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25 की क्षमता वाले लॉकअप में 35 कैदी तक रखने की मजबूरी
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:54 PM IST
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में अभी जेल नहीं है। न्यायिक हिरासत वाले अपराधियों को रखने के लिए यहां पर एकमात्र लॉकअप है। इस लॉकअप की क्षमता 25 कैदियों को रखने की है। कभी-कभार इसमें 35 कैदी भी रखने पड़ जाते हैं। यदि इससे ज्यादा कैदी हो गए तो उनको अल्मोड़ा जेल भेजा जाता है।
लॉकअप की आंतरिक व्यवस्था प्रशासन देखता है और सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के पास रहती है। पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक महेश कांडपाल ने बताया कि वर्तमान में लॉकअप में 25 कैदी हैं। यह क्षमता के हिसाब से ठीक हैं। अक्सर लॉकअप में छोटे और बड़े दोनों तरह के अपराधी रखे जाते हैं। अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद इन कैदियों को फिर अल्मोड़ा या किसी अन्य जेल में भेज दिया जाता है।
एसडीएम एसके पांडे का कहना है कि लॉकअप में सफाई, मरम्मत, भोजन, प्रकाश, पेयजल की व्यवस्था सही है। इसका समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। शासन ने पिथौरागढ़ में चंडाक मार्ग पर जेल निर्माण तो शुरू कराया है, लेकिन पांच साल से इसका काम ठप पड़ा है। प्रदेश सरकार अब इस जेल का निर्माण जल्दी पूरा करने की तैयारी में है।
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लॉकअप की आंतरिक व्यवस्था प्रशासन देखता है और सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के पास रहती है। पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक महेश कांडपाल ने बताया कि वर्तमान में लॉकअप में 25 कैदी हैं। यह क्षमता के हिसाब से ठीक हैं। अक्सर लॉकअप में छोटे और बड़े दोनों तरह के अपराधी रखे जाते हैं। अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद इन कैदियों को फिर अल्मोड़ा या किसी अन्य जेल में भेज दिया जाता है।
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एसडीएम एसके पांडे का कहना है कि लॉकअप में सफाई, मरम्मत, भोजन, प्रकाश, पेयजल की व्यवस्था सही है। इसका समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। शासन ने पिथौरागढ़ में चंडाक मार्ग पर जेल निर्माण तो शुरू कराया है, लेकिन पांच साल से इसका काम ठप पड़ा है। प्रदेश सरकार अब इस जेल का निर्माण जल्दी पूरा करने की तैयारी में है।
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