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छिमाल देवी मंदिर : भगवान विष्णु के अवतारों के प्रसंग सुनाए
Thu, 29 Jun 2023 10:33 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 29 Jun 2023 10:33 PM IST
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गंगोलीहाट के छिमाल देवी मंदिर में भागवत कथा को सुनने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। छिमाल देवी मंदिर में भागवत कथा के नौवें दिन व्यास किशोर जोशी ने कहा कि हिंदू धार्मिक ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार, धरती पर बढ़ते पापों को खत्म करने के लिए भगवान खुद संसार में अवतार के रूप में प्रकट होते हैं। उन्होंने भक्तों को भगवान विष्णु के अवतारों के प्रसंग सुनाए।
उन्होंने बताया कि मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का पहला अवतार है। मान्यता के अनुसार एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर समुद्र की गहराई में छुपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में आकर वेदों को पाया और उन्हें फिर स्थापित किया। वराह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से तीसरा अवतार है।
इस अवतार में भगवान ने सुअर का रूप धारण करके हिरण्याक्ष राक्षस का वध किया। कूर्म अवतार को कच्छप अवतार भी कहते हैं। इसमें भगवान विष्णु कछुआ बनकर प्रकट हुए थे। कच्छप अवतार में श्री हरि ने क्षीरसागर के समुद्रमंथन में मंदर पर्वत को अपने कवच पर रखकर संभाला था। मंथन में भगवान विष्णु, मंदर पर्वत और वासुकी सर्प की मदद से देवताओं और राक्षसों ने चौदह रत्न पाए थे। शाम को आरती के बाद महा भंडारे में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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उन्होंने बताया कि मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का पहला अवतार है। मान्यता के अनुसार एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर समुद्र की गहराई में छुपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में आकर वेदों को पाया और उन्हें फिर स्थापित किया। वराह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से तीसरा अवतार है।
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इस अवतार में भगवान ने सुअर का रूप धारण करके हिरण्याक्ष राक्षस का वध किया। कूर्म अवतार को कच्छप अवतार भी कहते हैं। इसमें भगवान विष्णु कछुआ बनकर प्रकट हुए थे। कच्छप अवतार में श्री हरि ने क्षीरसागर के समुद्रमंथन में मंदर पर्वत को अपने कवच पर रखकर संभाला था। मंथन में भगवान विष्णु, मंदर पर्वत और वासुकी सर्प की मदद से देवताओं और राक्षसों ने चौदह रत्न पाए थे। शाम को आरती के बाद महा भंडारे में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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