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लखनपुर, नजंग में अस्थायी पुल बनाने का रास्ता साफ
Updated Sun, 01 Apr 2018 10:46 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार नेपाल प्रशासन ने लखनपुर और नजंग में आवागमन के लिए अस्थायी पुल बनाने पर सहमति दे दी है। भारतीय प्रशासन के पास नेपाल प्रशासन का अनुमति पत्र पहुंच गया है। रविवार से ही दोनों पुलों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। 10 दिन के भीतर पुल बनकर तैयार हो जाएंगे।
एसडीएम आरके पांडेय ने नेपाल प्रशासन की अनुमति मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि डीएम को भी इस संबंध में सूचना मिल गई है। उन्होंने बताया कि लखनपुर और नजंग में लकड़ी के अस्थायी पुल बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। 10 अप्रैल तक दोनों पुल तैयार हो जाएंगे। 10 अप्रैल से ही माइग्रेशन से लौटने वाले लोग अपने मूल गांवों को जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि माइग्रेशन से लौटने वालों को कोई दिक्कत नहीं होगी।
फरवरी पहले सप्ताह धारचूला से 40 किमी दूर लखनपुर से लेकर उससे चार किमी आगे नजंग तक भूस्खलन से रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। पहाड़ी दरकने से पैदल चलने तक का रास्ता नहीं बचा। रास्ता बाधित होने से शीतकालीन प्रवास से लौटने वाले लोग संकट में फंस गए। भारतीय प्रशासन ने नेपाल प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता की। दार्चुला (नेपाल) का प्रशासन नेपाल सरकार के सामने मामला ले गया। कुछ दिन पहले नेपाल सरकार ने अस्थायी पुलों के निर्माण को हरी झंडी दी थी, लेकिन अनुमति पत्र न पहुंचने से असमंजस की स्थिति बनी थी।
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गर्ब्यांग, बूंदी, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रौंगकांग, कुटि के साथ ही नेपाल के छांगरू, तिंकर के लोग पालतू जानवरों के साथ अक्तूबर से मार्च तक शीतकालीन प्रवास पर निचले इलाकों में रहते हैं। अप्रैल में यह लोग अपने मूल निवास लौटते हैं। अप्रैल में ही भारत-तिब्बत व्यापार में हिस्सा लेने वाले व्यापारी इसी रास्ते से गुंजी तक सामान पहुंचाते हैं। रास्ता क्षतिग्रस्त होने से भारत-तिब्बत व्यापार के भी प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी। अस्थायी पुलों के निर्माण का रास्ता साफ होने से सीमा पर रहने वाले भारतीयों के साथ ही नेपाली नागरिकों को भी सहूलियत होगी।
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एसडीएम आरके पांडेय ने नेपाल प्रशासन की अनुमति मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि डीएम को भी इस संबंध में सूचना मिल गई है। उन्होंने बताया कि लखनपुर और नजंग में लकड़ी के अस्थायी पुल बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। 10 अप्रैल तक दोनों पुल तैयार हो जाएंगे। 10 अप्रैल से ही माइग्रेशन से लौटने वाले लोग अपने मूल गांवों को जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि माइग्रेशन से लौटने वालों को कोई दिक्कत नहीं होगी।
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फरवरी पहले सप्ताह धारचूला से 40 किमी दूर लखनपुर से लेकर उससे चार किमी आगे नजंग तक भूस्खलन से रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। पहाड़ी दरकने से पैदल चलने तक का रास्ता नहीं बचा। रास्ता बाधित होने से शीतकालीन प्रवास से लौटने वाले लोग संकट में फंस गए। भारतीय प्रशासन ने नेपाल प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता की। दार्चुला (नेपाल) का प्रशासन नेपाल सरकार के सामने मामला ले गया। कुछ दिन पहले नेपाल सरकार ने अस्थायी पुलों के निर्माण को हरी झंडी दी थी, लेकिन अनुमति पत्र न पहुंचने से असमंजस की स्थिति बनी थी।
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गर्ब्यांग, बूंदी, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रौंगकांग, कुटि के साथ ही नेपाल के छांगरू, तिंकर के लोग पालतू जानवरों के साथ अक्तूबर से मार्च तक शीतकालीन प्रवास पर निचले इलाकों में रहते हैं। अप्रैल में यह लोग अपने मूल निवास लौटते हैं। अप्रैल में ही भारत-तिब्बत व्यापार में हिस्सा लेने वाले व्यापारी इसी रास्ते से गुंजी तक सामान पहुंचाते हैं। रास्ता क्षतिग्रस्त होने से भारत-तिब्बत व्यापार के भी प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी। अस्थायी पुलों के निर्माण का रास्ता साफ होने से सीमा पर रहने वाले भारतीयों के साथ ही नेपाली नागरिकों को भी सहूलियत होगी।