{"_id":"5a53adda4f1c1b0a788b75f1","slug":"91515433434-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दंड के तौर पर पहाड़ भेजे गए अधिकारी, कर्मचारी काम क्या करेंगे?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दंड के तौर पर पहाड़ भेजे गए अधिकारी, कर्मचारी काम क्या करेंगे?
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:17 PM IST
विज्ञापन
कर्मियों
- फोटो : amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व डीडीहाट के विधायक विशन सिंह चुफाल ने अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर तीखे तेवर दिखाए हैं। उन्होंने नौकरशाही की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज भी पहाड़ में दंड के तौर पर अधिकारी, कर्मचारियों को भेजा जाता है। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या दंड के तौर पर भेजे गए अधिकारी कर्मचारी यहां काम करेंगे? अधिकारियों की मानसिकता में बदलाव लाए बगैर पहाड़ का विकास संभव नहीं है। विधायक ने जांच के नाम पर विकास कार्य अटकाने पर भी सवाल उठाए।
सोमवार को भाजपा जिला कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में भाजपा के वरिष्ठ नेता चुफाल ने अफसरशाही पर निशाना साधा। कहा कि जो अधिकारी, कर्मचारी मैदानी क्षेत्रों में सही काम नहीं करते उन्हें दंड के तौर पर पहाड़ी जिलों में भेजने का सिलसिला यूपी शासन काल से चला आ रहा है। राज्य बनने के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लगा। उन्होंने हाल का उदाहरण देते हुए कहा कि खटीमा में तैनात तहसीलदार के खिलाफ लोगों की शिकायतें थीं, तो शासन ने उसको मुनस्यारी भेज दिया गया। दंड का यह तरीका सही नहीं है। दंडित होकर पिथौरागढ़ और अन्य पर्वतीय जिलों में आने के बाद भी इन अधिकारी, कर्मचारियों की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आता।
उन्होंने जांच के नाम पर निर्माण कार्य रोकने पर सरकारी मशीनरी को आड़े हाथ लिया। कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के लीमाटौड़ा के लिए पांच किमी सड़क वर्ष 1977 में स्वीकृत हो गई थी, जो केवल 100 मीटर बनी। इस मामले को वह विधानसभा में उठा चुके हैं। सचिवालय में भी इस पर सवाल खड़े किए गए, अधिकारी सड़क की जांच चल रही है कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। मंत्रिमंडल में स्थान मिलने के के बारे में पूछने पर विधायक चुफाल ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार पलायन रोकने की दिशा में बेहतर कदम उठा रही है। डेयरी, मुर्गी, बकरी पालन, उद्यानीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक साल में सरकार के कामकाज का असर दिखाई देगा। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष विरेंद्र वल्दिया, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष मीनू बिष्ट, पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेंद्र रावत, सांसद प्रतिनिधि गणेश जोशी, ललित पंत, भाजपा जिला महामंत्री महिमन कन्याल आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
चुफाल बोले, दंड के तौर पर पहाड़ भेजे गए अधिकारी, कर्मचारी काम क्या करेंगे
नौकरशाही पर लगाया जांच के नाम पर विकास कार्य अटकाने का आरोप
विज्ञापन
सोमवार को भाजपा जिला कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में भाजपा के वरिष्ठ नेता चुफाल ने अफसरशाही पर निशाना साधा। कहा कि जो अधिकारी, कर्मचारी मैदानी क्षेत्रों में सही काम नहीं करते उन्हें दंड के तौर पर पहाड़ी जिलों में भेजने का सिलसिला यूपी शासन काल से चला आ रहा है। राज्य बनने के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लगा। उन्होंने हाल का उदाहरण देते हुए कहा कि खटीमा में तैनात तहसीलदार के खिलाफ लोगों की शिकायतें थीं, तो शासन ने उसको मुनस्यारी भेज दिया गया। दंड का यह तरीका सही नहीं है। दंडित होकर पिथौरागढ़ और अन्य पर्वतीय जिलों में आने के बाद भी इन अधिकारी, कर्मचारियों की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आता।
विज्ञापन
उन्होंने जांच के नाम पर निर्माण कार्य रोकने पर सरकारी मशीनरी को आड़े हाथ लिया। कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के लीमाटौड़ा के लिए पांच किमी सड़क वर्ष 1977 में स्वीकृत हो गई थी, जो केवल 100 मीटर बनी। इस मामले को वह विधानसभा में उठा चुके हैं। सचिवालय में भी इस पर सवाल खड़े किए गए, अधिकारी सड़क की जांच चल रही है कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। मंत्रिमंडल में स्थान मिलने के के बारे में पूछने पर विधायक चुफाल ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार पलायन रोकने की दिशा में बेहतर कदम उठा रही है। डेयरी, मुर्गी, बकरी पालन, उद्यानीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक साल में सरकार के कामकाज का असर दिखाई देगा। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष विरेंद्र वल्दिया, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष मीनू बिष्ट, पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेंद्र रावत, सांसद प्रतिनिधि गणेश जोशी, ललित पंत, भाजपा जिला महामंत्री महिमन कन्याल आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
चुफाल बोले, दंड के तौर पर पहाड़ भेजे गए अधिकारी, कर्मचारी काम क्या करेंगे
नौकरशाही पर लगाया जांच के नाम पर विकास कार्य अटकाने का आरोप