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तेरा मेरा संग्राम ही क्या मैं तुझको...
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:47 PM IST
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पिथौरागढ़। चामाचौड़ की रामलीला में बालि वध और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। हनुमान और मेघनाद के बीच हुए संवाद को काफी सराहा गया।
शबरी आश्रम में पहुंचे राम, लक्ष्मण का भक्त शबरी आदर-सत्कार करती हैं और सीता की खोज में सुग्रीव की सहायता लेने की सलाह देती हैं। सुग्रीव से मिलने राम, लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत को प्रस्थान करते हैं। दो सुकुमारों को पर्वत की ओर आता देख सुग्रीव भयभीत हो जाता है। हनुमान को उनका पता लगाने भेजता है। हनुमान भगवान राम, लक्ष्मण को पहचान जाते हैं और सुग्रीव से मित्रता कराते हैं। इसके बाद युद्ध में बालि मारा जाता है। हनुमान सीता माता का पता लगाने लंका जाते हैं। अशोक वाटिका में सीता माता को प्रभु राम का संदेश देने के बाद फल खाने की इच्छा जाहिर करते हैं।
हनुमान फल खा रहे होते हैं तो राक्षस विरोध करते हैं। इस पर हनुमान रावण पुत्र अक्षय कुमार समेत कई राक्षसों को मार डालते हैं। उसके पश्चात मेघनाद अशोक वाटिका आता है। मेघनाद कहता है-डाली-डाली तोड़के बंदर क्या दिखलाता है तू चाल, बंदी करता हूं तुझे, अपने लिए संभाल-संभाल। हनुमान कहते हैं-तेरा मेरा संग्राम ही क्या मै तुझको नाच नचाता हूं, तू इंद्रजीत छल वाला है, मैं काम जीत बलवाला हूं। मेघनाद ब्राह्मफांस से हनुमान को बंदी बना लेता है। रावण दरबार में हनुमान की पूंछ में आग लगाई जाती है और हनुमान लंका जला डालते हैं।
विभीषण रावण से सीता माता को भगवान राम को लौटाने को कहते हैं। रावण लात मारकर विभीषण को लंका से निकाल देता है। विभीषण प्रभु राम की शरण में आ जाते हैं। हनुमान की भूमिका में सूरज, मेघनाद हरीश, रावण सुंदर, सुग्रीव जगदीश, बाली की भूमिका में मोहित थे। मुख्य अतिथि चौकुना के क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज कुमार थे।
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शबरी आश्रम में पहुंचे राम, लक्ष्मण का भक्त शबरी आदर-सत्कार करती हैं और सीता की खोज में सुग्रीव की सहायता लेने की सलाह देती हैं। सुग्रीव से मिलने राम, लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत को प्रस्थान करते हैं। दो सुकुमारों को पर्वत की ओर आता देख सुग्रीव भयभीत हो जाता है। हनुमान को उनका पता लगाने भेजता है। हनुमान भगवान राम, लक्ष्मण को पहचान जाते हैं और सुग्रीव से मित्रता कराते हैं। इसके बाद युद्ध में बालि मारा जाता है। हनुमान सीता माता का पता लगाने लंका जाते हैं। अशोक वाटिका में सीता माता को प्रभु राम का संदेश देने के बाद फल खाने की इच्छा जाहिर करते हैं।
हनुमान फल खा रहे होते हैं तो राक्षस विरोध करते हैं। इस पर हनुमान रावण पुत्र अक्षय कुमार समेत कई राक्षसों को मार डालते हैं। उसके पश्चात मेघनाद अशोक वाटिका आता है। मेघनाद कहता है-डाली-डाली तोड़के बंदर क्या दिखलाता है तू चाल, बंदी करता हूं तुझे, अपने लिए संभाल-संभाल। हनुमान कहते हैं-तेरा मेरा संग्राम ही क्या मै तुझको नाच नचाता हूं, तू इंद्रजीत छल वाला है, मैं काम जीत बलवाला हूं। मेघनाद ब्राह्मफांस से हनुमान को बंदी बना लेता है। रावण दरबार में हनुमान की पूंछ में आग लगाई जाती है और हनुमान लंका जला डालते हैं।
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विभीषण रावण से सीता माता को भगवान राम को लौटाने को कहते हैं। रावण लात मारकर विभीषण को लंका से निकाल देता है। विभीषण प्रभु राम की शरण में आ जाते हैं। हनुमान की भूमिका में सूरज, मेघनाद हरीश, रावण सुंदर, सुग्रीव जगदीश, बाली की भूमिका में मोहित थे। मुख्य अतिथि चौकुना के क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज कुमार थे।
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