फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   अनियंत्रित विकास भूस्खलन का जिम्मेदार

अनियंत्रित विकास भूस्खलन का जिम्मेदार

Wed, 23 May 2018 11:12 PM IST
Updated Wed, 23 May 2018 11:12 PM IST
विज्ञापन
अनियंत्रित विकास भूस्खलन का जिम्मेदार
पिथौरागढ़। अनियंत्रित और अनियोजित विकास भूस्खलन जैसी आपदा का प्रमुख कारण है। अतिसंवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में इसके नतीजे घातक हो सकते हैं। इससे बचने के लिए आमजन में जागरूकता के साथ ही सरकार को भी सचेत होने की जरूरत है। सरकार और आमजन की भागीदारी से भूस्खलन के खतरे को कम किया जा सकता है।
विज्ञापन


बुधवार को एलएसएम महाविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में जुटे भू-वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन की तस्वीर पेश की। बीएचयू के रिटायर्ड प्रोफेसर वीके गैरोला ने कहा कि हिमालय पहले से ही भूस्खलन जैसी आपदा के प्रति संवेदशनशील है। जोन पांच और चार में शामिल अधिकांश हिमालयी क्षेत्र खतरे के मुहाने पर बैठा है। इन हालातों में अनियंत्रित और अनियोजित विकास इस खतरे को और बढ़ा रहा है। संभावित खतरों को ताख पर रख हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हो रहे हैं।
विज्ञापन


इससे कमजोर हिमालयी संरचना पर भार बढ़ रहा है। गढ़वाल विवि के भूगर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वाईपी सुंदरियाल ने कहा कि कमजोर हिमालयी संरचना के बीच मानवीय क्रियाकलाप भूस्खलन के खतरे को और बढ़ा रहा है। उन्होंने इसकी रोकथाम के लिए जन जागरुकता पर जोर दिया। कहा कि सरकार को भविष्य के खतरों के प्रति सचेत होने की जरुरत है। कार्यशाला में डॉ सुंदरियाल, पंजाब विवि के डॉ महेश ठाकुर, इलाहाबाद विवि के डॉ आरपी सिंह, डॉ पीपी घोष, डॉ वैभव श्रीवास्तव ने भूस्खलन से संबंधित शोध पत्र प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
विज्ञापन


कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ डीएम पांगती जबकि संचालन डॉ अजय शुक्ल ने किया। इस दौरान आयोजन सचिव, डॉ आरए सिंह, डॉ जीत सिंह ज्याला, डॉ एन पुनेठा, डॉ आरएल गैरोला, डॉ मुन्नी पाठक, डॉ सरोज वर्मा, डॉ गीता पांडेय, डॉ हेम चंद्र पांडेय, डॉ जीसी पंत, डॉ पुष्कर बिष्ट, डॉ रेखा पांडेय आदि थे।

सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगे भू-वैज्ञानिक
भू-वैज्ञानिक और शोध छात्र बृहस्पतिवार और शुक्रवार को जिले के संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इस दौरान मुनस्यारी और गंगोलीहाट में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। वैज्ञानिक और शोध छात्र भूस्खलन के कारणों का अध्ययन करेंगे। साथ ही लोगों को बचाव की जानकारी भी देंगे। वैज्ञानिक भूस्खलन के कारणों की पड़ताल के बाद सरकार को इस संबंध में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।


युवा वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से आए युवा वैज्ञानिकों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें डॉ मोहित कुमार, शिवानी वर्मा, गंभीर सिंह, प्रकाश विश्वकर्मा, योगिता गर्ब्याल, भारती शर्मा, कुश कुमार, अंकित पांडेय, नीरज रमोला, स्वातिलता आदि शामिल हैं। उत्कृष्ट शोध पत्रों पर युवा वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed