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हर बांध प्रभावित को 30 लाख का पैकेज दिया जाए
Updated Sat, 03 Feb 2018 10:40 PM IST
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पिथौरागढ़। पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति ने प्रस्तावित बांध परियोजना से प्रभावित होने वाले हर परिवार को कम से कम 30 लाख रुपये का आर्थिक पैकेज देने की मांग की है। उन्होंने इस बाबत वित्त मंत्री को ज्ञापन दिया है।
समिति के संयोजक मनोज सिंह सामंत और अध्यक्ष मान सिंह सामंत का कहना है कि हर प्रभावित को जिला मुख्यालय में प्रचलित जमीन के दाम से छह गुना अधिक का भुगतान किया जाए। जब सरकार प्रभावितों को इतनी मदद करेगी, तभी उनके पुनर्वास की सही व्यवस्था हो पाएगी।
ज्ञापन में मांग की गई है कि हर प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाया जाए। इसके अलावा हर परिवार को विस्थापित होने वाली जगह में पांच एकड़ जमीन, मकान बनाने के लिए पर्याप्त जमीन, विस्थापित किए जाने वाले स्थान पर बिजली, पानी, पक्की सड़क, स्वास्थ्य, स्कूल, डाकघर, बैंक की सुविधा दी जाए।
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ज्ञापन में कहा गया है कि डूब क्षेत्र से दो किलोमीटर के दायरे को भी प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाए, क्योंकि इन इलाकों में बांध बनने पर भूस्खलन के खतरे बढ़ेंगे। पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रही है और विस्थापन के बाद पैदा होने वाली स्थिति का अध्ययन कर रही है। पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा जिले में डूब क्षेत्र में आ रहे ज्यादातर गांवों का यह समिति भ्रमण कर चुकी है।
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समिति के संयोजक मनोज सिंह सामंत और अध्यक्ष मान सिंह सामंत का कहना है कि हर प्रभावित को जिला मुख्यालय में प्रचलित जमीन के दाम से छह गुना अधिक का भुगतान किया जाए। जब सरकार प्रभावितों को इतनी मदद करेगी, तभी उनके पुनर्वास की सही व्यवस्था हो पाएगी।
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ज्ञापन में मांग की गई है कि हर प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाया जाए। इसके अलावा हर परिवार को विस्थापित होने वाली जगह में पांच एकड़ जमीन, मकान बनाने के लिए पर्याप्त जमीन, विस्थापित किए जाने वाले स्थान पर बिजली, पानी, पक्की सड़क, स्वास्थ्य, स्कूल, डाकघर, बैंक की सुविधा दी जाए।
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ज्ञापन में कहा गया है कि डूब क्षेत्र से दो किलोमीटर के दायरे को भी प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाए, क्योंकि इन इलाकों में बांध बनने पर भूस्खलन के खतरे बढ़ेंगे। पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रही है और विस्थापन के बाद पैदा होने वाली स्थिति का अध्ययन कर रही है। पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा जिले में डूब क्षेत्र में आ रहे ज्यादातर गांवों का यह समिति भ्रमण कर चुकी है।