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झूलाघाट का 500 साल पुराना मंदिर भी डूबेगा
राजेश पंगरिया/अमर उजाला, झूलाघाट
Updated Wed, 13 Sep 2017 10:35 PM IST
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पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहा झूलाघाट का महेशानी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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महाकाली नदी पर बनने वाले भारत एवं नेपाल के संयुक्त उपक्रम पंचेश्वर बांध की जद में झूलाघाट स्थित 500 वर्ष पुराना महेशानी मंदिर भी आ रहा है। बांध बना तो यह मंदिर भी डूब जाएगा, इसी के साथ हजारों लोगों की आस्था भी महाकाली नदी में जलमग्न हो जाएगी।
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बताते हैं कि लगभग 500 वर्ष पहले माजिरकांडा गांव के कुछ भट्ट परिवारों ने झूलाघाट आकर बसना शुरू किया। तब झूलाघाट में बीहड़ जंगल था। नदी के किनारे स्थित होने के कारण यहां पर लोगों को भूत, प्रेत का डर लगता था। जो परिवार शुरुआत में यहां रहने लगे वह कई कारणों से परेशान होने लगे। माजिरकांडा के लोगों ने अपने गांव जाकर इष्टदेवता की आराधना की। बाद में यहां पर महेशानी का मंदिर स्थापित किया गया। महेशानी को पार्वती के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के पुजारी हरिबल्लभ भट्ट का कहना है कि इस मंदिर ने हमेशा झूलाघाट कस्बे की रक्षा की है। बड़ी आपदा के समय भी लोगों का संकट टल जाता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मंदिर में सच्ची श्रद्धा के साथ आता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
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अब पंचेश्वर बांध की जो डीपीआर बनी है, उसमें महेशानी मंदिर के साथ-साथ पूरे झूलाघाट कस्बे को भी डूब क्षेत्र में दर्शाया गया है। महाकाली के तट पर बने इस मंदिर के पास से ही भारत-नेपाल को जोड़ने वाला झूलापुल भी बना है। यह झूलापुल भी बांध की भेंट चढ़ जाएगा। मां महेशानी मंदिर में हर साल सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन होते हैं। पड़ोसी देश नेपाल के कलाकार भी इसमें शामिल होते हैं। आस्था के साथ-साथ यह मंदिर सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक रहा है। शाम को मंदिर में रोज सामूहिक आरती होती है। बड़ी संख्या में लोग आरती के समय मौजूद रहते हैं। क्षेत्र के 88 वर्षीय उर्बादत्त पंत कहते हैं कि महेशानी मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र है। इसके डूब क्षेत्र में आने की सूचना भर से ही मन विचलित हो जाता है। वह कहते हैं कि पंचेश्वर बांध से कई तरह के विनाश होंगे। कई विरासतें जलमग्न हो जाएंगी।
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झूलाघाट मंडी का अस्तित्व समाप्त होगा
पंचेश्वर बांध से झूलाघाट मंडी का अस्तित्व समाप्त होगा। करीब 200 साल पुरानी इस मंडी से नेपाल के बैतड़ी जिले को सामान की सप्लाई होती है। कई व्यापारी यहां पर थोक का कारोबार करते हैं। दो देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों का सेतु बना यह कस्बा भी डूब क्षेत्र में है। पुल के डूबने पर दोनों देशों के बीच आवागमन का परंपरागत रास्ता समाप्त हो जाएगा।