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विजय दिवस की गोल्डन जुबली में शहीद नारायन सिंह की वीरांगना बसंती देवी को भूला शासन-प्रशासन
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पिथौरागढ़। विजय दिवस पर शहीद नारायन सिंह की पत्नी बसंती देवी को शासन-प्रशासन भूल गया। उन्हें विजय दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। साथ ही अभी तक सरकारें शहीद नारायन सिंह के परिजनों के लिए की गई घोषणाओं को पूरा नहीं कर पाया है। इससे शहीद की पत्नी और परिजनों में नाराजगी है।
वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान नारायन सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। शहीद की पत्नी बसंती देवी का कहना है कि पिछले वर्षों तक विजय दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें बुलाया जाता था, लेकिन इस बार उन्हें कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।
उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी बिमला चंद एक साल की थी तब उनके पति देश के लिए लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे। बेटी जिला सैनिक कल्याण कार्यालय हल्द्वानी में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि बेटी की शादी के बाद वे टकाड़ी गांव में रहती हैं, लेकिन इस बार विजय दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में नहीं बुलाया तो उन्हें मायूसी हुई। उन्होंने बताया कि कुजीगाड़ स्थित पैतृक आवास जीर्ण शीर्ण हो गया है।
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जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं को आमंत्रित किया जाता है। आमंत्रित क्यों नहीं किया गया यह मालूम किया जाएगा। शहीद के नाम से जो घोषणाएं हुई हैं उनको पूरा करने को लेकर क्या प्रगति है इस बारे में पता लगाया जाएगा।
-डॉ.विजय कुमार जोगदंडे, डीएम पिथौरागढ़।
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वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान नारायन सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। शहीद की पत्नी बसंती देवी का कहना है कि पिछले वर्षों तक विजय दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें बुलाया जाता था, लेकिन इस बार उन्हें कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।
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उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी बिमला चंद एक साल की थी तब उनके पति देश के लिए लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे। बेटी जिला सैनिक कल्याण कार्यालय हल्द्वानी में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि बेटी की शादी के बाद वे टकाड़ी गांव में रहती हैं, लेकिन इस बार विजय दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में नहीं बुलाया तो उन्हें मायूसी हुई। उन्होंने बताया कि कुजीगाड़ स्थित पैतृक आवास जीर्ण शीर्ण हो गया है।
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जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं को आमंत्रित किया जाता है। आमंत्रित क्यों नहीं किया गया यह मालूम किया जाएगा। शहीद के नाम से जो घोषणाएं हुई हैं उनको पूरा करने को लेकर क्या प्रगति है इस बारे में पता लगाया जाएगा।
-डॉ.विजय कुमार जोगदंडे, डीएम पिथौरागढ़।