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भारत के सीमावर्ती गांवों में नेपाली एफएम की गूंज
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23 साल से धूल फांक रहा पिथौरागढ़ आकाशवाणी केंद्र का स्टूडियो। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। चीन और नेपाल सीमा से लगा पिथौरागढ़ जिला मोबाइल नेटवर्क ही नहीं बल्कि एफएम रेडियो में भी नेपाल से बहुत पीछे है। मोबाइल टावरों की तरह एकमात्र एफएम टावर की क्षमता बेहद कम होने से भारत के सीमावर्ती गांवों में नेपाली एफएम की धुन गूंज रही है।
पिथौरागढ़ जिले की नेपाल और चीन सीमा की 25 हजार से अधिक की आबादी को बेहतर मोबाइल सेवा उपलब्ध नहीं है। बीएसएनएल के जो टावर हैं, उनकी क्षमता इतनी कम है कि सिग्नल तक नहीं आते हैं। ऐसे में इंटरनेट सुविधा तो दूर लोग बातचीत तक नहीं कर पाते हैं। मजबूरन लोगों को नेपाली मोबाइल सिम का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पांच लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में आज से 23 वर्ष पूर्व खोला गया आकाशवाणी केंद्र अपग्रेड नहीं किया गया है।
पिथौरागढ़ के चंडाक में जहां पर दूरदर्शन का टावर था, वहां पर एफएम टावर लगाया गया लेकिन इसकी क्षमता महज 100 किलोवाट है। कम क्षमता होने से जिला मुख्यालय, गंगोलीहाट सहित कुछ गिने-चुने स्थानों में ही एफएम सुना जा सकता है। मूनाकोट, कनालीछीना और धारचूला विकासखंडों की काली नदी किनारे बसी हजारों की आबादी के रेडियो और मोबाइल फोन में एफएम लगाने पर नेपाल का एफएम बजने लगता है। अधिकतर लोग मजबूर होकर नेपाली एफएम पर प्रसारित गाने सुनते हैं। वर्ष 2018 में पिथौरागढ़ आईं तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने टावर की क्षमता बढ़ाने की बात कही थी, इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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संचार मंत्री के दावे के बावजूद नहीं लगा टावर
पिथौरागढ़। सांसद अजय टम्टा ने पिछले वर्ष संसद में पिथौरागढ़ जिले में पांच किलोवाट क्षमता के एफएम टावर लगाने का मसला उठाया था। उन्होंने पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से पिथौरागढ़ में पांच किलोवाट क्षमता का टावर लगाने का आश्वासन देने और दो वर्ष बाद भी कोई काम न होने का मामला भी उठाया था। इस पर संचार मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जल्दी मांग पूरा करने का आश्वासन दिया था। सांसद अजय टम्टा का कहना है कि वे एफएम टावर के लिए लगातार प्रयासरत हैं। (ब्यूरो)
भारत के खिलाफ दुष्प्रचार में हुआ नेपाली एफएम का इस्तेमाल
पिथौरागढ़। भारत का अभिन्न हिस्सा रहे लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने नक्शे में शामिल करने के दुस्साहसिक कारनामे के दौरान नेपाल के एफएम का प्रयोग भारत के खिलाफ दुष्प्रचार में भी खूब हुआ। नेपाल के एफएम में भारत विरोधी गीतों का प्रसारण भी किया गया। यदि भारतीय एफएम टावर की क्षमता अधिक होगी तो सीमांत के लोगों को नेपाली एफएम सुनने की मजबूरी नहीं रहेगी।
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पिथौरागढ़ जिले की नेपाल और चीन सीमा की 25 हजार से अधिक की आबादी को बेहतर मोबाइल सेवा उपलब्ध नहीं है। बीएसएनएल के जो टावर हैं, उनकी क्षमता इतनी कम है कि सिग्नल तक नहीं आते हैं। ऐसे में इंटरनेट सुविधा तो दूर लोग बातचीत तक नहीं कर पाते हैं। मजबूरन लोगों को नेपाली मोबाइल सिम का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पांच लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में आज से 23 वर्ष पूर्व खोला गया आकाशवाणी केंद्र अपग्रेड नहीं किया गया है।
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पिथौरागढ़ के चंडाक में जहां पर दूरदर्शन का टावर था, वहां पर एफएम टावर लगाया गया लेकिन इसकी क्षमता महज 100 किलोवाट है। कम क्षमता होने से जिला मुख्यालय, गंगोलीहाट सहित कुछ गिने-चुने स्थानों में ही एफएम सुना जा सकता है। मूनाकोट, कनालीछीना और धारचूला विकासखंडों की काली नदी किनारे बसी हजारों की आबादी के रेडियो और मोबाइल फोन में एफएम लगाने पर नेपाल का एफएम बजने लगता है। अधिकतर लोग मजबूर होकर नेपाली एफएम पर प्रसारित गाने सुनते हैं। वर्ष 2018 में पिथौरागढ़ आईं तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने टावर की क्षमता बढ़ाने की बात कही थी, इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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संचार मंत्री के दावे के बावजूद नहीं लगा टावर
पिथौरागढ़। सांसद अजय टम्टा ने पिछले वर्ष संसद में पिथौरागढ़ जिले में पांच किलोवाट क्षमता के एफएम टावर लगाने का मसला उठाया था। उन्होंने पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से पिथौरागढ़ में पांच किलोवाट क्षमता का टावर लगाने का आश्वासन देने और दो वर्ष बाद भी कोई काम न होने का मामला भी उठाया था। इस पर संचार मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जल्दी मांग पूरा करने का आश्वासन दिया था। सांसद अजय टम्टा का कहना है कि वे एफएम टावर के लिए लगातार प्रयासरत हैं। (ब्यूरो)
भारत के खिलाफ दुष्प्रचार में हुआ नेपाली एफएम का इस्तेमाल
पिथौरागढ़। भारत का अभिन्न हिस्सा रहे लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने नक्शे में शामिल करने के दुस्साहसिक कारनामे के दौरान नेपाल के एफएम का प्रयोग भारत के खिलाफ दुष्प्रचार में भी खूब हुआ। नेपाल के एफएम में भारत विरोधी गीतों का प्रसारण भी किया गया। यदि भारतीय एफएम टावर की क्षमता अधिक होगी तो सीमांत के लोगों को नेपाली एफएम सुनने की मजबूरी नहीं रहेगी।