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अमर उजाला स्वास्थ्य अभियान : टीका लगाकर सुरक्षित महसूस कर रहे हैं बच्चे
Sun, 27 Mar 2022 12:36 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी
Published by: हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2022 12:36 AM IST
सार
बच्चे भी बेसब्री से कोविड टीकाकरण का इंतजार कर रहे थे। अब बच्चों को इस बात की खुशी भी है कि उनके घर के हर एक सदस्य का टीकाकरण हो गया है। इसके बाद उनके मन में पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का कोई भय नहीं है।
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टनकपुर ट्रामा सेंटर में टीकाकरण कराती 13 वर्षीय अंशु। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : TANAKPUR
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विस्तार
जिले में टीकाकरण के बाद 15 से 17 आयु वर्ग के बच्चे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जिले में इस आयु वर्ग के 26126 बच्चों का टीकाकरण का लक्ष्य था। इनमें से 22651 को पहली और 14471 को दूसरी डोज लगी है। उन्हें लगता है कि अब वह भी कोविड की लड़ाई में शामिल हो गए हैं।
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शुरुआत में पहली पंक्ति के कार्यकर्ता और बुजुर्गों का टीकाकरण किया गया। बच्चे भी बेसब्री से कोविड टीकाकरण का इंतजार कर रहे थे। अब बच्चों को इस बात की खुशी भी है कि उनके घर के हर एक सदस्य का टीकाकरण हो गया है। इसके बाद उनके मन में पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का कोई भय नहीं है। वे अब पूरे उत्साह के साथ स्कूल जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन के साथ ही अभिभावकों को कोरोना के प्रति अब कोई डर नहीं है। स्कूलों में बच्चों की 100 फीसदी उपस्थिति हो रही है जबकि कोविड का टीका न लगने के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे थे। तीसरी लहर में भी कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा लेकिन अब स्थिति सामान्य है।
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अब बच्चे झिझक रहे, न शिक्षक
चंपावत/लोहाघाट। कोरोना से उबरते हुए अब बच्चे स्कूल जाने में न हिचक रहे हैं न झिझक लेकिन उनकी सीखने-समझने की सामर्थ्य में जरूर कमी आई है। इसके पीछे कक्षाओं के लंबे वक्त तक बंद रहने के अलावा ऑनलाइन कक्षाओं से पढ़ाई को समझाने-समझने की सीमा रही। शिक्षकों का कहना है कि इससे ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। इन हालात में धीरे-धीरे स्कूली शिक्षण के साथ सुधार हो रहा है और आगे तेजी से होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि स्कूलों में उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। स्कूल प्रबंधन की ओर से भी बच्चों को इसके लिए अलग तरह से प्रेरित किया जा रहा है। परीक्षा भी बच्चे उत्साह से दे रहे हैं। इससे बच्चे सीखने की प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कुल 15367 में से 13984 (91 प्रतिशत) से अधिक छात्र-छात्राओं ने बिना किसी संशय के स्कूल का रुख किया जबकि वर्चुअल पद्धति से करीब 45 प्रतिशत बच्चे ही पढ़ सके थे।
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सरकारी और निजी स्कूलों में बराबर रहा टीकाकरण
पिथौरागढ़। सरकारी और निजी स्कूल टीकाकरण का ग्राफ बराबर रहा। सरकारी स्कूलों के साथ ही निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों ने बच्चों के टीकाकरण अभियान को लेकर उत्साह दिखाया। सीएमओ डॉ. हीरा सिंह ह्यांकी ने बताया कि टीकाकरण के लिए लक्ष्य शासन स्तर से तय होता है। इसके बाद अभियान की शुरुआत की जाती है।
सभी शिक्षकों, बच्चों और उनके अभिभावकों को टीका लग चुका है। पहली और दूसरी डोज लगने के बाद बच्चों में काफी खुशी है। पढ़ाई का एक अच्छा माहौल बन चुका है। जब टीका नहीं लगा था, तो सबके मन में कोविड होने का डर था, जो अब नहीं है। - कल्पना देवलाल, प्रधानाचार्य, स्टफोर्ड स्कूल।
परिवार में हर सदस्य को कोविड का टीका लग चुका था। कोविड होने का खतरा लगा रहता था। स्कूल भी खुल गए थे, लेकिन अब दोनों डोज लगने के बाद काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। पढ़ाई में भी पूरी तरह ध्यान लग रहा है। कोविड की चिंता अब नहीं है। - प्रशांत, छात्र, स्टफोर्ड स्कूल, पिथौरागढ़।
परिवार में बच्चों को भी कोविड का टीका लग चुका है। कोविड के दौर में बच्चों में पढ़ाई की चिंता नहीं थी। उन्हें कोविड के होने का खतरा था। उनका ध्यान हर दिन कोविड से हुई मौतों पर जाता था। अब कोई परेशानी नहीं है। - बलदेव कलखुड़िया, अभिभावक।
विद्यालय में कोविड का टीका लगने के बाद बच्चे सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पढ़ाई का अच्छा माहौल विकसित होने लगा है। पहले एक डर का माहौल सभी में था। कई अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे थे। अब सब ठीक है। - रमेश चंद्र जोशी, प्रबंधक, गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल, पिथौरागढ़।
पहले संक्रमण का डर था। तब घर के हर एक सदस्य को कोविड की दोनों डोज जल्द लगने का इंतजार था। कोरोना से कई लोगों की मौत हुई। अब बच्चों को टीका लगने के बाद काफी सुकून है। परिवार के हर सदस्य को टीका लगने से काफी राहत महसूस हुई। - मोतिमा देवी, अभिभावक, पिथौरागढ़।
पहले घर वाले चिंता में रहते थे कि कहीं कोविड संक्रमण न हो जाए लेकिन अब कोविड रोधी दोनों टीके लगने से हम सभी में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। टीके लगने के बाद परिवार के लोग भी खुश हैं। काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। - सचिन मेहता, छात्र, गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल, पिथौरागढ़।
ऑनलाइन पढ़ाई में गांवों में नेटवर्क बाधा बनी थी। इस कारण बच्चों को बड़ा नुकसान हुआ। हां अब बच्चे पूरे मनोयोग से पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावकों की काउंसिलिंग के बाद पिछले पाठ्यक्रम को समझाने के लिए शिक्षक भी खूब मेहनत कर रहे हैं। - श्याम सिंह कार्की, प्रबंधक, यूसीएसएस स्कूल, चंपावत।
कोविड से पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई लेकिन अब स्कूल खुलने पर बच्चे उत्साह से पढ़ाई कर रहे हैं। खेल-खेल में शिक्षण पद्धति से बच्चों को सहज तरीके से सीखाया जा रहा है। पढ़ाई के गैप को दूर करने के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की मदद ली जा रही है। - देवेंद्र थ्वाल, प्रधानाचार्य, एंजिल्स एकेडमी, चंपावत।
कोविड काल में स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने पर जोर दिया गया। वर्चुअल पढ़ाई में बच्चों को ऑनलाइन में अधिकतर पाठ्य सामग्री समझने में दिक्कतें आती थीं, वह दिक्कत अब दूर हो रही है। अब बच्चे बेझिझक स्कूल आ रहे हैं। - संजय मुरारी, प्रधानाचार्य, मल्लिकार्जुन स्कूल, चंपावत।