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Pithoragarh News: बैसाख के काफल ने सावन में बिखेरी रंगत
Fri, 02 Aug 2024 11:15 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 02 Aug 2024 11:15 PM IST
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गंगोलीहाट के दशाईथल-आंवलाघाट सड़क पर काफल के पेड़ में लगे फल। संवाद
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। मौसम में बदलाव आने और बारिश की देरी का असर फलदार वृक्षों की पैदावार पर दिख रहा है। बिना मौसम के काफल के पेड़ में फलों से लद गए हैं। साल में एक बार फल देने वाले काफल में इस बार गर्मी के बाद दूसरी बार फल आए हैं।
नगर से तीन किमी दूर दसाईथल-आंवलाघाट मोटर मार्ग पर लोहारकट्या के पास काफल का पेड़ फलों से लदा है। इसमें काफल पक कर लाल हुए हैं। वनस्पति विज्ञान के जानकार इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं लेकिन यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कई लोग बैसाख में पकनने वाले काफल को बरसात के सीजन में पका देखकर अचंभित हैं। बुजुर्गों का कहना है कि काफल ही नहीं अन्य कई प्रजाति के पेड़ों में भी हर साल एक सीजन में दो-दो बार फल दिखाई देते हैं।
68 साल के मोहन चंद्र बताते हैं कि माल्टा, नींबू, अमरूद, काफल, आम के किसी-किसी पेड़ में एक सीजन में दो बार फल आते हैं। डॉ. लोकेश डसीला कहते हैं कि ऐसा सभी प्रजाति के पेड़ों में नहीं होता है। बेमौसमी फलों में वह पोषक तत्व भी नहीं पाए जाते हैं जो मौसम में पकने वाले फलों में होते हैं। वह कहते हैं इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। डॉ. जेएन पंत का कहना है कि बेमौसमी फल कम रसीले और स्वाद में फीके होते हैं। इनको खाने से किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। संवाद
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नगर से तीन किमी दूर दसाईथल-आंवलाघाट मोटर मार्ग पर लोहारकट्या के पास काफल का पेड़ फलों से लदा है। इसमें काफल पक कर लाल हुए हैं। वनस्पति विज्ञान के जानकार इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं लेकिन यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कई लोग बैसाख में पकनने वाले काफल को बरसात के सीजन में पका देखकर अचंभित हैं। बुजुर्गों का कहना है कि काफल ही नहीं अन्य कई प्रजाति के पेड़ों में भी हर साल एक सीजन में दो-दो बार फल दिखाई देते हैं।
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68 साल के मोहन चंद्र बताते हैं कि माल्टा, नींबू, अमरूद, काफल, आम के किसी-किसी पेड़ में एक सीजन में दो बार फल आते हैं। डॉ. लोकेश डसीला कहते हैं कि ऐसा सभी प्रजाति के पेड़ों में नहीं होता है। बेमौसमी फलों में वह पोषक तत्व भी नहीं पाए जाते हैं जो मौसम में पकने वाले फलों में होते हैं। वह कहते हैं इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। डॉ. जेएन पंत का कहना है कि बेमौसमी फल कम रसीले और स्वाद में फीके होते हैं। इनको खाने से किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। संवाद
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