फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Captain Shahi dies of heroic conquest

वीर चक्र विजेता कैप्टन शाही का निधन

Sun, 18 Mar 2018 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 18 Mar 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
Captain Shahi dies of heroic conquest
देवजंग शाही - फोटो : अमर उजाला

वीर चक्र विजेता ऑरनरी कैप्टन देवजंग शाही (97) का रविवार की सुबह लगभग साढ़े नौ बजे निधन हो गया है। सोमवार को रामेश्वर घाट पर 28 पंजाब रेजीमेंट उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर के बीच अंतिम विदाई देगी। शाही ने वर्ष 1961 में कांगों में तैनाती के दौरान अपनी जान पर खेलकर प्लाटून की रक्षा की थी। इस दौरान वह बुरी तरह घायल हुए और तीन साल अस्पताल में भर्ती रहे। उनकी इस वीरता को देखते हुए सेना के प्रतिष्ठित वीर चक्र सम्मान से नवाजा गया।

विज्ञापन


रविवार सुबह भाटकोट रोड स्थित आवास पर कैप्टन शाही ने अंतिम सांस ली। इससे पहलेे घर पर ही उनकी तबियत खराब हो गई थी। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। एसडीएम संतोष कुमार पांडेय, जिला पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी ले. कर्नल जीएस चंद, सहायक अधिकारी महाबीर सिंह राणा समेत कई पूर्व सैनिकों और गणमान्य नागरिकों ने घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी।
विज्ञापन


दिवंगत शाही मूल रूप से मूनाकोट के ग्राम चिराली पोस्ट गाड़गांव के रहने वाले थे। उन्होंने 28 वर्ष तक 3 प्रथम गोरखा रेजीमेंट में रहकर देश सेवा की। सेवानिवृत्ति के बाद भाटकोट आवास पर रह रहे थे। पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। शाही अपने पीछे दो विवाहित पुत्र, तीन पुत्रियों का भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कांगों में जान पर खेलकर की प्लाटून की रक्षा
वीर चक्र विजेता शाही ने वर्ष 1961 में कांगों में तैनाती के दौरान अपनी जान पर खेलकर प्लाटून की रक्षा की थी। इस दौरान वह बुरी तरह घायल हुए और तीन साल अस्पताल में भर्ती रहे। उनकी इस वीरता को देखते हुए सेना के प्रतिष्ठित वीर चक्र सम्मान से नवाजा गया। गृहयुद्ध से जूझ रहे कांगों में भारतीय रिलीफ फोर्स में तैनाती के दौरान शाही और उनकी प्लाटून दुश्मनों से घिर गई थी। ऊपर से विमान से बमबारी हो रही थी। बमबारी से सड़क टूट गई और मौके से निकलना का रास्ता भी बंद हो गया। इस दौरान शाही ने अपनी बहादुरी का प्रदर्शन करते हुए प्लाटून के दो दर्जन से अधिक जवानों की जान बचाई। उन्होंने अपनी जान पर खेलकर दुश्मनों से मोर्चा लिया। लड़ाई के दौरान शाही ग्रेनेड की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हुए।


समाजसेवा में खर्च होती थी पेंशन
वीर चक्र विजेता शाही की पेंशन समाजसेवा से जुड़े कामों में खर्च होती थी। वह खुद भी सामाजिक कार्यों में भागीदारी करते थे। उनकी फोटोग्राफी में भी काफी रुचि थी। बेटे मदन शाही बताते हैं कि शाही अपनी पेंशन सामाजिक कार्यों में खर्च करते थे। क्षेत्र की समस्याओं को लेकर बहुत सजग रहते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed