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नजीर बने प्राथमिक स्कूल के दो शिक्षक
Updated Wed, 13 Jun 2018 11:12 PM IST
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डीडीहाट(पिथौरागढ़)। उचित शिक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। अधिकतर लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ही पढ़ा रहे हैं। यहां तक की सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक के बच्चे भी निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय डीडीहाट के दो शिक्षकों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाकर मिसाल पेश की है। इनकी देखादेखी क्षेत्र के आधा दर्जन सरकारी कर्मचारियों ने भी अपने बच्चों का इस स्कूल में प्रवेश कराया है।
राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय धनियाखान डीडीहाट के शिक्षक उमेश पांडेय ने अपनी बेटी भूमिका और इसी विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका कल्पना सामंत ने अपने बेटे प्रांजल का सरकारी स्कूल में दाखिला कराकर एक मिसाल कायम की है। दोनों बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश दिलाया गया है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका माधुरी रावत ने दोनों शिक्षकों की सराहना की है। इधर विद्यालय के अच्छे पठन-पाठन को देखते हुए आधा दर्जन अन्य सरकारी कर्मचारियों ने भी अपने बच्चों को इस स्कूल में दाखिला दिलाया है।
सरकारी शिक्षकों को शिक्षण कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि सरकारी शिक्षक ही अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे तो अभिभावकों से कैसे बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश कराने को कहेंगे। - उमेश पांडेय, शिक्षक
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एक शिक्षक जब शिक्षक के साथ ही अभिभावक की भूमिका में रहेगा तो और भी अच्छे परिणाम सामने आएंगे। लोगों में सरकारी स्कूलों पर विश्वास जगाने के लिए शिक्षकों को ही आगे आना होगा। - शिक्षिका कल्पना सामंत
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राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय धनियाखान डीडीहाट के शिक्षक उमेश पांडेय ने अपनी बेटी भूमिका और इसी विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका कल्पना सामंत ने अपने बेटे प्रांजल का सरकारी स्कूल में दाखिला कराकर एक मिसाल कायम की है। दोनों बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश दिलाया गया है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका माधुरी रावत ने दोनों शिक्षकों की सराहना की है। इधर विद्यालय के अच्छे पठन-पाठन को देखते हुए आधा दर्जन अन्य सरकारी कर्मचारियों ने भी अपने बच्चों को इस स्कूल में दाखिला दिलाया है।
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सरकारी शिक्षकों को शिक्षण कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि सरकारी शिक्षक ही अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे तो अभिभावकों से कैसे बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश कराने को कहेंगे। - उमेश पांडेय, शिक्षक
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एक शिक्षक जब शिक्षक के साथ ही अभिभावक की भूमिका में रहेगा तो और भी अच्छे परिणाम सामने आएंगे। लोगों में सरकारी स्कूलों पर विश्वास जगाने के लिए शिक्षकों को ही आगे आना होगा। - शिक्षिका कल्पना सामंत