फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   बरार परियोजना में नवंबर से उत्पादन बंद

बरार परियोजना में नवंबर से उत्पादन बंद

Wed, 06 Sep 2017 11:04 PM IST
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:04 PM IST
विज्ञापन
बरार परियोजना में नवंबर से उत्पादन बंद
थल (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड लघु जल विद्युत निगम ने तीन वर्ष पहले यह फैसला लिया था कि तीन मेगावाट से कम क्षमता वाली बिजली परियोजनाओं को उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) को सौंपा जाए, इसी के तहत 750 किलोवाट क्षमता वाली बरार परियोजना भी उरेडा के अधीन हो गई। जब से यह परियोजना उरेडा के हाथों में गई है, तब से इसमें कोई न कोई खराबी आती गई। इधर, नवंबर 2016 से यह परियोजना पूरी तरह ठप है।
विज्ञापन


राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में छोटी बिजली परियोजनाओं को बढ़ावा देने की खूब चर्चाएं हुई थी। पिछली सरकार ने योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए लघु जल विद्युत निगम और उरेडा को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंप दी। लघु जल विद्युत निगम तीन मेगावाट से ज्यादा क्षमता वाली एवं उरेडा तीन मेगावाट से कम क्षमता वाली परियोजनाओं का निर्माण और देखरेख करने लगा। थल की बरार परियोजना को उरेडा ने ठेके पर सौंप दिया। परियोजना तक पानी पहुंचाने के लिए बनी नहर कई बार टूट चुकी है। नवंबर 2016 से तो परियोजना के टरबाइन में पानी पहुंचना बंद हो गया है।
विज्ञापन


ठेकेदार ने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया, इस कारण कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। उरेडा के अवर अभियंता बंशीधर सूंठा का कहना है कि नहर की मरम्मत के लिए नए सिरे से टेंडर लगाए जा रहे हैं। जल्दी ही नहर की मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा। परियोजना से उत्पादन बंद होने के कारण थल बाजार तथा आसपास के इलाकों को बिजली के लिए ग्रिड पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रिड की लाइन में खराबी आने से कई बार लोगों को बिजली का संकट झेलना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विभाग खुद ही संचालित करे परियोजना
स्थानीय निवासी महिराज भैंसोड़ा का कहना है कि उरेडा को परियोजना का संचालन खुद करना चाहिए। ठेकेदार के हाथों में सौंपने के बाद से परियोजना में लगातार गड़बड़ी आ रही है। लोगों को स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली बिजली नहीं मिल पा रही है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

परियोजना का बंद होना चिंताजनक
थल निवासी नीमा चंद का कहना है कि परियोजना का अव्यवस्थाओं के कारण बंद होना चिंताजनक है। वह कहती हैं कि सरकार छोटी बिजली परियोजनाओं को बढ़ावा देने की बात गलत कहती है। यदि उत्पादन होता तो सरकार का राजस्व बढ़ता और लोगों को सुविधा मिल जाती।

धन खर्च की जांच होनी चाहिए
समाजसेवी नवीन पाठक का कहना है कि परियोजना की मरम्मत के नाम पर हो रहे धन के खर्च की जांच की जानी चाहिए। वह कहते हैं कि परियोजना की मरम्मत के लिए तथा कर्मचारियों के वेतन के लिए सरकार ने अब तक कितना पैसा जारी किया, उसका हिसाब सामने रखा जाए।


नहर में लोहे के पाइप लगाए जाएं
स्थानीय निवासी महिराज सत्याल का कहना है कि जितने स्थानों पर नहर टूटी है वहां पर लोहे के पाइप लगाए जाने चाहिए। इससे हर बार नहर टूटने का झंझट समाप्त हो जाएगा। वह कहते हैं कि परियोजना को संचालित करने के लिए सरकार को इच्छाशक्ति से काम करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed