख्या घट गई। क्षेत्र के विद्यार्थियों को पलायन कर पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय सहित अन्य विद्यालयों का रुख करना पड़ा है।
वर्ष 1971 में संचालित मुनस्यारी विकासखंड के मदकोट हाईस्कूल का वर्ष 1979 में उच्चीकरण हुआ। स्थानीय स्तर पर इंटर कॉलेज संचालित होने से क्षेत्र के 24 से अधिक गांवों के विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यहां प्रधानाचार्य सहित प्रवक्ता और एलटी संवर्ग के शिक्षकों के 20 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 15 पद लंबे समय से रिक्त हैं। सिर्फ भौतिक विज्ञान के स्थायी प्रवक्ता तैनात हैं। जीव विज्ञान, राजनीतिक विज्ञान और संस्कृत पढ़ाने के लिए प्रवक्ता नहीं हैं। वहीं एलटी सवर्ग में भी हिंदी, गणित, विज्ञान और संस्कृत का ज्ञान देने के लिए शिक्षक नहीं हैं।
इन पदों पर अतिथि शिक्षकों की भी तैनाती नहीं हुई। शिक्षकों की कमी के चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई तो उन्हें विद्यालय छोड़कर 125 किमी दूर जिला मुख्यालय पलायन करना पड़ा है। नतीजतन एक दशक में यहां छात्रसंख्या छह गुना घट गई। 10 साल पूर्व यहां छात्रसंख्या 700 थी जो वर्तमान में सिर्फ 156 है। क्षेत्र के अधिकांश विद्यार्थी जिला मुख्यालय के विद्यालयों में प्रवेश लेते हुए किराए में कमरा लेकर सुनहरे भविष्य के सपने बुनने के लिए मजबूर हैं। संवाद
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बमुश्किल हुई कुछ अतिथि शिक्षकों की तैनाती
पिथौरागढ़। जीआईसी मदकोट में कुछ साल पूर्व बमुश्किल हिंदी, भूगोल, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान और गणित विषय के लिए अतिथि शिक्षकों की तैनाती हुई। दूरस्थ विद्यालयों में अतिथि शिक्षक लंबे समय तक सेवा देने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के विद्यार्थियों को विद्यालय पर भरोसा कम है तो वे अब भी अन्य विद्यालयों का रुख कर रहे हैं इससे छात्रसंख्या नहीं बढ़ रही।
विद्यार्थियों के भरोसे स्कूल की स्वच्छता
पिथौरागढ़। जीआईसी मदकोट में स्वच्छक का पद लंबे समय से रिक्त है। विद्यार्थियों के भरोसे स्कूल की सफाई व्यवस्था चल रही है। स्वच्छक न होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ विद्यालय की सफाई भी करनी पड़ रही है।
कोट
शिक्षकों की नियुक्ति के लिए लगातार निदेशालय से पत्राचार किया जा रहा है। कुछ अतिथि शिक्षकों की नियुक्त की गई है।
- डीएल आर्या, खंड शिक्षा अधिकारी, मुनस्यारी।
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वर्ष 1971 में संचालित मुनस्यारी विकासखंड के मदकोट हाईस्कूल का वर्ष 1979 में उच्चीकरण हुआ। स्थानीय स्तर पर इंटर कॉलेज संचालित होने से क्षेत्र के 24 से अधिक गांवों के विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यहां प्रधानाचार्य सहित प्रवक्ता और एलटी संवर्ग के शिक्षकों के 20 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 15 पद लंबे समय से रिक्त हैं। सिर्फ भौतिक विज्ञान के स्थायी प्रवक्ता तैनात हैं। जीव विज्ञान, राजनीतिक विज्ञान और संस्कृत पढ़ाने के लिए प्रवक्ता नहीं हैं। वहीं एलटी सवर्ग में भी हिंदी, गणित, विज्ञान और संस्कृत का ज्ञान देने के लिए शिक्षक नहीं हैं।
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इन पदों पर अतिथि शिक्षकों की भी तैनाती नहीं हुई। शिक्षकों की कमी के चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई तो उन्हें विद्यालय छोड़कर 125 किमी दूर जिला मुख्यालय पलायन करना पड़ा है। नतीजतन एक दशक में यहां छात्रसंख्या छह गुना घट गई। 10 साल पूर्व यहां छात्रसंख्या 700 थी जो वर्तमान में सिर्फ 156 है। क्षेत्र के अधिकांश विद्यार्थी जिला मुख्यालय के विद्यालयों में प्रवेश लेते हुए किराए में कमरा लेकर सुनहरे भविष्य के सपने बुनने के लिए मजबूर हैं। संवाद
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बमुश्किल हुई कुछ अतिथि शिक्षकों की तैनाती
पिथौरागढ़। जीआईसी मदकोट में कुछ साल पूर्व बमुश्किल हिंदी, भूगोल, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान और गणित विषय के लिए अतिथि शिक्षकों की तैनाती हुई। दूरस्थ विद्यालयों में अतिथि शिक्षक लंबे समय तक सेवा देने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के विद्यार्थियों को विद्यालय पर भरोसा कम है तो वे अब भी अन्य विद्यालयों का रुख कर रहे हैं इससे छात्रसंख्या नहीं बढ़ रही।
विद्यार्थियों के भरोसे स्कूल की स्वच्छता
पिथौरागढ़। जीआईसी मदकोट में स्वच्छक का पद लंबे समय से रिक्त है। विद्यार्थियों के भरोसे स्कूल की सफाई व्यवस्था चल रही है। स्वच्छक न होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ विद्यालय की सफाई भी करनी पड़ रही है।
कोट
शिक्षकों की नियुक्ति के लिए लगातार निदेशालय से पत्राचार किया जा रहा है। कुछ अतिथि शिक्षकों की नियुक्त की गई है।
- डीएल आर्या, खंड शिक्षा अधिकारी, मुनस्यारी।