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जल संस्थान की पेयजल जांच पर उठे सवाल
Updated Sun, 01 Apr 2018 10:46 PM IST
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पिथौरागढ़। नगर में दूषित पानी की आपूर्ति के बाद जल संस्थान अपने बचाव में आगे आया है। जल संस्थान ने अपने पानी के नमूूनों की जांच के बाद आपूर्ति को क्लीन चिट दी है। नगर में दूषित पानी की आपूर्ति के बाद भी नमूनों के ओके होने से विभाग की पेयजल जांच पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में नगरवासियों ने पानी के नमूनों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई है।
जल संस्थान पिथौरागढ़ नगर में ठुलीगाड़, घाट और रई योजनाओं के जरिये पेयजल आपूर्ति करता है। फरवरी में ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सीवर मिलने से घरों में दूषित पानी की आपूर्ति हुई थी। घरों में गंदे पानी की आपूर्ति का यह कोई नया मामला नहीं था। जनवरी में भी गंदे पानी की शिकायतें मिली थी। ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सीवर मिलने का मामला पकड़ में आने के बाद भी फरवरी और मार्च में घरों में गंदे पानी की आपूर्ति हुई थी।
इसे लेकर नगरवासियों में काफी आक्रोश है। लोग लगातार जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच जल संस्थान ने गंदे पानी की आपूर्ति पर अपना बचाव करने की कोशिश की है। विभाग ने नगर के पेयजल वितरण टैंकों की जांच के बाद सभी का पानी सही पाया है। विभाग ने पेयजल आपूर्ति को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप बताया है। इस संबंध में जल संस्थान ने पर्चे जारी कर आपूर्ति को क्लीन चिट दी है।
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दूसरी ओर घरों में गंदा पानी आने के बाद भी पेयजल नमूनों को सही करार देने से नगरवासी भड़क उठे हैं। लोगों का कहना है कि पेयजल आपूर्ति को लेकर जल संस्थान खुद कठघरे में है। दूषित पेयजल आपूर्ति के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे में जल संस्थान पानी के नमूनों को क्लीन चिट दे रहा है।
नगरवासी मुकेश पंत, मोहन चंद्र भट्ट, कृष्णा कापड़ी आदि का कहना है कि जल संस्थान दूषित पानी की आपूर्ति पर अपना बचाव करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में विभाग के पेयजल नमूनों की जांच पर विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने किसी स्वतंत्र एजेंसी से पेयजल नमूनों की रोजाना जांच की मांग उठाई है।
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जल संस्थान पिथौरागढ़ नगर में ठुलीगाड़, घाट और रई योजनाओं के जरिये पेयजल आपूर्ति करता है। फरवरी में ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सीवर मिलने से घरों में दूषित पानी की आपूर्ति हुई थी। घरों में गंदे पानी की आपूर्ति का यह कोई नया मामला नहीं था। जनवरी में भी गंदे पानी की शिकायतें मिली थी। ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सीवर मिलने का मामला पकड़ में आने के बाद भी फरवरी और मार्च में घरों में गंदे पानी की आपूर्ति हुई थी।
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इसे लेकर नगरवासियों में काफी आक्रोश है। लोग लगातार जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच जल संस्थान ने गंदे पानी की आपूर्ति पर अपना बचाव करने की कोशिश की है। विभाग ने नगर के पेयजल वितरण टैंकों की जांच के बाद सभी का पानी सही पाया है। विभाग ने पेयजल आपूर्ति को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप बताया है। इस संबंध में जल संस्थान ने पर्चे जारी कर आपूर्ति को क्लीन चिट दी है।
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दूसरी ओर घरों में गंदा पानी आने के बाद भी पेयजल नमूनों को सही करार देने से नगरवासी भड़क उठे हैं। लोगों का कहना है कि पेयजल आपूर्ति को लेकर जल संस्थान खुद कठघरे में है। दूषित पेयजल आपूर्ति के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे में जल संस्थान पानी के नमूनों को क्लीन चिट दे रहा है।
नगरवासी मुकेश पंत, मोहन चंद्र भट्ट, कृष्णा कापड़ी आदि का कहना है कि जल संस्थान दूषित पानी की आपूर्ति पर अपना बचाव करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में विभाग के पेयजल नमूनों की जांच पर विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने किसी स्वतंत्र एजेंसी से पेयजल नमूनों की रोजाना जांच की मांग उठाई है।