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लखनपुर, नजंग के अस्थायी पुल से सामान का ढुलान शुरू
Updated Thu, 19 Apr 2018 10:56 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। दो दिन पहले भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी पर बने अस्थायी पुलों से भारत-तिब्बत व्यापारियों के सामान का ढुलान होने लगा है। 25 अप्रैल से व्यास घाटी के गांवों को माइग्रेशन भी शुरू हो जाएगा।
बृहस्पतिवार से लखनपुर और नजंग में बने लकड़ी के अस्थायी पुलों से भारत-तिब्बत व्यापार में शामिल होने वाले व्यापारियों के सामान का ढुलान शुरू हो गया है। व्यापारी गुंजी के लिए सामान का ढुलान कर रहे हैं। भारत-तिब्बत व्यापार जून से शुरू होता है। व्यापारी उससे पहले गुंजी तक सामान पहुंचा देते हैं। व्यापारियों को जुलाई से पहले हर हाल में सामान उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंचाना होगा। जुलाई से बारिश शुरू हो जाएगी।
नदी का जलस्तर बढ़ने पर अस्थायी पुल बह जाएंगे। लखनपुर एवं नजंग के बीच मोटर मार्ग और पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त होने से अस्थायी पुलों को बनाने की नौबत आई है। इसके लिए नेपाल प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ी है। बुधवार शाम एसडीएम आरके पांडे, तहसीलदार डॉ. ललित मोहन तिवारी ने लखनपुर जाकर पुलों का निरीक्षण किया था। एसडीएम का कहना है कि 25 अप्रैल से शीतकालीन प्रवास से गांवों को लौटने वाले लोगों के सामने किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
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बृहस्पतिवार से लखनपुर और नजंग में बने लकड़ी के अस्थायी पुलों से भारत-तिब्बत व्यापार में शामिल होने वाले व्यापारियों के सामान का ढुलान शुरू हो गया है। व्यापारी गुंजी के लिए सामान का ढुलान कर रहे हैं। भारत-तिब्बत व्यापार जून से शुरू होता है। व्यापारी उससे पहले गुंजी तक सामान पहुंचा देते हैं। व्यापारियों को जुलाई से पहले हर हाल में सामान उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंचाना होगा। जुलाई से बारिश शुरू हो जाएगी।
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नदी का जलस्तर बढ़ने पर अस्थायी पुल बह जाएंगे। लखनपुर एवं नजंग के बीच मोटर मार्ग और पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त होने से अस्थायी पुलों को बनाने की नौबत आई है। इसके लिए नेपाल प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ी है। बुधवार शाम एसडीएम आरके पांडे, तहसीलदार डॉ. ललित मोहन तिवारी ने लखनपुर जाकर पुलों का निरीक्षण किया था। एसडीएम का कहना है कि 25 अप्रैल से शीतकालीन प्रवास से गांवों को लौटने वाले लोगों के सामने किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
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