{"_id":"5c017850bdec22415f3d98fc","slug":"81543600208-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानकों के उल्लंघन पर तीन माह में 12 स्कूल बसें व वैन हो चुकी हैं सीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानकों के उल्लंघन पर तीन माह में 12 स्कूल बसें व वैन हो चुकी हैं सीज
Updated Fri, 30 Nov 2018 11:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में पिछले तीन महीनों में नौ स्कूल बसें और तीन वैन सीज हो चुकी हैं। मानक पूरे नहीं करने पर 41 वाहनों का चालान काटा गया।
नर्सरी से लेकर इंटर तक के बच्चों के लिए कई स्कूलों ने बसें संचालित की हैं। इनमें से कुछ बसें स्कूलों की अपनी हैं तो कुछ स्कूलों ने बसों को हॉयर किया है। इनमें से अधिकांश बसों का संचालन मानकों के विपरीत किया जाता है। बसों में परिचालक या हेल्पर नहीं होने, चालकों का सत्यापन नहीं करने, बसों की खिड़कियों के बाहर सुरक्षा के लिए लोहे की रॉड नहीं लगी होने, सीसीटीवी कैमरे नहीं होने, क्षमता से अधिक बच्चों को बसों मेें ले जाने सहित तमाम मानकों के उल्लंघन पर पिछले दिनों एआरटीओ ने नौ बसों और तीन वैन को सीज किया था। इसके अलावा 41 स्कूल बसों का चालान किया गया।
बच्चों को छोड़ दिया जाता है सड़क पर
पिथौरागढ़। अधिकतर बस में तैनात परिचालक या स्कूलों के कर्मचारी बच्चों को बस से उतारकर छोड़ देते हैं। कई बसों में कंडक्टर तक नहीं होते हैं। केवल चालक बच्चों को उतारकर आगे बढ़ जाता है। अभिभावक के मौजूद नहीं होने पर ऐसे बच्चों को जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ती है।
इस लापरवाही के लिए संबंधित चालक का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। स्कूल बसों में नियमों का शत प्रतिशत पालन हो इसके लिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जाता है। मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर बसों को सीज किया जाएगा। स्कूल की अपनी बस हो या हॉयर की गई बस, दोनों में नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी है।
विज्ञापन
- नवीन सिंह, एआरटीओ पिथौरागढ़।
विज्ञापन
नर्सरी से लेकर इंटर तक के बच्चों के लिए कई स्कूलों ने बसें संचालित की हैं। इनमें से कुछ बसें स्कूलों की अपनी हैं तो कुछ स्कूलों ने बसों को हॉयर किया है। इनमें से अधिकांश बसों का संचालन मानकों के विपरीत किया जाता है। बसों में परिचालक या हेल्पर नहीं होने, चालकों का सत्यापन नहीं करने, बसों की खिड़कियों के बाहर सुरक्षा के लिए लोहे की रॉड नहीं लगी होने, सीसीटीवी कैमरे नहीं होने, क्षमता से अधिक बच्चों को बसों मेें ले जाने सहित तमाम मानकों के उल्लंघन पर पिछले दिनों एआरटीओ ने नौ बसों और तीन वैन को सीज किया था। इसके अलावा 41 स्कूल बसों का चालान किया गया।
बच्चों को छोड़ दिया जाता है सड़क पर
पिथौरागढ़। अधिकतर बस में तैनात परिचालक या स्कूलों के कर्मचारी बच्चों को बस से उतारकर छोड़ देते हैं। कई बसों में कंडक्टर तक नहीं होते हैं। केवल चालक बच्चों को उतारकर आगे बढ़ जाता है। अभिभावक के मौजूद नहीं होने पर ऐसे बच्चों को जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ती है।
विज्ञापन
इस लापरवाही के लिए संबंधित चालक का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। स्कूल बसों में नियमों का शत प्रतिशत पालन हो इसके लिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जाता है। मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर बसों को सीज किया जाएगा। स्कूल की अपनी बस हो या हॉयर की गई बस, दोनों में नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी है।
विज्ञापन
- नवीन सिंह, एआरटीओ पिथौरागढ़।