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Pithoragarh News: चंपावत में सेब का उत्पादन पिछली बार से पांच प्रतिशत अधिक
Fri, 07 Aug 2026 11:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 07 Aug 2026 11:12 PM IST
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चंपावत। जनपद में इस बार सेब का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार सेब उत्पादन में पांच फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिले के चंपावत, लोहाघाट और पाटी ब्लॉक में सैकड़ों काश्तकार सेब उत्पादन से जुड़कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। सेब की बिक्री से कई काश्तकारों को सालाना लाखों रुपये की आय हो रही है।
उद्यान विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में 225 हेक्टेयर भूमि पर 5508 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। हालांकि मौसम और ओलावृष्टि के कारण बगीचों में फलों को नुकसान पहुंचा था, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहा। बाजार में गुणवत्ता के आधार पर काश्तकारों को सेब के अच्छे दाम मिल रहे हैं। बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की कीमत करीब 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है। स्थानीय सेब की बढ़ती मांग से काश्तकारों में भी उत्साह है। चंपावत क्षेत्र में उत्पादित सेब का स्वाद लोगों को खूब पसंद आ रहा है। जिले में कई काश्तकारों ने 100 क्विंटल से अधिक सेब का उत्पादन किया है। जनपद में रेड गाला, किंग रोएट, डिलिसियस, गोल्डन और किंग रैबिट प्रजाति के सेब का उत्पादन किया जाता है। वर्तमान में अधिकांश काश्तकार रेड गाला और किंग रोएट प्रजाति के सेब को प्राथमिकता दे रहे हैं। उद्यान विभाग भी सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी और योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।
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पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सेब उत्पादन में करीब पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि ओलावृष्टि से कुछ क्षेत्रों में फलों को नुकसान पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद काश्तकारों को बेहतर उत्पादन मिला है। विभाग की ओर से अगले वर्ष उत्पादन और बढ़ाने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
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योगेश भट्ट, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत
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एप्पल मिशन के तहत बगीचे में सेब के पौधे लगाए थे। इस वर्ष बगीचे से करीब 25 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। मौसम ने साथ दिया होता और ओलावृष्टि की मार नहीं पड़ती तो उत्पादन इससे कहीं बेहतर होता। पहाड़ी क्षेत्रों में सेब उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। किसानों को बागवानी से जोड़ने के लिए इस तरह की योजनाएं काफी लाभकारी साबित हो रही हैं।
कमल गिरी, प्रगतिशील काश्तकार, दूधपोखरा
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करीब 20 नाली भूमि में सेब की खेती की थी। इस बार बगीचे से करीब 20 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। हालांकि, ओलावृष्टि के कारण इस वर्ष पैदावार पिछले साल की तुलना में कुछ कम रही। यदि मौसम अनुकूल रहता तो उत्पादन और बेहतर हो सकता था। क्षेत्र में सेब की खेती किसानों के लिए आय का अच्छा साधन बन रही है और बागवानी से ग्रामीणों का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
रमेश खर्कवाल, सुंई खैसकांडे, लोहाघाट
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उद्यान विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में 225 हेक्टेयर भूमि पर 5508 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। हालांकि मौसम और ओलावृष्टि के कारण बगीचों में फलों को नुकसान पहुंचा था, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहा। बाजार में गुणवत्ता के आधार पर काश्तकारों को सेब के अच्छे दाम मिल रहे हैं। बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की कीमत करीब 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है। स्थानीय सेब की बढ़ती मांग से काश्तकारों में भी उत्साह है। चंपावत क्षेत्र में उत्पादित सेब का स्वाद लोगों को खूब पसंद आ रहा है। जिले में कई काश्तकारों ने 100 क्विंटल से अधिक सेब का उत्पादन किया है। जनपद में रेड गाला, किंग रोएट, डिलिसियस, गोल्डन और किंग रैबिट प्रजाति के सेब का उत्पादन किया जाता है। वर्तमान में अधिकांश काश्तकार रेड गाला और किंग रोएट प्रजाति के सेब को प्राथमिकता दे रहे हैं। उद्यान विभाग भी सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी और योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।
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पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सेब उत्पादन में करीब पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि ओलावृष्टि से कुछ क्षेत्रों में फलों को नुकसान पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद काश्तकारों को बेहतर उत्पादन मिला है। विभाग की ओर से अगले वर्ष उत्पादन और बढ़ाने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
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योगेश भट्ट, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत
एप्पल मिशन के तहत बगीचे में सेब के पौधे लगाए थे। इस वर्ष बगीचे से करीब 25 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। मौसम ने साथ दिया होता और ओलावृष्टि की मार नहीं पड़ती तो उत्पादन इससे कहीं बेहतर होता। पहाड़ी क्षेत्रों में सेब उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। किसानों को बागवानी से जोड़ने के लिए इस तरह की योजनाएं काफी लाभकारी साबित हो रही हैं।
कमल गिरी, प्रगतिशील काश्तकार, दूधपोखरा
करीब 20 नाली भूमि में सेब की खेती की थी। इस बार बगीचे से करीब 20 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। हालांकि, ओलावृष्टि के कारण इस वर्ष पैदावार पिछले साल की तुलना में कुछ कम रही। यदि मौसम अनुकूल रहता तो उत्पादन और बेहतर हो सकता था। क्षेत्र में सेब की खेती किसानों के लिए आय का अच्छा साधन बन रही है और बागवानी से ग्रामीणों का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
रमेश खर्कवाल, सुंई खैसकांडे, लोहाघाट