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बर्फबारी से माइग्रेशन वाले गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ी
Updated Sun, 04 Nov 2018 10:42 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। बर्फबारी से माइग्रेशन वाले गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। माइग्रेशन पर अंतिम गांव कुटी से ग्रामीणों के लौटने का क्रम शुरू हो गया है। सबसे आखिर में बुंदी गांव के लोग माइग्रेशन से लौटेंगे।
धारचूला से हर साल लगभग एक हजार परिवार अपने पशुओं के साथ व्यास घाटी के गांवों में माइग्रेशन पर जाते हैं। अप्रैल में माइग्रेशन पर जाने के बाद अक्तूबर अंतिम या नवंबर प्रथम सप्ताह से लौटना शुरू हो जाता है। इस साल मार्ग खराब होने से माइग्रेशन वाले परिवारों के लिए नजंग में अस्थायी पुल बनाया गया है।
इस पुल से होकर पहले नेपाल जाएंगे और तीन किमी नेपाल में चलने के बाद लखनपुर में भारत में प्रवेश करेंगे। सबसे पहले अंतिम गांव कुटी के लोग माइग्रेशन से लौटते हैं। कुटी की ग्राम प्रधान सरिता कुटियाल ने बताया कि माइग्रेशन पर गए ग्रामीणों का लौटना शुरू हो गया है।
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दुग्तू गांव में डेढ़ फुट हिमपात हुआ
धारचूला। व्यास के साथ ही सीमांत धारचूला की दारमा घाटी से भी एक-दो दिन के भीतर माइग्रेशन शुरू हो जाएगा। दारमा घाटी के 14 गांवों के लोगों ने लौटने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि दारमा घाटी के दुग्तू गांव सहित आसपास के इलाकों में अचानक मौसम बदलने से डेढ़ फुट तक हिमपात हो गया है। इससे माइग्रेशन पर गए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नजंग पुल पर एक ही जानवर के निकलने की जगह
धारचूला। कैलाश यात्रा मार्ग खराब होने से माइग्रेशन पर गए लोगों के लौटने के लिए बनाया गया नजंग पुल बेहद संकरा है। इस पुल से एक बार में एक ही जानवर निकल सकेगा। व्यास घाटी के सात गांवों से हजारों भेड़ों और घोड़े, खच्चरों को लौटना है। ऐेसे में सामान से लदे जानवरों के पुल पार करने में काफी समय लग सकता है।
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धारचूला से हर साल लगभग एक हजार परिवार अपने पशुओं के साथ व्यास घाटी के गांवों में माइग्रेशन पर जाते हैं। अप्रैल में माइग्रेशन पर जाने के बाद अक्तूबर अंतिम या नवंबर प्रथम सप्ताह से लौटना शुरू हो जाता है। इस साल मार्ग खराब होने से माइग्रेशन वाले परिवारों के लिए नजंग में अस्थायी पुल बनाया गया है।
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इस पुल से होकर पहले नेपाल जाएंगे और तीन किमी नेपाल में चलने के बाद लखनपुर में भारत में प्रवेश करेंगे। सबसे पहले अंतिम गांव कुटी के लोग माइग्रेशन से लौटते हैं। कुटी की ग्राम प्रधान सरिता कुटियाल ने बताया कि माइग्रेशन पर गए ग्रामीणों का लौटना शुरू हो गया है।
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दुग्तू गांव में डेढ़ फुट हिमपात हुआ
धारचूला। व्यास के साथ ही सीमांत धारचूला की दारमा घाटी से भी एक-दो दिन के भीतर माइग्रेशन शुरू हो जाएगा। दारमा घाटी के 14 गांवों के लोगों ने लौटने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि दारमा घाटी के दुग्तू गांव सहित आसपास के इलाकों में अचानक मौसम बदलने से डेढ़ फुट तक हिमपात हो गया है। इससे माइग्रेशन पर गए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नजंग पुल पर एक ही जानवर के निकलने की जगह
धारचूला। कैलाश यात्रा मार्ग खराब होने से माइग्रेशन पर गए लोगों के लौटने के लिए बनाया गया नजंग पुल बेहद संकरा है। इस पुल से एक बार में एक ही जानवर निकल सकेगा। व्यास घाटी के सात गांवों से हजारों भेड़ों और घोड़े, खच्चरों को लौटना है। ऐेसे में सामान से लदे जानवरों के पुल पार करने में काफी समय लग सकता है।